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बच्चों का स्क्रीन टाइम: FIU स्टडी में खुलासा — माता-पिता का तनाव भी है बड़ी वजह

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बच्चों का स्क्रीन टाइम: FIU स्टडी में खुलासा — माता-पिता का तनाव भी है बड़ी वजह

सारांश

बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम के लिए सिर्फ बच्चों को दोष देना अधूरा सच है। FIU के नए शोध में 822 अभिभावकों पर हुए अध्ययन से पता चला कि माता-पिता का भावनात्मक तनाव सीधे तौर पर बच्चों के स्क्रीन उपयोग को प्रभावित करता है — और समाधान भी उन्हीं से शुरू होना चाहिए।

मुख्य बातें

फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (FIU) के शोध में 4 से 8 वर्ष के बच्चों की देखभाल करने वाले 822 अभिभावकों को शामिल किया गया।
अधिक भावनात्मक तनाव वाले माता-पिता बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियमित सीमाएँ लागू करने में कम सक्षम पाए गए।
शोध फैमिली रिलेशन्स जर्नल में प्रकाशित; प्रमुख लेखिका एनिड मोरेरा (FIU, मनोविज्ञान)।
विशेषज्ञों ने स्क्रीन उपयोग समझने के लिए '5 C ऑफ मीडिया यूज़' — Child, Content, Cues, Crowding Out, Communication — अपनाने की सलाह दी।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने कहा — स्क्रीन के मिनट नहीं, सामग्री की गुणवत्ता और बच्चे का समग्र विकास देखें।

फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (FIU) के सेंटर फॉर चिल्ड्रन एंड फैमिलीज द्वारा किए गए एक नए शोध में सामने आया है कि बच्चों के अत्यधिक स्क्रीन उपयोग की जड़ें केवल बच्चों की आदतों में नहीं, बल्कि माता-पिता के भावनात्मक तनाव में भी छिपी हैं। फैमिली रिलेशन्स जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में 4 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों की देखभाल करने वाले 822 अभिभावकों को शामिल किया गया।

शोध में क्या सामने आया

अध्ययन के अनुसार, जिन अभिभावकों में भावनात्मक तनाव का स्तर अधिक था, वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियमित रूप से सीमाएँ लागू करने में अपेक्षाकृत कम सक्षम पाए गए। इसके अलावा, जो माता-पिता बच्चे के व्यवहार से अधिक दबाव महसूस करते थे, वे कठिन परिस्थितियों में बच्चे को शांत रखने या व्यस्त रखने के लिए स्क्रीन का सहारा अधिक लेते थे।

शोध की प्रमुख लेखिका और FIU की मनोविज्ञान की डॉक्टरेट छात्रा एनिड मोरेरा के अनुसार, 'बच्चों के मीडिया उपयोग से जुड़े निर्णयों पर माता-पिता का अपना तनाव भी गहरा असर डालता है। इसलिए बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी आवश्यक सहयोग मिलना ज़रूरी है।'

सिर्फ 'स्क्रीन हटाओ' कहना काफी नहीं

शोधकर्ताओं का कहना है कि हर परिवार को केवल यह निर्देश देना कि बच्चे का स्क्रीन टाइम घटाएँ, व्यावहारिक समाधान नहीं है। कई बार अभिभावकों के लिए किसी कठिन पल को सँभालने का सबसे सुलभ तरीका स्क्रीन ही होती है। ऐसे में असली प्रश्न यह होना चाहिए कि बच्चा स्क्रीन पर क्या देख रहा है और उसका उसके विकास पर कैसा असर पड़ रहा है।

वरिष्ठ शोधकर्ता शायला ग्रिफिथ के अनुसार, जब माता-पिता के पास पर्याप्त संसाधन और सामाजिक सहयोग होता है, तो वे बच्चों के लिए बेहतर सीमाएँ तय कर पाते हैं और उनके साथ अधिक सकारात्मक तरीके से जुड़ पाते हैं।

विशेषज्ञों की '5 C' सलाह

शोधकर्ताओं ने स्क्रीन उपयोग को समझने के लिए '5 C ऑफ मीडिया यूज़' पर ध्यान देने की सलाह दी है:

