जनजातीय मंत्रालय ने 10 एजेंसियों से किया MoU, केएसयूएम के ज़रिए 1,000 ST स्टार्टअप्स को मिलेगा बूस्ट
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने अनुसूचित जनजाति (ST) उद्यमियों के नेतृत्व वाले स्टार्टअप और उद्यमों की पहचान, संवर्धन, मार्गदर्शन और वित्तपोषण के लिए एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पहल शुरू की है। इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु चुने गए 10 संस्थानों में केरल स्टार्टअप मिशन (KSUM) को भी शामिल किया गया है। मंत्रालय ने इन सभी एजेंसियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
पहल का उद्देश्य और लक्ष्य
केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य जनजातीय युवाओं की क्षमता का उपयोग करते हुए उन्हें रोज़गार सृजनकर्ता और रोज़गार प्राप्तकर्ता — दोनों के रूप में तैयार करना है। इसके लिए ST नवप्रवर्तकों और उद्यमियों को पहुँच और मार्गदर्शन का विस्तार दिया जाएगा।
जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने कहा कि यह पहल शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल अवसंरचना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहित विभिन्न क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों के समग्र विकास को गति देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
केएसयूएम की भूमिका और केरल में लाभ
KSUM केरल सरकार की उद्यमिता विकास और इनक्यूबेशन के लिए नोडल एजेंसी है। इसके साथ हुए MoU के तहत केरल में ST-नेतृत्व वाले उद्यमों को संरचित क्षमता निर्माण, मार्गदर्शन, बाज़ार संपर्क और निवेश के लिए तैयारी में सहायता दी जाएगी।
केएसयूएम के सीईओ अनूप अंबिका ने कहा कि केरल का स्टार्टअप इकोसिस्टम ST समुदायों के बीच नवाचार-आधारित उद्यमिता की पहचान और उसे बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह अनुकूल है। केरल के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी विभाग के विशेष सचिव सीरम सांबासिवा राव ने भी कहा कि यह MoU आदिवासी युवाओं की प्रौद्योगिकी-उन्मुख परियोजनाओं को नई ऊँचाई देगा।
वेंचर कैपिटल फंड — VCF-ST की शर्तें
इस पहल के अंतर्गत देशभर में लगभग 1,000 ST उद्यमियों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से कम से कम 100 को अनुसूचित जनजातियों के लिए वेंचर कैपिटल फंड (VCF-ST) के तहत वित्तपोषण और इनक्यूबेशन प्रदान किया जाएगा।
VCF-ST योजना के तहत, जिन कंपनियों में ST उद्यमियों की कम से कम 51% हिस्सेदारी और प्रबंधन नियंत्रण हो, वे ₹50 लाख तक की वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं — बशर्ते यह स्वामित्व शर्त 6 महीने तक बरकरार रहे। ₹50 लाख से अधिक की फंडिंग के लिए यह शर्त 12 महीने तक बनाए रखनी होगी। इसके अतिरिक्त, संतोषजनक प्रगति के अधीन 3 वर्षों के लिए प्रति वर्ष ₹10 लाख तक की इनक्यूबेशन फंडिंग भी दी जाएगी। आवेदन वर्तमान में खुले हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
जनजातीय मामलों की सचिव रंजना चोपड़ा ने कहा कि नवाचार आदिवासी समुदायों के लिए कोई नई अवधारणा नहीं है — पारंपरिक आदिवासी प्रणालियों में व्यापक ज्ञान और नवाचार निहित है, जो अब तक मुख्यधारा तक नहीं पहुँच सका। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि इस नवाचार को मुख्यधारा में लाने के लिए एक सुनियोजित रणनीति अनिवार्य है।
यह ऐसे समय में आया है जब देश की कुल स्टार्टअप संख्या और ST-नेतृत्व वाले स्टार्टअप के बीच की खाई को पाटना सरकार की प्राथमिकता बन चुकी है। गौरतलब है कि यह पहल मंत्रालय के उन समग्र प्रयासों की कड़ी है, जो जनजातीय समुदायों को डिजिटल और आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने पर केंद्रित हैं।
आने वाले महीनों में KSUM और अन्य चयनित एजेंसियों के ज़रिए इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन की गति से यह तय होगा कि यह पहल ज़मीनी स्तर पर कितना बदलाव ला पाती है।