कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: क्रॉस वोटिंग पर भाजपा की सख्त चेतावनी, जांच का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 18 जून 2026 को विधान परिषद चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए आंतरिक जांच का ऐलान किया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने वालों की पहचान की जाएगी और उनके विरुद्ध उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य घटनाक्रम
सात सदस्यीय विधान परिषद चुनाव में भाजपा के दोनों उम्मीदवार — लिंगराज पाटिल और रघु कौटिल्य — विजयी रहे। हालाँकि, मतदान के पैटर्न ने पार्टी नेतृत्व को चिंता में डाल दिया। लिंगराज पाटिल के खाते में जाने वाले तीन वोट दूसरी तरफ चले गए, जबकि रघु कौटिल्य को मिलने वाला एक वोट अमान्य घोषित कर दिया गया।
इस क्रॉस वोटिंग का सीधा फायदा कांग्रेस को मिला, जिसे विधानसभा में अपनी अपेक्षित संख्या से अधिक वोट प्राप्त हुए — यह भाजपा के लिए एक आंतरिक अनुशासन की चुनौती के रूप में उभरा है।
नेता प्रतिपक्ष की प्रतिक्रिया
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'हम पता लगाएंगे कि किसने क्रॉस वोटिंग की और इसके पीछे क्या कारण थे। इस मुद्दे पर पार्टी मंच पर चर्चा होगी और उसके बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।' उन्होंने दोनों विजयी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी इस पूरे मामले की विस्तार से समीक्षा करेगी।
प्रदेश अध्यक्ष का रुख
कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने मल्लेश्वरम स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय जगन्नाथ भवन में विजयी उम्मीदवारों के सम्मान समारोह के बाद पत्रकारों को बताया कि पार्टी मतदान पैटर्न की बारीकी से जांच करेगी। विजयेंद्र ने कहा कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और उचित फैसला लिया जाएगा।
कार्यक्रम में उपस्थित नेता
जगन्नाथ भवन में आयोजित सम्मान समारोह में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इनमें विधायक हरीश पूंजा और महेश तेंगिनाकाई, विधान परिषद सदस्य केशव प्रसाद, पूर्व सांसद एस. मुनिस्वामी, भाजपा प्रदेश महासचिव पी. राजीव, बेंगलुरु उत्तर जिला अध्यक्ष एस. हरीश और बेंगलुरु मध्य जिला अध्यक्ष सप्तगिरि गौड़ा शामिल थे।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में विधान परिषद चुनावों के दौरान क्रॉस वोटिंग ने किसी बड़े दल को असहज स्थिति में डाला हो। भाजपा ने संकेत दिया है कि पार्टी मंच पर विस्तृत चर्चा के बाद जिम्मेदार विधायकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। आने वाले दिनों में पार्टी की आंतरिक समीक्षा के नतीजे कर्नाटक भाजपा की एकजुटता की असली परीक्षा होंगे।