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SVEP से 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को सहारा, 86% उद्यमी SC/ST/OBC और अल्पसंख्यक वर्ग से

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SVEP से 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को सहारा, 86% उद्यमी SC/ST/OBC और अल्पसंख्यक वर्ग से

सारांश

SVEP ने जून 2026 तक 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को सहारा दिया है — और इनमें 86% उद्यमी SC, ST, OBC व अल्पसंख्यक वर्ग से हैं। 2016 से अब तक केंद्र की वित्तीय हिस्सेदारी 738% बढ़कर ₹942.09 करोड़ पहुँची है, जो ग्रामीण समावेशी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

SVEP के तहत जून 2026 तक 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को सरकारी सहायता मिली।
लाभार्थियों में 86% उद्यमी SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों से हैं।
केंद्र ने फरवरी 2026 तक कुल ₹942.09 करोड़ जारी किए — 2018 के मुकाबले 738% अधिक।
शीर्ष लाभान्वित राज्य: असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ।
प्रत्येक ब्लॉक के लिए ₹6.50 करोड़ का प्रावधान; प्रति उद्यम औसत निवेश ₹27,083 ।
CRP-EP कैडर में न्यूनतम 60% महिलाएँ; 90% SHG परिवारों से चुनी जाती हैं।

केंद्र सरकार ने 25 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) के तहत जून 2026 के अंत तक देशभर में 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को सरकारी सहायता मिल चुकी है। इस योजना के लाभार्थियों में से करीब 86 प्रतिशत उद्यमी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक समुदायों से हैं, जो इसे समावेशी ग्रामीण विकास का एक उल्लेखनीय उदाहरण बनाता है।

योजना की संरचना और क्रियान्वयन

SVEP को स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन (SRLM) के माध्यम से लागू किया जाता है। इसके तहत गैर-कृषि आधारित ग्रामीण उद्यमों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, मेंटरिंग और समुदाय-आधारित संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। प्रत्येक ब्लॉक के लिए ₹6.50 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जबकि प्रति उद्यम औसत निवेश ₹27,083 रखा गया है।

योजना का दायरा बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूह (SHG), कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP), बैंक लिंकेज और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी योजनाओं के साथ समन्वय स्थापित किया गया है।

वित्तीय प्रतिबद्धता में बड़ा उछाल

केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 तक SVEP के लिए कुल ₹942.09 करोड़ की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की है। आँकड़ों के अनुसार, यह राशि 2016 में योजना की शुरुआत से लेकर जनवरी 2018 तक जारी किए गए ₹112.39 करोड़ की तुलना में लगभग 738 प्रतिशत अधिक है — जो केंद्र की बढ़ती वित्तीय प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य

असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहाँ SVEP के तहत सबसे अधिक ग्रामीण उद्यमों को सहायता मिली है। यह उल्लेखनीय है कि ये सभी राज्य ग्रामीण गरीबी और बेरोज़गारी की दृष्टि से देश के सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्रों में आते हैं।

CRP-EP की भूमिका और महिला सहभागिता

योजना के तहत CRP-EP का चयन SRLM और प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटिंग एजेंसियों द्वारा परीक्षण, प्रशिक्षण और प्रमाणन के बाद किया जाता है। स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता दी जाती है, विशेषकर उन्हें जिनके पास व्यवसाय और गणित का बुनियादी ज्ञान हो। सरकार के अनुसार, कम से कम 90 प्रतिशत CRP-EP स्वयं सहायता समूहों से जुड़े परिवारों से चुने जाते हैं और इस कैडर में महिलाओं की हिस्सेदारी न्यूनतम 60 प्रतिशत निर्धारित की गई है। प्रत्येक CRP-EP लगभग 50 उद्यमों को मेंटरिंग, प्रशिक्षण और ऋण सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग करता है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

सरकार का कहना है कि इस योजना ने महिलाओं, SC-ST समुदायों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों की स्थानीय आकांक्षाओं को टिकाऊ व्यवसायों में बदलने में मदद की है, जिससे आय, बचत और परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आया है। गौरतलब है कि यह योजना गरीबी उन्मूलन, स्थानीय रोज़गार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्यों से सीधे जुड़ी है। आने वाले वर्षों में योजना के और विस्तार की संभावना है, जो ग्रामीण भारत में उद्यमिता की नई लहर को गति दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 4.32 लाख उद्यमों में से कितने तीन साल बाद भी चालू हैं — सरकार ने अभी तक उद्यम-अस्तित्व दर (survival rate) का कोई स्वतंत्र आकलन सार्वजनिक नहीं किया है। प्रति उद्यम ₹27,083 का औसत निवेश अत्यंत सीमित है, और यह सवाल उठता है कि क्या यह राशि टिकाऊ व्यवसाय निर्माण के लिए पर्याप्त है। 738% की वित्तीय वृद्धि उत्साहजनक है, किंतु बिना आय-वृद्धि और रोज़गार के सत्यापन योग्य डेटा के, यह योजना संख्याओं की सफलता बनकर न रह जाए — ज़मीनी बदलाव की नहीं।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) क्या है?
SVEP केंद्र सरकार की एक योजना है जो स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन (SRLM) के माध्यम से गैर-कृषि आधारित ग्रामीण उद्यमों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, मेंटरिंग और संस्थागत सहयोग देती है। यह 2016 में शुरू हुई थी और जून 2026 तक 4.32 लाख उद्यमों को सहायता दे चुकी है।
SVEP से किन वर्गों को सबसे अधिक फायदा हुआ है?
SVEP के लाभार्थियों में लगभग 86% उद्यमी SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों से हैं। इसके अलावा, CRP-EP कैडर में न्यूनतम 60% महिलाएँ शामिल हैं, जो योजना की समावेशी प्रकृति को दर्शाता है।
SVEP के लिए सरकार ने कितनी धनराशि जारी की है?
केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 तक SVEP के लिए कुल ₹942.09 करोड़ की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की है। यह 2016-2018 के बीच जारी ₹112.39 करोड़ की तुलना में लगभग 738% अधिक है।
किन राज्यों में SVEP का सबसे अधिक लाभ मिला है?
असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश वे राज्य हैं जहाँ SVEP के तहत सबसे अधिक ग्रामीण उद्यमों को सहायता मिली है। ये सभी राज्य ग्रामीण गरीबी और बेरोज़गारी के लिहाज़ से संवेदनशील माने जाते हैं।
CRP-EP क्या होते हैं और इनका चयन कैसे होता है?
CRP-EP यानी कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन, वे स्थानीय प्रशिक्षित व्यक्ति होते हैं जो लगभग 50 उद्यमों को मेंटरिंग, प्रशिक्षण और ऋण सुविधा उपलब्ध कराते हैं। इनका चयन SRLM और कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा परीक्षण व प्रमाणन के बाद किया जाता है; कम से कम 90% SHG परिवारों से और न्यूनतम 60% महिलाएँ होती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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