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क्या झारखंड में गुमला से लापता बच्ची का आठ साल बाद भी नहीं चला पता? हाईकोर्ट ने गृह सचिव को बुलाया

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क्या झारखंड में गुमला से लापता बच्ची का आठ साल बाद भी नहीं चला पता? हाईकोर्ट ने गृह सचिव को बुलाया

सारांश

क्या झारखंड में गुमला से लापता बच्ची का आठ साल बाद भी कोई सुराग नहीं मिला? झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सुनवाई के दौरान गंभीर मुद्दों को उठाते हुए गृह सचिव को तलब किया गया है। जानिए इस मामले की पूरी जानकारी और क्या कहा अदालत ने।

मुख्य बातें

गुमला में 2018 से लापता बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला है।
हाईकोर्ट ने गृह सचिव को तलब किया है।
विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है।
अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।
राज्य में बच्चों की तस्करी के मामलों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

रांची, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले से वर्ष 2018 से लापता छह वर्षीय बच्ची की मां द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य में बच्चों की तस्करी, घुमंतू समुदायों की निगरानी और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। आठ साल का समय बीत जाने के बाद भी बच्ची का कोई सुराग न मिल पाने पर अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ में गुमला के एसपी को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया गया।

एसपी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी ने दिल्ली जाकर बच्ची की खोज से संबंधित सुराग इकट्ठा करने की कोशिश की है और उसकी तस्वीरें विभिन्न स्थानों पर प्रसारित की गई हैं, लेकिन अभी तक बच्ची को बरामद नहीं किया जा सका है।

अदालत ने अगली सुनवाई 27 जनवरी को निर्धारित करते हुए गृह सचिव को ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हाल की घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि झारखंड में राजस्थान समेत अन्य राज्यों से आने वाले घुमंतू लोगों के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि ये लोग जगह-जगह टेंट लगाकर रहते हैं, लेकिन न तो पुलिस इनकी पहचान की जांच करती है और न ही राज्य सरकार ने इनके लिए कोई ठोस नियम बनाए हैं।

कोर्ट ने आशंका जताई कि कई बार ऐसे समूह आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल होते हैं, इसलिए इनकी निगरानी के लिए ठोस दिशा-निर्देश बनाना आवश्यक है। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य में बच्चों की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है, जिस पर तत्काल और कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

यह मामला गुमला जिले की बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन द्वारा सितंबर 2018 में दायर हैबियस कॉर्पस याचिका से संबंधित है। बच्ची के लापता होने के बाद परिजनों ने पुलिस से कई बार सहायता मांगी, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला अदालत तक पहुंचा।

राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों की तस्करी और लापता मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और राज्य सरकार को इस दिशा में ठोस नीति और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे देश में बच्चों की सुरक्षा और तस्करी की समस्या को भी सामने लाते हैं। यह स्थिति गंभीर है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस प्रकार के मामलों की पुनरावृत्ति न हो।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुमला में बच्ची कब लापता हुई?
गुमला में बच्ची वर्ष 2018 में लापता हुई थी।
हाईकोर्ट ने किसे तलब किया?
हाईकोर्ट ने गृह सचिव को तलब किया।
बच्ची की खोज के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
बच्ची की खोज के लिए एक नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है।
अदालत ने अगली सुनवाई कब निर्धारित की है?
अदालत ने अगली सुनवाई 27 जनवरी को निर्धारित की है।
राज्य में बच्चों की तस्करी की समस्या पर क्या कहा गया?
अदालत ने कहा कि राज्य में बच्चों की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है और इस पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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