3 अगस्त 2026
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कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: कांग्रेस ने पाँचों सीटें जीतीं, भाजपा को दो; जेडी(एस) का सफाया

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कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: कांग्रेस ने पाँचों सीटें जीतीं, भाजपा को दो; जेडी(एस) का सफाया

सारांश

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस की पाँचों सीटों पर जीत महज़ संख्याओं की जीत नहीं — यह डी.के. शिवकुमार की राजनीतिक ताकत का प्रमाण है। भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन में क्रॉस वोटिंग ने गठबंधन की आंतरिक दरारें उजागर कर दीं।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने 18 जून 2026 को कर्नाटक विधान परिषद की पाँचों सीटें जीतीं; भाजपा को दो और जेडी(एस) को शून्य सीट मिली।
कांग्रेस को अनुमान से 11 अतिरिक्त वोट मिले — कथित तौर पर भाजपा के 3 और जेडी(एस) के 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।
कांग्रेस उम्मीदवार विनय कार्तिक को सर्वाधिक 32 वोट ; जेडी(एस) के गोविंदराजू केवल 14 वोटों पर सिमटे।
चुनाव में कुल 222 मत पड़े, जिनमें से एक अमान्य ; जीत के लिए 27.63 वोट आवश्यक थे।
अशोक ने क्रॉस वोटिंग स्वीकार की, बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।

कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे 18 जून 2026 को घोषित हुए, जिसमें कांग्रेस ने अपनी सभी पाँचों सीटों पर जीत दर्ज की। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को दो सीटें मिलीं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। यह परिणाम मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता और भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन के लिए गहरा झटका माना जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

मतगणना में कांग्रेस उम्मीदवार बी.के. हरिप्रसाद, टिप्पन्नप्पा कामकनूर, पी.वी. मोहन और बी.एस. शिवन्ना को 30-30 वोट मिले, जबकि पाँचवें उम्मीदवार विनय कार्तिक को सर्वाधिक 32 वोट प्राप्त हुए। भाजपा के रघु कौटिल्य को 29 और लिंगराज पाटिल को 27 वोट मिले। जेडी(एस) उम्मीदवार गोविंदराजू केवल 14 वोटों पर सिमट गए। चुनाव में कुल 222 मत पड़े, जिनमें से एक मत अमान्य घोषित किया गया।

क्रॉस वोटिंग का बड़ा खेल

कांग्रेस को इस चुनाव में अपेक्षा से 11 अतिरिक्त वोट मिले। बताया जा रहा है कि भाजपा के तीन विधायकों और जेडी(एस) के छह विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की। निष्कासित भाजपा विधायक शिवराम हेब्बार और एस.टी. सोमशेखर का नाम भी इस सूची में बताया जा रहा है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बताया कि कांग्रेस के पास 138 विधायकों का समर्थन था, परंतु अंततः उम्मीदवारों को 151 विधायकों का समर्थन मिला।

सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया

सुरजेवाला ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण दिन है और यह जीत सिर्फ कांग्रेस के उम्मीदवारों की नहीं, बल्कि राज्य की जनता की जीत है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने स्वीकार किया कि पार्टी के तीन वोट कांग्रेस के पक्ष में चले गए और ऐसे विधायकों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया था, ऐसे में जेडी(एस) उम्मीदवार की हार उनके लिए भी बड़ा झटका मानी जा रही है।

आम जनता और दलों पर असर

गौरतलब है कि प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 27.63 वोटों की आवश्यकता थी। भाजपा उम्मीदवार लिंगराज पाटिल पहले दौर में केवल 27 वोट पाकर आवश्यक संख्या तक नहीं पहुँच सके थे, लेकिन जेडी(एस) उम्मीदवार के बाहर होने के बाद मतों के स्थानांतरण से वह अंततः विजयी हो गए। यह परिणाम दर्शाता है कि कर्नाटक में भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन की आंतरिक एकता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।

क्या होगा आगे

कांग्रेस उम्मीदवार टिप्पन्नप्पा कामकनूर ने जीत के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, गृह मंत्री प्रियंक खड़गे, उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल और उत्तर कर्नाटक के नेताओं का आभार जताया। विनय कार्तिक को शिवकुमार का करीबी सहयोगी माना जाता है और उनकी जीत शिवकुमार की व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करती है। भाजपा अब अपने 'बागी' विधायकों की पहचान और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया में जुटेगी, जो आने वाले महीनों में कर्नाटक की राजनीति को और गर्म रख सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सवाल उठता है कि 2028 के विधानसभा चुनाव तक यह गठबंधन कितना टिकाऊ रहेगा। कुमारस्वामी ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़ा था — उनकी हार केवल एक सीट की हार नहीं, बल्कि उनके राज्य-स्तरीय प्रभाव पर सवालिया निशान है। भाजपा को अब अनुशासन और गठबंधन धर्म के बीच संतुलन बनाना होगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव 2026 के नतीजे क्या रहे?
18 जून 2026 को घोषित नतीजों में कांग्रेस ने सात में से पाँच सीटें जीतीं, भाजपा को दो सीटें मिलीं और जेडी(एस) का उम्मीदवार हार गया। कांग्रेस को अनुमान से 11 अतिरिक्त वोट मिले, जो क्रॉस वोटिंग का संकेत है।
कर्नाटक MLC चुनाव में क्रॉस वोटिंग किसने की?
बताया जा रहा है कि भाजपा के तीन विधायकों और जेडी(एस) के छह विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की। निष्कासित भाजपा विधायक शिवराम हेब्बार और एस.टी. सोमशेखर का नाम भी सामने आया है।
कांग्रेस के कौन-से पाँच उम्मीदवार जीते?
कांग्रेस की ओर से बी.के. हरिप्रसाद, टिप्पन्नप्पा कामकनूर, पी.वी. मोहन, बी.एस. शिवन्ना और विनय कार्तिक विजयी हुए। विनय कार्तिक को सर्वाधिक 32 वोट मिले और वे मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के करीबी सहयोगी माने जाते हैं।
जेडी(एस) और एच.डी. कुमारस्वामी के लिए यह हार क्यों अहम है?
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया था और डी.के. शिवकुमार को सीधी चुनौती दी थी। जेडी(एस) उम्मीदवार गोविंदराजू को केवल 14 वोट मिले, जबकि पार्टी के पास 18 विधायक थे — यह गठबंधन की आंतरिक कमज़ोरी को उजागर करता है।
भाजपा इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग पर क्या कार्रवाई करेगी?
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने स्वीकार किया कि पार्टी के तीन वोट कांग्रेस के पक्ष में गए। उन्होंने कहा कि बागी विधायकों की पहचान कर पार्टी उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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