सुप्रीम कोर्ट का एर्नाकुलम एसीपी को तलब: शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज न करना पड़ा भारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुप्रीम कोर्ट का एर्नाकुलम एसीपी को तलब: शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज न करना पड़ा भारी

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने केरल पुलिस की निष्क्रियता पर कड़ा रुख अपनाया है। एर्नाकुलम एसीपी को 15 मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया गया है। एससी/एसटी महिला की शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद एफआईआर दर्ज न होना अदालत की नाराजगी की वजह बना।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने एर्नाकुलम एसीपी को 15 मई 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।
8 जनवरी को शिकायत प्राप्त होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर.
महादेवन की पीठ ने केरल सरकार का हलफनामा असंतोषजनक करार दिया।
मामला अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय की एक महिला से छेड़छाड़ के आरोप और मेडिकल साक्ष्य से जुड़ा है।
अदालत ने चेतावनी दी कि कर्तव्य में लापरवाही साबित होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 12 मई 2026 को केरल पुलिस की कथित निष्क्रियता पर कड़ा रुख अपनाते हुए एर्नाकुलम जिले के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) को व्यक्तिगत रूप से 15 मई 2026 को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। शिकायत प्राप्त होने के बावजूद एफआईआर दर्ज न किए जाने पर अदालत ने यह सख्त कदम उठाया है। केरल सरकार का हलफनामा कोर्ट के मुख्य सवाल का जवाब देने में पूरी तरह विफल रहा, जिसे अदालत ने खुलकर असंतोषजनक करार दिया।

मामले का मूल घटनाक्रम

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने 8 मई 2026 को पारित अपने आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता द्वारा डाक के माध्यम से भेजी गई शिकायत 8 जनवरी को एर्नाकुलम एसीपी कार्यालय को प्राप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया। पीठ ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

विशेषकर एससी/एसटी वर्ग की महिलाओं की शिकायतें, मेडिकल साक्ष्य होने के बावजूद पुलिस थाने की दहलीज पर दम तोड़ देती हैं। सर्वोच्च न्यायालय का एसीपी को व्यक्तिगत रूप से तलब करना एक दुर्लभ और कड़ा संकेत है कि संस्थागत जवाबदेही अब वैकल्पिक नहीं रह सकती। असली सवाल यह है कि क्या यह तलबी एकमुश्त अपवाद बनेगी या पुलिस निष्क्रियता के विरुद्ध एक स्थायी न्यायिक नजीर।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने एर्नाकुलम एसीपी को क्यों तलब किया है?
सर्वोच्च न्यायालय ने एर्नाकुलम एसीपी को इसलिए तलब किया है क्योंकि 8 जनवरी को शिकायत प्राप्त होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। केरल सरकार का हलफनामा भी इस मुख्य सवाल का जवाब देने में विफल रहा, जिसे अदालत ने असंतोषजनक माना।
यह मामला किससे जुड़ा है और शिकायत किसने की थी?
यह मामला एर्नाकुलम सिटी के पनंगड पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। एक सह-आरोपी ने अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय की एक महिला से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था और शिकायत के समर्थन में चोटों का उल्लेख करने वाली मेडिकल रिपोर्ट भी पेश की गई थी।
एसीपी को कब और कहाँ पेश होना है?
सर्वोच्च न्यायालय ने एर्नाकुलम के एसीपी को 15 मई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह आदेश जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने 8 मई 2026 को पारित किया।
याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत मिली है या नहीं?
हाँ, सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को पहले दी गई अंतरिम राहत अगली सुनवाई तक जारी रखी है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को जाँच और ट्रायल में पूरा सहयोग करना होगा।
पुलिस की निष्क्रियता पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या चेतावनी दी है?
सर्वोच्च न्यायालय ने चेतावनी दी है कि यदि अधिकारियों की ओर से कर्तव्य में लापरवाही साबित हुई, तो वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस की निष्क्रियता का मामला व्यापक प्रभाव वाला है क्योंकि यह लोगों के पुलिस पर भरोसे से जुड़ा है।
राष्ट्र प्रेस