क्या 'स्टार्टअप इंडिया' ने 10 साल में एंटरप्रेन्योरशिप की तस्वीर को बदल दिया?
सारांश
Key Takeaways
- ‘स्टार्टअप इंडिया’ ने 10 वर्षों में स्टार्टअप्स की संख्या को 400 से बढ़ाकर 2.09 लाख किया।
- कुल मिलाकर, 21 लाख लोग रोजगार प्राप्त कर चुके हैं।
- यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स की संख्या 4 से बढ़कर 120 हो गई है।
- सरकार ने 4,000 से अधिक नियमों को हटाया है।
- बड़े क्षेत्रों में नवाचार और विकास हो रहा है।
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2016 में प्रारंभ हुई ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल ने देश में एंटरप्रेन्योरशिप, इनॉवेशन और टेक्नोलॉजी आधारित व्यवसायों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा था, और इसे शुक्रवार को 10 वर्षों का सफर पूरा हुआ। पिछले एक दशक में ‘स्टार्टअप इंडिया’ ने न केवल नए व्यवसायों को जन्म दिया, बल्कि भारत को दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल किया है। सरकारी नीतियों, सरल नियमों और वित्तीय सहायता ने इस प्रणाली को मजबूती प्रदान की है।
‘स्टार्टअप इंडिया’ के आरंभ के समय देश में लगभग 400 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप थे, जो अब बढ़कर 2.09 लाख से अधिक हो चुके हैं। इन स्टार्टअप्स ने लगभग 21 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया है। औसतन हर स्टार्टअप करीब 11 नई नौकरियां उत्पन्न कर रहा है। विशेष रूप से, 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 यानी छोटे और मध्यम शहरों से उभरे हैं, जिससे इन क्षेत्रों में उद्यमिता को मजबूती मिली है।
पिछले दस वर्षों में, सरकार ने स्टार्टअप्स को सशक्त बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण वित्तीय योजनाएं लागू की हैं। साथ ही, ‘स्टार्टअप इंडिया’ के अंतर्गत नियमों को सरल बनाने पर भी जोर दिया गया है। अब तक 4,000 से अधिक नियमों को समाप्त किया गया है और हजारों कानूनी प्रावधानों में संशोधन किया गया है।
इन 10 वर्षों में भारत में यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स (जिनका मूल्यांकन 1 अरब डॉलर से अधिक है) की संख्या 4 से बढ़कर 120 से अधिक हो गई है। इन कंपनियों का कुल मूल्यांकन 350 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। इस दौरान रक्षा तकनीक, अंतरिक्ष तकनीक, जैव-प्रौद्योगिकी, कृषि तकनीक और जनरेटिव एआई जैसे नए क्षेत्रों में तेजी से वृद्धि हुई है। आज देश में 1,000 से अधिक रक्षा स्टार्टअप्स, 380 से ज्यादा अंतरिक्ष स्टार्टअप्स और लगभग 900 एआई आधारित स्टार्टअप्स सक्रिय रूप से देश के विकास में योगदान दे रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2025 में 11 नए स्टार्टअप्स ने यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त किया। इनमें एआई डॉट टेक, नवी टेक्नोलॉजीज, रैपिडो, नेट्राडाइन, जंबोटेल, डार्विनबॉक्स, विवृति कैपिटल, वेरिटास फाइनेंस, मनीव्यू, जसपे और ड्रूल्स शामिल हैं। इनमें से अधिकांश स्टार्टअप वित्तीय तकनीक, सॉफ्टवेयर सेवा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवाओं से संबंधित हैं।
नई यूनिकॉर्न सूची में एआई डॉट टेक सबसे अधिक चर्चा में रहा, जिसने केवल तीन वर्षों में 1.5 अरब डॉलर का मूल्यांकन प्राप्त कर यूनिकॉर्न क्लब में प्रवेश किया। यह इस बात का संकेत है कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित व्यवसाय भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।
वहीं पहले से स्थापित यूनिकॉर्न कंपनियों ने भी अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी। आंकड़ों के अनुसार जेरोधा करीब 8.2 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ शीर्ष पर रहा। रेजरपे और लेंसकार्ट करीब 7.5 अरब डॉलर के आसपास रहे, जबकि ग्रो करीब 7 अरब डॉलर के मूल्यांकन तक पहुंच गया।
इसके अतिरिक्त जेप्टो, ऑफबिजनेस, इनमोबी, आइसर्टिस, ओयो (प्रिज्म) और मीशो जैसी कंपनियां भी भारत की शीर्ष यूनिकॉर्न सूची में बनी हुई हैं। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से यह दिखाते हैं कि भारतीय निवेशकों का विश्वास अभी भी वित्तीय तकनीक, ई-कॉमर्स, सॉफ्टवेयर सेवा और शिक्षा तकनीक जैसे क्षेत्रों पर कायम है।
कुल मिलाकर, ‘स्टार्टअप इंडिया’ के 10 साल भारतीय उद्यमिता की यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हुए हैं, जिसने इनॉवेशन, रोजगार और निवेश के नए अवसर खोले हैं।