शिवराज सिंह चौहान का ऐलान: हर पात्र को मिलेगा आवास, 29 राज्यों के मंत्रियों संग 'ग्रामोदय से राष्ट्रोदय' सम्मेलन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 29 जून 2026 को नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 'ग्रामोदय से राष्ट्रोदय' के दूसरे दिन स्पष्ट घोषणा की कि देश में कोई भी पात्र लाभार्थी आवास से वंचित नहीं रहेगा। इस सम्मेलन में 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और नीति-निर्माता एक मंच पर जुटे — जो अपने आप में पहली बार हुआ।
सम्मेलन का मुख्य घटनाक्रम
सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित राज्यों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चौहान ने कहा, 'गांव केवल धूल-मिट्टी या चौपाल का नाम नहीं, बल्कि भारत की शक्ति, चेतना और आत्मा हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि गांव की प्रगति के बिना देश की प्रगति संभव नहीं।
यह सम्मेलन सहकारी संघवाद का जीवंत उदाहरण बना, जहाँ राजनीतिक भिन्नताओं से ऊपर उठकर ग्रामीण विकास पर केंद्रित चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित ग्राम-विकसित भारत' विजन को जमीन पर उतारने के लिए ठोस रणनीतियाँ भी तय की गईं।
'विकसित भारत- जी राम जी' योजना: मनरेगा की जगह नई पहल
सम्मेलन की सबसे बड़ी घोषणा यह रही कि 1 जुलाई से 'विकसित भारत- जी राम जी' योजना देशभर में लागू होगी, जो मनरेगा का स्थान लेगी। इसके लिए ₹95,682 करोड़ की अंतरिम स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है। चौहान ने राज्यों से आग्रह किया कि वे समय पर औपचारिकताएँ पूरी करें ताकि योजना का क्रियान्वयन सुचारू रहे।
गौरतलब है कि मनरेगा दशकों से ग्रामीण रोज़गार की रीढ़ रही है और इसे प्रतिस्थापित करने वाली योजना का दायरा और असर दोनों बड़े होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब संभावित कम वर्षा को लेकर 14 राज्यों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
लखपति दीदी और महिला सशक्तिकरण
सम्मेलन में 'लखपति दीदी डैशबोर्ड' लॉन्च किया गया और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए एक नए डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ हुआ। चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने लखपति दीदी का लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ महिलाओं तक करने की घोषणा की है। इसके लिए अगले 5 वर्षों में ₹10 लाख करोड़ का बैंक लिंकिंग रोडमैप तैयार किया गया है।
प्रमुख दिशा-निर्देश और राज्यों से अपेक्षाएँ
चौहान ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे। राज्यों को समय पर अपना वित्तीय हिस्सा जारी करना होगा और ग्रामीण विकास से जुड़े रिक्त पद शीघ्र भरने होंगे। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पदों पर अधिकारियों को कम से कम दो से तीन वर्ष एक ही स्थान पर रखा जाए ताकि बार-बार तबादलों से काम प्रभावित न हो।
इसके अलावा सोशल ऑडिट और एआई आधारित मॉनिटरिंग को मजबूत करने, योजनाओं के प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता पर विशेष ध्यान देने की बात भी कही गई। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की प्रगति की समीक्षा में कुछ राज्यों को सुधार की ज़रूरत बताई गई, जबकि झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के सफल मॉडलों को सराहा गया।
आगे की राह
चौहान ने कहा कि यह समय प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि सहभागिता का है — केंद्र नीति बनाए, राज्य उसे लागू करें, पंचायत नेतृत्व करे और जनता सहभागी बने। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि राज्यों को किसी नियम या प्रक्रिया में व्यावहारिक दिक्कत है तो ग्रामीण विकास मंत्रालय कैबिनेट और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर उचित संशोधन की दिशा में काम करेगा। भूमिहीन लाभार्थियों को ज़मीन उपलब्ध कराने और लंबित आवासों के शीघ्र समाधान पर विशेष जोर दिया गया। सम्मेलन में 'वीबी-जीरामजी' से जुड़े लोगो, क्विज और डिजिटल कंटेंट प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।