अभिमन्यु मर्डर केस 2018: सभी 16 आरोपी ट्रायल कोर्ट में पेश, 17 अगस्त से शुरू होगा मुकदमा
सारांश
मुख्य बातें
कोच्चि की एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट में 14 अगस्त 2026 को एक अहम पड़ाव आया, जब 2018 के अभिमन्यु हत्याकांड के सभी 16 आरोपी — जो पहले दो बार अदालत के समन का पालन करने में नाकाम रहे थे — गुरुवार को ट्रायल कोर्ट के सामने पेश हुए। आरोपों को नए सिरे से पढ़कर सुनाए जाने पर सभी ने खुद को बेगुनाह बताया। अब 17 अगस्त 2026 से मुकदमे की सुनवाई विधिवत शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्य घटनाक्रम
अदालत की ओर से सख्त कार्रवाई की चेतावनी के बाद 16 आरोपी गुरुवार को पेश हुए। इन पर कैंपस फ्रंट और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) — जो अब प्रतिबंधित संगठन है — से जुड़े होने का आरोप है। सभी आरोपियों को हत्या, आपराधिक साजिश, दंगा और गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने के आरोप पढ़कर सुनाए गए, जिन्हें उन्होंने सिरे से नकार दिया।
अदालत ने अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की है, जबकि ट्रायल 17 अगस्त 2026 से शुरू होना तय है।
सात साल की देरी और हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब केरल उच्च न्यायालय ने एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट को ट्रायल पूरा करने के लिए चार महीने की अंतिम मोहलत दी है और स्पष्ट कर दिया है कि इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा। इससे पहले 24 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट ने सेशंस कोर्ट को नौ महीने के भीतर कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया था।
गौरतलब है कि एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने सितंबर 2018 में चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन मुकदमे की कार्यवाही सात साल से अधिक समय तक अटकी रही। इस अत्यधिक देरी से आहत होकर अभिमन्यु की माँ ने 2024 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और त्वरित सुनवाई की माँग की, जिसके बाद अदालत ने संज्ञान लेते हुए हस्तक्षेप किया।
दस्तावेज़ गायब होने का विवाद
यह मामला तब और पेचीदा हो गया जब कोर्ट की अभिरक्षा से अहम दस्तावेज कथित तौर पर गायब हो गए। बाद में उन्हें फिर से तैयार किया गया, जिससे कार्यवाही आगे बढ़ सकी। इस घटना ने न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए थे।
अभिमन्यु हत्याकांड: पृष्ठभूमि
यह मामला 21 वर्षीय एसएफआई कार्यकर्ता अभिमन्यु की हत्या से जुड़ा है, जो एर्नाकुलम के महाराजा कॉलेज का छात्र था। 1 जुलाई 2018 को कैंपस में पोस्टर विवाद के बाद हुई झड़प के दौरान उसे चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस हमले में चार अन्य एसएफआई कार्यकर्ता भी घायल हुए थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने कैंपस में पोस्टर लगाने को लेकर हुए विवाद के बाद छात्रों पर हमला किया था। यह केरल के सबसे चर्चित कैंपस हत्याकांडों में से एक माना जाता है।
आगे की राह
अब अभियोजन पक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हाई कोर्ट द्वारा तय अंतिम समय-सीमा के भीतर इस जटिल मामले की सुनवाई पूरी की जाए। सोमवार की सुनवाई के बाद ट्रायल की दिशा और गति तय होगी। न्याय की यह प्रतीक्षा अभिमन्यु के परिजनों के लिए आठ साल से अधिक लंबी हो चुकी है।