झारखंड हाईकोर्ट की सख्ती: लापता युवती के मामले में डीजीपी और एसआईटी को तलब किया
सारांश
Key Takeaways
- हाईकोर्ट ने मामलों की गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया।
- डीएनए जांच की देरी ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
- मामले में पुलिस की निष्क्रियता ने जांच में बाधा डाली।
- अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया।
- बरामद कंकाल की पहचान पर विवाद बना हुआ है।
रांची, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के बोकारो जिले की 18 वर्षीय युवती के 9 महीने से लापता होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले की जांच की धीमी गति और बरामद कंकाल की डीएनए जांच न कराए जाने पर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के डीजीपी, एफएसएल निदेशक, बोकारो एसपी और पूरी एसआईटी टीम को गुरुवार सुबह 10:30 बजे अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। लापता युवती की मां की ओर से दायर हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रार्थी पक्ष के वकील विंसेट रोहित मार्की ने पुलिस के दावों पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने अदालत को बताया कि पुलिस एक अभियुक्त की निशानदेही पर एक कंकाल बरामद किया है और दावा किया है कि कंकाल लापता युवती का है। उन्होंने यह भी कहा कि कंकाल की स्थिति देखकर वह 2 से 3 साल पुराना प्रतीत होता है, जबकि युवती करीब 9 महीने से लापता है। प्रार्थी पक्ष ने यह भी कहा कि जिस सार्वजनिक स्थान से कंकाल मिला है, वह किसी और का भी हो सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत तब नाराज हो गई जब यह जानकारी सामने आई कि बरामद कंकाल की अब तक डीएनए जांच नहीं कराई गई है और न ही मृतका की मां के सैंपल लिए गए हैं। कोर्ट ने इसे जांच में बड़ी लापरवाही करार दिया।
उल्लेखनीय है कि यह मामला अगस्त 2025 में दर्ज अपहरण की शिकायत से जुड़ा है। महीनों तक पुलिस की निष्क्रियता के बाद जब मृतका की मां ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तब जाकर पुलिस तंत्र सक्रिय हुआ था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दिनेश कुमार महतो नामक युवक को गिरफ्तार किया था, जिसने कथित तौर पर शादी का दबाव बनाने के कारण 21 जुलाई 2025 को युवती की हत्या करने की बात कबूल की थी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने कुछ दिन पहले एक कंकाल बरामद किया था।
हालांकि, अब बरामद अवशेषों की पहचान पर उठे विवाद और डीएनए जांच में देरी ने पूरी तफ्तीश को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।