सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम दुष्कर्म मामले में अधिकारियों की लापरवाही पर जताई नाराजगी

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम दुष्कर्म मामले में अधिकारियों की लापरवाही पर जताई नाराजगी

सारांश

गुरुग्राम में चार वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया गया है। जानिए इस मामले में क्या हुआ है।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी गठित करने का आदेश दिया।
  • अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की।
  • अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।

नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुरुग्राम में चार वर्ष की एक निर्दोष बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म मामले को लेकर पुलिस और न्यायिक मजिस्ट्रेट के व्यवहार पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की और इस मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट की रिपोर्ट अभी तक अदालत को प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी अदालत में उपस्थित थे। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए इन्हें सभी रिकॉर्ड के साथ पेश होने को कहा था। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि जब बच्ची का बयान लिया गया, तब आरोपी उसके बहुत करीब खड़ा था।

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा कैडर की महिला आईपीएस अधिकारी नाजनीन के नेतृत्व में एसआईटी गठित करने का आदेश दिया और राज्य सरकार को इस एसआईटी की अधिसूचना जारी करने के लिए कहा। अदालत ने गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर और मामले की जांच में शामिल अन्य अधिकारियों को जांच प्रक्रिया से अलग करने का आदेश दिया। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकारियों को 'कारण बताओ नोटिस' भी जारी किया।

अदालत ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्यों को भी नोटिस भेजा कि उन्हें पद से हटाने का कारण क्या है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने मैक्स अस्पताल की डॉक्टर बबीता जैन से भी स्पष्टीकरण मांगा कि उन्होंने अपनी मेडिकल रिपोर्ट क्यों बदली।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई अब पोक्सो अदालत की किसी वरिष्ठ महिला न्यायिक अधिकारी के समक्ष कराने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने हरियाणा पुलिस की महिला अधिकारियों का बयान दर्ज करने और पीड़ित बच्ची के माता-पिता का हलफनामा एक सीलबंद लिफाफे में जमा करने का निर्देश भी दिया।

इस मामले की अगली सुनवाई ६ अप्रैल को होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस गंभीर और संवेदनशील मामले में सभी अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करना चाहिए, ताकि पीड़ित बच्ची को न्याय मिल सके और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हो।

Point of View

बल्कि यह हमारे न्यायिक और पुलिस तंत्र में सुधार की आवश्यकता को भी उजागर करता है। सुप्रीम कोर्ट की ताजा पहल से उम्मीद है कि पीड़ित को न्याय मिलेगा और ऐसे मामलों में संवेदनशीलता से निपटा जाएगा।
NationPress
26/03/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया है।
कब होगी इस मामले की अगली सुनवाई?
इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।
क्या अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है?
हाँ, सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है।
इस मामले में एसआईटी का नेतृत्व कौन करेगा?
हरियाणा कैडर की महिला आईपीएस अधिकारी नाजनीन के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई है।
गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर का क्या होगा?
गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर और अन्य अधिकारियों को जांच प्रक्रिया से अलग करने का आदेश दिया गया है।
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