झारखंड हाईकोर्ट ने लापता बच्ची के मामले में सख्ती दिखाई, सीबीआई को सौंपने का संकेत
सारांश
मुख्य बातें
रांची, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले से 2018 में लापता हुई बच्ची के मामले में पुलिस की जांच की धीमी गति पर कड़ा रुख अपनाया है। इस संदर्भ में राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय दिया गया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में अनुसंधान में कोई सार्थक परिणाम नहीं मिलता है, तो मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा जा सकता है।
सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष झारखंड की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्र वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुईं और वर्तमान जांच स्थिति की जानकारी दी। अदालत ने डीजीपी से पूछा कि सात वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बच्ची का कोई पता क्यों नहीं चल सका और पुलिस की जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने गुमला के पुलिस अधीक्षक से भी मामले की प्रगति पर जानकारी मांगी। अदालत ने पाया कि जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, जिस पर असंतोष व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत और संतोषजनक जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर अगली सुनवाई तक जांच में ठोस परिणाम नहीं मिलते हैं, तो मामले की जांच सीबीआई को हस्तांतरित करने का विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस मामले में लापता बच्ची की मां ने हैबियस कॉर्पस याचिका भी दायर की है।
पूर्व की सुनवाई में हाईकोर्ट ने न केवल जांच की प्रगति पर सवाल उठाए थे, बल्कि लापता बच्चों की तलाश में तकनीक के प्रभावी उपयोग और आधार से संबंधित डेटा के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार करने की आवश्यकता भी बताई थी। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था, जिसने विभिन्न स्थानों पर जाकर पड़ताल की, लेकिन अब तक बच्ची का कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका।
हाईकोर्ट ने पहले भी इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।