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ग्रामीण विकास को ₹95,692 करोड़ की बड़ी राशि जारी, 2.8 लाख ग्राम पंचायतों को मिलेगा लाभ

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ग्रामीण विकास को ₹95,692 करोड़ की बड़ी राशि जारी, 2.8 लाख ग्राम पंचायतों को मिलेगा लाभ

सारांश

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ₹95,692 करोड़ की अंतरिम राशि जारी की है — मनरेगा के ₹30,000 करोड़ मिलाकर कुल आवंटन ₹1.25 लाख करोड़ पार। 2.8 लाख ग्राम पंचायतों को सीधा लाभ और 1 जुलाई से नई श्रमिक-केंद्रित व्यवस्था लागू होगी।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ₹95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि जारी की।
मनरेगा के ₹30,000 करोड़ मिलाकर कुल ग्रामीण विकास आवंटन ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक।
लगभग 2.8 लाख ग्राम पंचायतों को सीधे विकास निधि मिलेगी।
सर्वाधिक आवंटन उत्तर प्रदेश को — ₹12,221.48 करोड़ ; इसके बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश।
1 जुलाई 2026 से नई श्रमिक-केंद्रित व्यवस्था लागू; 26 राज्यों ने बजटीय प्रावधान पूरे किए।
झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिज़ोरम को प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की सलाह।

केंद्र सरकार ने 9 जून 2026 को ग्रामीण भारत के विकास, रोज़गार सृजन और श्रमिक कल्याण को नई गति देते हुए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए ₹95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि जारी की। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए हुई बैठक में की। मनरेगा के तहत पहले से आवंटित ₹30,000 करोड़ को मिलाकर कुल आवंटन ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक हो गया है।

योजना का दायरा और लाभार्थी

चौहान ने बताया कि यह राशि देश की लगभग 2.8 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुँचेगी, जिससे प्रत्येक पंचायत को विकास कार्यों के लिए लाखों रुपए की सीधी सहायता मिलेगी। यह आवंटन 'विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)' के क्रियान्वयन के तहत किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ग्रामीण रोज़गार, श्रमिक कल्याण और गाँवों के समग्र विकास के लिए व्यापक वित्तीय और नीतिगत पहल कर रही है।

1 जुलाई से लागू होगी नई व्यवस्था

1 जुलाई 2026 से एक नई श्रमिक-केंद्रित और बाधारहित व्यवस्था लागू होने जा रही है। मंत्री ने राज्यों से आग्रह किया कि वे विकास कार्यों को पहले से मंज़ूरी दें ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन तेज़ गति से शुरू हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार केवल धनराशि उपलब्ध नहीं करा रही, बल्कि समय पर मज़दूरी भुगतान, श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और विकास कार्यों की निरंतरता भी सुनिश्चित करना चाहती है।

राज्यवार आवंटन का विवरण

अंतरिम आवंटन में सबसे अधिक राशि उत्तर प्रदेश को ₹12,221.48 करोड़ दी गई है। इसके बाद पश्चिम बंगाल को ₹8,508 करोड़, तमिलनाडु को ₹7,957.57 करोड़, आंध्र प्रदेश को ₹7,707.21 करोड़ और राजस्थान को ₹7,581.87 करोड़ आवंटित किए गए हैं। बिहार को ₹6,715.83 करोड़, मध्य प्रदेश को ₹6,252.03 करोड़, कर्नाटक को ₹5,709.09 करोड़ और महाराष्ट्र को ₹4,420.32 करोड़ का आवंटन मिला है।

केंद्रशासित प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर को ₹1,151.02 करोड़, लद्दाख को ₹85.98 करोड़ और पुडुचेरी को ₹40.56 करोड़ दिए गए हैं। केंद्रीय प्रशासन और सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) के लिए ₹1,850.62 करोड़ अलग से निर्धारित किए गए हैं।

डिजिटल तैयारी और पिछड़े राज्यों पर नज़र

चौहान ने बताया कि 26 राज्यों ने 'विकसित भारत-ग्रामीण भारत' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बजटीय प्रावधान कर लिए हैं। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, ई-केवाईसी, फेस ऑथेंटिकेशन और एसएमएस आधारित सूचना प्रणाली में कई राज्यों ने उल्लेखनीय प्रगति की है। हालाँकि झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिज़ोरम को यह प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की सलाह दी गई है — मंत्री ने कहा कि वे स्वयं इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखेंगे।

आगे की राह

ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के सुझावों के आधार पर विकास कार्यों का चयन किया जाएगा। चौहान ने निर्देश दिया कि 1 जुलाई तक मनरेगा के तहत रोज़गार सृजन और मज़दूरी भुगतान में किसी भी प्रकार की कमी या बाधा नहीं आनी चाहिए। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि धनराशि ग्राम पंचायत स्तर तक कितनी तेज़ी और पारदर्शिता से पहुँचती है। मनरेगा में मज़दूरी भुगतान में देरी और फर्ज़ी जॉब कार्ड की समस्याएँ वर्षों से रिपोर्ट होती रही हैं — नई डिजिटल व्यवस्था इन्हें हल कर सकती है, बशर्ते झारखंड और तेलंगाना जैसे बड़े राज्य समय पर तैयार हों। 1 जुलाई की समयसीमा महत्वाकांक्षी है; यदि चार राज्य अभी भी पिछड़े हैं, तो करोड़ों श्रमिकों को संक्रमण काल में व्यवधान का सामना करना पड़ सकता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार ने राज्यों को ₹95,692 करोड़ क्यों जारी किए?
यह राशि 'विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)' के तहत ग्रामीण विकास, रोज़गार सृजन और श्रमिक कल्याण के लिए अंतरिम आवंटन के रूप में जारी की गई है। मनरेगा के पहले से आवंटित ₹30,000 करोड़ को मिलाकर कुल आवंटन ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक हो गया है।
1 जुलाई 2026 से कौन-सी नई व्यवस्था लागू होगी?
1 जुलाई से एक नई श्रमिक-केंद्रित और बाधारहित व्यवस्था लागू होगी जिसमें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, ई-केवाईसी, फेस ऑथेंटिकेशन और एसएमएस आधारित सूचना प्रणाली शामिल हैं। इसका उद्देश्य समय पर मज़दूरी भुगतान और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
किस राज्य को सबसे अधिक ग्रामीण विकास निधि मिली है?
उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक ₹12,221.48 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल (₹8,508 करोड़), तमिलनाडु (₹7,957.57 करोड़), आंध्र प्रदेश (₹7,707.21 करोड़) और राजस्थान (₹7,581.87 करोड़) का स्थान है।
ग्राम पंचायतों को इस राशि से क्या फायदा होगा?
यह राशि देश की लगभग 2.8 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुँचेगी, जिससे प्रत्येक पंचायत को विकास कार्यों के लिए लाखों रुपए की सहायता मिलेगी। विकास कार्यों का चयन ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के सुझावों के आधार पर किया जाएगा।
कौन-से राज्य अभी भी तैयारी में पीछे हैं?
झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिज़ोरम को बजटीय और प्रशासनिक प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की सलाह दी गई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वे स्वयं इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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