झारखंड हाईकोर्ट का कड़ा रुख: गुमला की लापता बच्ची मामले में 2018 से अब तक के सभी SP तलब, CBI जांच की चेतावनी

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झारखंड हाईकोर्ट का कड़ा रुख: गुमला की लापता बच्ची मामले में 2018 से अब तक के सभी SP तलब, CBI जांच की चेतावनी

सारांश

सात साल बाद भी गुमला की लापता बच्ची का कोई सुराग नहीं — झारखंड हाईकोर्ट ने 2018 से अब तक के सभी SP और जांचकर्ताओं को तलब किया और CBI जांच की चेतावनी दी। माँ की हेबियस कॉर्पस याचिका पर 9 जून को होगी निर्णायक सुनवाई।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला से 2018 में लापता छह वर्षीय बच्ची मामले में 2018 से अब तक पदस्थापित सभी पुलिस अधीक्षकों और जांचकर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से तलब किया।
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य सरकार को CBI जांच हस्तांतरण की स्पष्ट चेतावनी दी।
बच्ची की माँ चंद्रमुनि उराइन की हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई जारी; सात साल में कोई सुराग नहीं।
पुलिस महानिदेशक और गुमला एसपी पहले भी पेश हो चुके हैं, लेकिन जांच में कोई सार्थक प्रगति नहीं।
अगली सुनवाई 9 जून को निर्धारित; तब भी संतोषजनक जवाब न मिला तो CBI जांच संभव।

झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई छह वर्षीय बच्ची के मामले में पुलिस की जांच पर गहरी नाराज़गी जताते हुए सात वर्षों में पदस्थापित सभी पुलिस अधीक्षकों और जांचकर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। मंगलवार, 12 मई को हुई सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जांच में अब भी प्रगति नहीं हुई, तो मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया जाएगा।

मामले का पृष्ठभूमि

बच्ची की माँ चंद्रमुनि उराइन ने हाईकोर्ट में 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की थी। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही है। लगभग सात साल बीत जाने के बाद भी बच्ची का कोई सुराग नहीं मिलना अदालत की नज़र में पुलिस तंत्र की गंभीर विफलता का प्रमाण है।

अदालत की तल्ख टिप्पणी

खंडपीठ ने कहा कि मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं और बार-बार समय की माँग की जा रही है। अदालत ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में जांच को CBI को हस्तांतरित करना ही न्यायसंगत होगा। इतने लंबे समय तक बच्ची का पता न चल पाना न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह पुलिस की जांच क्षमता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

पुलिस की दलीलें और अदालत का असंतोष

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने बताया था कि विशेष जांच दल (SIT) विभिन्न राज्यों में छानबीन कर रहा है और वर्ष 2018 के दौरान संबंधित आयु वर्ग के यात्रियों की ट्रैवल हिस्ट्री के लिए रेलवे से विवरण माँगा गया था। हालाँकि, इन दलीलों से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। इससे पहले पुलिस महानिदेशक और गुमला एसपी भी अदालत के समक्ष पेश हो चुके हैं, लेकिन जांच में कोई सार्थक प्रगति नहीं दिखी।

लापता बच्चों पर हाईकोर्ट का रुख

गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व में भी लापता बच्चों के मामलों में डेटा के प्रभावी इस्तेमाल और मानक कार्यप्रणाली (SOP) तैयार करने पर ज़ोर दिया था। इस विशेष मामले में धरातल पर कोई ठोस सफलता न मिलना अदालत की उस चिंता को और गहरा करता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में बाल तस्करी और गुमशुदगी के मामलों पर राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान बढ़ रहा है।

आगे क्या होगा

खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 9 जून की तिथि निर्धारित की है। वर्ष 2018 से अब तक गुमला में पदस्थापित रहे सभी पुलिस अधीक्षकों और मामले के जांचकर्ताओं को उस दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना होगा। यदि तब भी संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो CBI जांच का रास्ता खुला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी SIT की वर्षों की छानबीन ठोस नतीजे नहीं दे सकी। हाईकोर्ट का CBI हस्तांतरण की चेतावनी देना इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका राज्य पुलिस पर भरोसा खो रही है। असली सवाल यह है कि SOP बनाने और डेटा के प्रभावी इस्तेमाल पर अदालत के पुराने निर्देशों के बावजूद ज़मीन पर कुछ क्यों नहीं बदला।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुमला लापता बच्ची का मामला क्या है?
वर्ष 2018 में झारखंड के गुमला जिले से एक छह वर्षीय बच्ची लापता हो गई थी। उसकी माँ चंद्रमुनि उराइन ने झारखंड हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की, जिस पर सात साल बाद भी कोई सुराग न मिलने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
झारखंड हाईकोर्ट ने किसे तलब किया है?
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने वर्ष 2018 से अब तक गुमला में पदस्थापित रहे सभी पुलिस अधीक्षकों और मामले के जांचकर्ताओं को व्यक्तिगत रूप से 9 जून की सुनवाई में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
क्या इस मामले में CBI जांच होगी?
अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पुलिस अब भी जांच में विफल रही, तो मामला CBI को हस्तांतरित किया जाएगा। 9 जून की सुनवाई में अधिकारियों के जवाब के आधार पर यह निर्णय लिया जा सकता है।
पुलिस ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
राज्य सरकार ने बताया था कि विशेष जांच दल (SIT) विभिन्न राज्यों में छानबीन कर रहा है और रेलवे से 2018 के यात्रियों की ट्रैवल हिस्ट्री माँगी गई थी। हालाँकि अदालत इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई और पुलिस महानिदेशक तथा गुमला एसपी की पेशी के बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी।
अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 9 जून के लिए निर्धारित की है, जिसमें तलब किए गए सभी अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना होगा।
राष्ट्र प्रेस