Child (बच्चा): बच्चे की उम्र, स्वभाव और व्यक्तिगत ज़रूरतों को समझें। Content (सामग्री): उम्र के अनुसार उपयोगी और रुचिकर सामग्री चुनें। Cues (संकेत): देखें कि बच्चा हर परेशानी में स्क्रीन पर निर्भर तो नहीं हो रहा। Crowding Out (विस्थापन): जाँचें कि स्क्रीन के कारण नींद, खेलकूद, परिवार के साथ समय या पढ़ाई प्रभावित तो नहीं हो रही। Communication (संवाद): बच्चे से तकनीक के उपयोग को लेकर खुलकर बातचीत करें।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की राय

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) भी परिवारों को केवल स्क्रीन के मिनट गिनने के बजाय सामग्री की गुणवत्ता, दैनिक दिनचर्या और बच्चे के समग्र स्वस्थ विकास पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देती है। शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि यदि किसी कठिन दिन अभिभावक बच्चे को थोड़ी देर स्क्रीन दे देते हैं, तो यह कोई बड़ी चूक नहीं — ज़रूरत बस इतनी है कि यह उपयोग सोच-समझकर और सजगता के साथ हो।

आगे क्या करें अभिभावक

शोध का निष्कर्ष यह है कि बच्चों की स्क्रीन आदतों को सुधारने के लिए पहले अभिभावकों के तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को संबोधित करना होगा। विशेषज्ञ सुझाते हैं कि सामुदायिक और पारिवारिक सहयोग तंत्र को मज़बूत बनाने से न केवल माता-पिता का बोझ कम होगा, बल्कि बच्चों का स्क्रीन उपयोग भी स्वाभाविक रूप से अधिक संतुलित होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ संयुक्त परिवार टूट रहे हैं और कामकाजी माता-पिता पर दोहरा बोझ है, स्क्रीन अक्सर एकमात्र सुलभ 'बेबीसिटर' बन जाती है। नीतिगत स्तर पर इस शोध का निहितार्थ यह है कि बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों को अभिभावक मानसिक स्वास्थ्य सहयोग के साथ जोड़ना होगा — अन्यथा 'स्क्रीन कम करो' की सलाह खोखली रहेगी।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FIU की स्क्रीन टाइम स्टडी में क्या पाया गया?
FIU के सेंटर फॉर चिल्ड्रन एंड फैमिलीज के शोध में पाया गया कि माता-पिता का भावनात्मक तनाव बच्चों के अधिक स्क्रीन उपयोग से सीधे जुड़ा है। जो अभिभावक अधिक तनाव में थे, वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियमित सीमाएँ लागू करने में कम सक्षम पाए गए।
बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर माता-पिता क्या करें?
शोधकर्ताओं की सलाह है कि केवल स्क्रीन का समय घटाने की बजाय बच्चे की उम्र के अनुसार गुणवत्तापूर्ण सामग्री चुनें और '5 C ऑफ मीडिया यूज़' का पालन करें। साथ ही अपने स्वयं के तनाव को प्रबंधित करने के लिए सामुदायिक सहयोग लें।
'5 C ऑफ मीडिया यूज़' क्या है?
यह बच्चों के स्क्रीन उपयोग को समझने का एक ढाँचा है जिसमें Child (बच्चे की ज़रूरतें), Content (सामग्री की गुणवत्ता), Cues (स्क्रीन पर निर्भरता के संकेत), Crowding Out (अन्य गतिविधियों पर असर) और Communication (बच्चे से खुला संवाद) शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन पाँचों पहलुओं पर ध्यान देने से स्क्रीन उपयोग अधिक संतुलित हो सकता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की स्क्रीन टाइम पर क्या राय है?
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) परिवारों को केवल स्क्रीन के मिनट गिनने के बजाय सामग्री की गुणवत्ता, दैनिक दिनचर्या और बच्चे के समग्र स्वस्थ विकास पर ध्यान देने की सलाह देती है। AAP का मानना है कि संतुलित दिनचर्या और सजग उपयोग समय-सीमा से अधिक प्रभावी है।
क्या मुश्किल दिन में बच्चे को स्क्रीन देना गलत है?
शोधकर्ताओं के अनुसार, किसी कठिन दिन थोड़ी देर के लिए स्क्रीन देना कोई बड़ी चूक नहीं है। ज़रूरी यह है कि यह उपयोग सोच-समझकर हो — सही सामग्री के साथ और इस तरह कि नींद, खेलकूद या परिवार के साथ समय प्रभावित न हो।
राष्ट्र प्रेस
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