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कर्नाटक एमएलसी चुनाव 2025: 7वीं सीट पर कांग्रेस बनाम भाजपा-जेडीएस, 18 जून को मतगणना

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कर्नाटक एमएलसी चुनाव 2025: 7वीं सीट पर कांग्रेस बनाम भाजपा-जेडीएस, 18 जून को मतगणना

सारांश

कर्नाटक में 7 विधान परिषद सीटों पर मतदान हो चुका है, लेकिन असली दांव 7वीं सीट पर है — जहाँ कांग्रेस का संख्याबल और भाजपा-जेडीएस गठबंधन की रणनीति आमने-सामने है। क्रॉस-वोटिंग की आशंका ने 'होटल राजनीति' को फिर ज़िंदा कर दिया।

मुख्य बातें

कर्नाटक विधान परिषद की 7 सीटों पर 18 जून 2025 को बेंगलुरु में मतदान हुआ; मतगणना शाम 5 बजे से।
कुल 8 उम्मीदवार : कांग्रेस के 5 , भाजपा के 2 , जेडी(एस) का 1 ।
जीत के लिए न्यूनतम 28 प्रथम-प्राथमिकता वोट आवश्यक।
कांग्रेस ( 134 विधायक ) की 4 सीटें, भाजपा ( 62 विधायक ) की 2 सीटें सुरक्षित; 7वीं सीट पर कड़ी टक्कर।
कांग्रेस ने विधायकों को बिदादी वंडरला रिसॉर्ट में एकत्र कर क्रॉस-वोटिंग रोकने की कोशिश की।

कर्नाटक विधान परिषद की 7 सीटों के लिए 18 जून 2025 को बेंगलुरु स्थित विधानसभा भवन में मतदान हुआ, जहाँ सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधायकों ने अपने मत डाले। शाम 5 बजे से मतगणना शुरू हुई। इस चुनाव में कुल 8 उम्मीदवार मैदान में हैं और 7वीं सीट सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP)-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन के बीच निर्णायक जंग का केंद्र बन गई है।

उम्मीदवार और संख्याबल

कांग्रेस ने 5 उम्मीदवार, भाजपा ने 2 और जेडी(एस) ने 1 उम्मीदवार उतारा है। वर्तमान विधानसभा में कांग्रेस के पास 134 विधायक, भाजपा के पास 62 और जेडी(एस) के पास 18 विधायक हैं; शेष सीटें अन्य व निर्दलीय विधायकों के पास हैं। किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए पहली प्राथमिकता के कम से कम 28 वोट चाहिए।

संख्याबल के आधार पर कांग्रेस की 4 सीटें और भाजपा की 2 सीटें अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जा रही हैं। 7वीं सीट पर फैसला प्राथमिकता वोटों के वितरण और क्रॉस-वोटिंग की स्थिति पर निर्भर करेगा।

क्रॉस-वोटिंग की आशंका और विधायकों की 'होटल राजनीति'

क्रॉस-वोटिंग की संभावना ने दोनों खेमों की चिंता बढ़ा दी। कांग्रेस ने अपने विधायकों को बिदादी स्थित वंडरला रिसॉर्ट में एकत्र कर रणनीतिक बैठकें आयोजित कीं। भाजपा और जेडी(एस) ने भी अपने-अपने विधायकों को सुरक्षित स्थानों पर रखकर अनुशासन सुनिश्चित करने की कोशिश की। गौरतलब है कि कर्नाटक में 'विधायक प्रबंधन' की यह परंपरा पहले भी कई महत्वपूर्ण चुनावों में देखी जा चुकी है।

7वीं सीट क्यों है निर्णायक

यह चुनाव केवल परिषद की संरचना तय नहीं करेगा — यह राज्य में भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन की प्रभावशीलता की भी परीक्षा है। यदि गठबंधन 7वीं सीट जीतने में सफल रहता है, तो यह कांग्रेस की विधायक एकजुटता पर सवाल उठाएगा। दूसरी ओर, कांग्रेस की जीत उसके संगठनात्मक अनुशासन को मज़बूती देगी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में अगले निकाय चुनावों की तैयारियाँ भी शुरू हो रही हैं।

आगे क्या होगा

मतगणना के नतीजे 18 जून की शाम तक स्पष्ट होने की उम्मीद है। 7वीं सीट का परिणाम राज्य की भावी गठबंधन रणनीतियों और विपक्ष की एकजुटता पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह नतीजा कर्नाटक में अगले चुनावी समीकरणों की दिशा तय करने में सहायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

भीतर से अधिक है: 134 विधायकों में से किसी एक की भी 'असहमति' उसकी बढ़त को नुकसान पहुँचा सकती है। 'वंडरला रिसॉर्ट रणनीति' यह भी उजागर करती है कि सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस अपने विधायकों पर पूरा भरोसा नहीं कर पा रही — जो दीर्घकालिक संगठनात्मक कमज़ोरी का संकेत है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक एमएलसी चुनाव 2025 में कितनी सीटें और उम्मीदवार हैं?
इस चुनाव में विधानसभा कोटे की 7 विधान परिषद सीटों के लिए कुल 8 उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस ने 5, भाजपा ने 2 और जेडी(एस) ने 1 उम्मीदवार उतारा है।
जीत के लिए कितने वोट चाहिए?
किसी भी उम्मीदवार को जीत सुनिश्चित करने के लिए पहली प्राथमिकता के कम से कम 28 वोट प्राप्त करने होंगे। यह कोटा मौजूदा विधानसभा सदस्य संख्या के आधार पर तय किया गया है।
7वीं सीट पर इतना विवाद क्यों है?
संख्याबल के अनुसार कांग्रेस की 4 और भाजपा की 2 सीटें सुरक्षित मानी जा रही हैं, लेकिन 7वीं सीट के लिए किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। यह सीट क्रॉस-वोटिंग और प्राथमिकता वोटों की रणनीति पर निर्भर करेगी।
क्रॉस-वोटिंग रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए?
कांग्रेस ने अपने विधायकों को बिदादी स्थित वंडरला रिसॉर्ट में एकत्र कर रणनीतिक बैठकें कीं। भाजपा और जेडी(एस) ने भी अपने विधायकों को सुरक्षित स्थानों पर रखकर अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की।
इस चुनाव के नतीजे कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर डालेंगे?
7वीं सीट का परिणाम राज्य में भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन की प्रभावशीलता और कांग्रेस के संगठनात्मक अनुशासन की परख करेगा। यह भविष्य की गठबंधन रणनीतियों और अगले चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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