ग्रामीण विकास को ₹95,692 करोड़ की बड़ी राशि जारी, 2.8 लाख ग्राम पंचायतों को मिलेगा लाभ
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 9 जून 2026 को ग्रामीण भारत के विकास, रोज़गार सृजन और श्रमिक कल्याण को नई गति देते हुए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए ₹95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि जारी की। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए हुई बैठक में की। मनरेगा के तहत पहले से आवंटित ₹30,000 करोड़ को मिलाकर कुल आवंटन ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक हो गया है।
योजना का दायरा और लाभार्थी
चौहान ने बताया कि यह राशि देश की लगभग 2.8 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुँचेगी, जिससे प्रत्येक पंचायत को विकास कार्यों के लिए लाखों रुपए की सीधी सहायता मिलेगी। यह आवंटन 'विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)' के क्रियान्वयन के तहत किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ग्रामीण रोज़गार, श्रमिक कल्याण और गाँवों के समग्र विकास के लिए व्यापक वित्तीय और नीतिगत पहल कर रही है।
1 जुलाई से लागू होगी नई व्यवस्था
1 जुलाई 2026 से एक नई श्रमिक-केंद्रित और बाधारहित व्यवस्था लागू होने जा रही है। मंत्री ने राज्यों से आग्रह किया कि वे विकास कार्यों को पहले से मंज़ूरी दें ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन तेज़ गति से शुरू हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार केवल धनराशि उपलब्ध नहीं करा रही, बल्कि समय पर मज़दूरी भुगतान, श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और विकास कार्यों की निरंतरता भी सुनिश्चित करना चाहती है।
राज्यवार आवंटन का विवरण
अंतरिम आवंटन में सबसे अधिक राशि उत्तर प्रदेश को ₹12,221.48 करोड़ दी गई है। इसके बाद पश्चिम बंगाल को ₹8,508 करोड़, तमिलनाडु को ₹7,957.57 करोड़, आंध्र प्रदेश को ₹7,707.21 करोड़ और राजस्थान को ₹7,581.87 करोड़ आवंटित किए गए हैं। बिहार को ₹6,715.83 करोड़, मध्य प्रदेश को ₹6,252.03 करोड़, कर्नाटक को ₹5,709.09 करोड़ और महाराष्ट्र को ₹4,420.32 करोड़ का आवंटन मिला है।
केंद्रशासित प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर को ₹1,151.02 करोड़, लद्दाख को ₹85.98 करोड़ और पुडुचेरी को ₹40.56 करोड़ दिए गए हैं। केंद्रीय प्रशासन और सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) के लिए ₹1,850.62 करोड़ अलग से निर्धारित किए गए हैं।
डिजिटल तैयारी और पिछड़े राज्यों पर नज़र
चौहान ने बताया कि 26 राज्यों ने 'विकसित भारत-ग्रामीण भारत' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बजटीय प्रावधान कर लिए हैं। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, ई-केवाईसी, फेस ऑथेंटिकेशन और एसएमएस आधारित सूचना प्रणाली में कई राज्यों ने उल्लेखनीय प्रगति की है। हालाँकि झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिज़ोरम को यह प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की सलाह दी गई है — मंत्री ने कहा कि वे स्वयं इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखेंगे।
आगे की राह
ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के सुझावों के आधार पर विकास कार्यों का चयन किया जाएगा। चौहान ने निर्देश दिया कि 1 जुलाई तक मनरेगा के तहत रोज़गार सृजन और मज़दूरी भुगतान में किसी भी प्रकार की कमी या बाधा नहीं आनी चाहिए। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।