सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम दुष्कर्म मामले में हरियाणा पुलिस की संवेदनहीनता पर जताई नाराजगी

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम दुष्कर्म मामले में हरियाणा पुलिस की संवेदनहीनता पर जताई नाराजगी

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम दुष्कर्म मामले में हरियाणा पुलिस और मजिस्ट्रेट के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई है। क्या इस मामले में न्याय मिलेगा? जानें इसके पीछे की कहानी।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई।
  • बच्ची के बयान के समय आरोपी के करीब खड़े रहने पर चिंता जताई गई।
  • मामले की जांच में सीबीआई या एसआईटी की मांग की गई।

नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में चार साल की एक निर्दोष बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म मामले में हरियाणा पुलिस और न्यायिक मजिस्ट्रेट की असंवेदनशीलता पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच को अत्यधिक असंवेदनशील और चिंताजनक बताया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पुलिस का व्यवहार चौंकाने वाला है और यह बच्ची को और अधिक मानसिक आघात पहुंचाने वाला रहा है।

अदालत ने गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी को सभी केस रिकॉर्ड के साथ 25 मार्च को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही, हरियाणा सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता से पूछा गया कि उनके विभाग में कितनी महिला पुलिस अधिकारी कार्यरत हैं। अदालत ने इस पर भी कड़ी नाराजगी जाहिर की कि जब न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बच्ची का बयान लिया था, तब आरोपी उसके बहुत करीब खड़ा था, जिससे बच्ची को डर और असहजता का सामना करना पड़ा होगा।

बच्ची के माता-पिता ने मांग की है कि इस संवेदनशील मामले की जांच गुरुग्राम पुलिस के बजाय सीबीआई या विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर हरियाणा सरकार, डीजीपी और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है और पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मांगी है।

कोर्ट ने गुरुग्राम के सेशन जज को निर्देश दिया है कि वे उस मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगें, जिसने बच्ची का बयान इस तरह दर्ज किया था। यह स्पष्टीकरण अदालत को सीलबंद लिफाफे में सौंपा जाएगा।

इसके अतिरिक्त, बच्ची के माता-पिता द्वारा प्रस्तुत हलफनामा भी सीलबंद लिफाफे में रखने का आदेश दिया गया है, ताकि बच्ची की पहचान और गोपनीयता सुरक्षित रहे।

यह मामला गुरुग्राम के एक कंडोमिनियम में दिसंबर 2025-जनवरी 2026 के दौरान हुई घटना से संबंधित है, जिसमें बच्ची ने दो महिला मेड और एक युवक पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। पुलिस पर शुरुआत में लापरवाही का आरोप लगा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद हाल ही में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अब कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जांच पूरी निष्पक्षता और संवेदनशीलता से हो, ताकि पीड़ित बच्ची को न्याय मिल सके।

Point of View

NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस को कब उपस्थित होने का आदेश दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी को 25 मार्च को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।
बच्ची के माता-पिता ने किस प्रकार की जांच की मांग की है?
बच्ची के माता-पिता ने इस मामले की जांच गुरुग्राम पुलिस के बजाय सीबीआई या विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की मांग की है।
इस मामले में कोर्ट ने क्या कार्रवाई की है?
कोर्ट ने मामले की जांच को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मांगी है और मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगा है।
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