25 सितंबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने पर SIT जांच की मांग

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सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने पर SIT जांच की मांग

सारांश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में PIL दाखिल हुई है — 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने पर SIT जांच और अधिकारियों पर मुकदमे की माँग। साथ ही चंडीगढ़ में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के दौरान वॉटर कैनन का इस्तेमाल और कई कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी ने मामले को और गर्म किया।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय में 25 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई।
याचिका में मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने की SIT जांच की मांग की गई है।
SIR से जुड़े फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए जाने का कथित आरोप; फॉर्म-6 बहाल करने की माँग।
याचिका में मनीष गर्ग (IAS) और सीमा खन्ना (IT हेड, ECI) सहित कई अधिकारियों पर RP Act के तहत मुकदमे की माँग।
चंडीगढ़ में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में 25 सितंबर 2026 को एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। यह याचिका मीडिया रिपोर्टों को आधार बनाकर दायर की गई है और इसमें मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने की निष्पक्ष जांच समेत कई गंभीर मांगें उठाई गई हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं हो सकती।

याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं

याचिका में कथित तौर पर आरोप लगाया गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि ऐसे सभी फैसलों को गैरकानूनी घोषित किया जाए और मूल फॉर्म-6 को फिर से लागू किया जाए।

इसके साथ ही याचिका में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) के तहत ड्यूटी के दौरान कथित उल्लंघनों के लिए कई अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की भी माँग की गई है। जिन अधिकारियों के नाम याचिका में शामिल हैं, उनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मनीष गर्ग (IAS, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर) और सीमा खन्ना (IT हेड, भारत निर्वाचन आयोग) शामिल हैं।

SIT जांच की मांग और मतदाता सूची विवाद

याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से यह भी अनुरोध किया गया है कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की पूरी प्रक्रिया की विशेष जांच दल (SIT) से निष्पक्ष जांच कराई जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती है।

गौरतलब है कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया विपक्षी दलों के निशाने पर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पहले से ही SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद का सामना कर रहा है।

चंडीगढ़ में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

चंडीगढ़ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के कार्यकर्ताओं ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे, जिसके बाद पुलिस को वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया।

कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जब तक सीईसी इस्तीफा नहीं देते, उनका विरोध जारी रहेगा।

भारत निर्वाचन आयोग और सरकार की प्रतिक्रिया

फिलहाल भारत निर्वाचन आयोग या केंद्र सरकार की ओर से इस PIL पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सर्वोच्च न्यायालय ने अभी याचिका की सुनवाई की तारीख तय नहीं की है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस PIL को स्वीकार करने या अस्वीकार करने का निर्णय चुनावी प्रशासन पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। यदि न्यायालय SIT जांच का आदेश देता है, तो यह भारत के चुनावी इतिहास में एक अभूतपूर्व कदम होगा। राजनीतिक और कानूनी विशेषज्ञ इस मामले पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि क्या वे प्रक्रियागत सर्वसम्मति के बिना लिए गए — एक ऐसा सवाल जिसका जवाब अदालत के बाहर देना अब मुश्किल होगा। कांग्रेस का सड़क पर उतरना और सर्वोच्च न्यायालय में PIL — दोनों एक साथ — यह संकेत देते हैं कि यह मामला अगले चुनाव से पहले चुनाव आयोग की साख की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL क्यों दाखिल की गई?
यह PIL 25 सितंबर 2026 को मीडिया रिपोर्टों के आधार पर दाखिल की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े कई अहम फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने उन फैसलों को गैरकानूनी घोषित करने और मूल फॉर्म-6 बहाल करने की माँग की है।
13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने पर SIT जांच की माँग क्यों है?
याचिकाकर्ता का तर्क है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं हो सकती और इसमें संभावित अनियमितताएं हो सकती हैं। इसीलिए एक स्वतंत्र SIT (विशेष जांच दल) से निष्पक्ष जांच की माँग की गई है।
PIL में किन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमे की माँग की गई है?
याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा मनीष गर्ग (IAS, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर) और सीमा खन्ना (IT हेड, भारत निर्वाचन आयोग) के नाम शामिल हैं। इन पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) के तहत ड्यूटी के दौरान कथित उल्लंघन के लिए मुकदमा चलाने की माँग है।
चंडीगढ़ में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में क्या हुआ?
चंडीगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की। भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
सर्वोच्च न्यायालय इस PIL पर आगे क्या कर सकता है?
सर्वोच्च न्यायालय पहले PIL को स्वीकार या अस्वीकार करेगा। यदि याचिका स्वीकार होती है तो न्यायालय सरकार और ECI से जवाब माँग सकता है और SIT जांच पर भी विचार कर सकता है। फिलहाल सुनवाई की कोई तारीख तय नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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