29 सितंबर 2026
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एसआईआर विवाद: वामदलों का चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग

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एसआईआर विवाद: वामदलों का चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग

सारांश

मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) का विवाद अब सड़क से सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया है। वामदल, कांग्रेस और नागरिक समाज एकजुट हैं; सीपीआई-एम का दावा है कि 13 करोड़ नाम हटाए गए। सर्वोच्च न्यायालय अगले सप्ताह सुनवाई करेगा — संस्थागत टकराव अपने चरम पर है।

मुख्य बातें

सीपीआई और सीपीआई-एम के कार्यकर्ता 29 सितंबर 2026 को भारतीय चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए।
सीपीआई-एम नेता वृंदा करात का आरोप — लगभग 13 करोड़ नागरिकों का नाम मतदाता सूची से हटाया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीईसी को हटाने के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी माँग की।
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर की वैधता पर अगले सप्ताह सुनवाई की सहमति दी।
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार एसआईआर के निर्णयों पर आपत्ति जताई।
चुनाव आयोग ने सभी निर्णयों को कानूनसम्मत बताया और आंतरिक मतभेदों को सामान्य विमर्श का हिस्सा कहा।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (सीपीआई-एम) समेत अन्य वामपंथी दलों के कार्यकर्ता 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए और मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की। यह प्रदर्शन व्यापक विपक्षी अभियान की कड़ी है, जो हाल के हफ्तों में तेज़ी से फैला है।

प्रदर्शन में क्या हुआ

सीपीआई-एम नेता वृंदा करात ने कहा कि देश के लगभग 13 करोड़ नागरिकों का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा, 'मौजूदा हालात ब्रिटिश काल से भी बदतर हैं।' सीपीआई-एम महासचिव एमए बेबी ने भी सीईसी पर निशाना साधते हुए कहा कि 'ज्ञानेश कुमार पद पर नहीं रह सकते — हम उन्हें पद पर नहीं रहने देंगे।'

कांग्रेस की माँगें और सीडब्ल्यूसी बैठक

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उसी दिन कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक को संबोधित करते हुए एसआईआर में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया और सीईसी को तत्काल हटाने की माँग की। खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग प्रमुख पर कथित दबाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस्तीफा देना चाहिए। पार्टी ने संकेत दिया कि यह अभियान सड़कों और संसद — दोनों मंचों पर जारी रहेगा।

गौरतलब है कि 25 सितंबर को कांग्रेस ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, जिसमें सीईसी पर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से समझौते का आरोप लगाया गया था। नागरिक समाज संगठनों और अन्य दलों ने भी दिल्ली सहित कई राज्यों में समानांतर प्रदर्शन किए।

सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 सितंबर को उस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई जो सीईसी के कामकाज को चुनौती देती है और देशव्यापी एसआईआर की वैधता पर प्रश्न उठाती है। न्यायालय की यह सहमति विपक्ष के लिए एक महत्त्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

आयोग के भीतर मतभेद

विवाद तब और गहरा गया जब एक प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक ने रिपोर्ट किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े निर्णयों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों का आरोप था कि कुछ निर्णय उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना लिए गए। यह आरोप, यदि सत्य है, तो संस्थागत स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर पर लिए गए सभी निर्णय कानून के अनुसार हुए हैं। आयोग ने आंतरिक मतभेदों को सामान्य विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा बताया और किसी भी अनियमितता से इनकार किया है। यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लंबित है और विपक्षी दल सड़कों पर उतर आए हैं — आने वाले दिनों में यह विवाद और तीखा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्य है, तो यह संकेत देता है कि असहमति संस्था के भीतर से ही है — जो विपक्ष के आरोपों को बाहरी राजनीतिक शोर से अधिक गंभीर बनाता है। मुख्यधारा की कवरेज प्रदर्शन की संख्या और नारों पर केंद्रित है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि सर्वोच्च न्यायालय एसआईआर की प्रक्रियागत वैधता पर क्या निर्णय देता है। यदि न्यायालय हस्तक्षेप करता है, तो यह चुनाव आयोग की स्वायत्तता और कार्यप्रणाली पर दीर्घकालिक संवैधानिक प्रश्न खड़े करेगा — जो किसी एक इस्तीफे से कहीं बड़ा मुद्दा है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) क्या है?
एसआईआर वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की समीक्षा कर अपात्र, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस बार इस प्रक्रिया में लगभग 13 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम भी हटाए गए हैं, जबकि चुनाव आयोग इसे कानूनसम्मत बता रहा है।
वामदल और कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों माँग रहे हैं?
विपक्षी दलों का आरोप है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितताएँ हुईं और कुछ निर्णय अन्य दो आयुक्तों की जानकारी के बिना लिए गए। सीपीआई-एम नेता वृंदा करात ने इसे 'ब्रिटिश काल से भी बदतर' बताया है। कांग्रेस ने इसे चुनावी निष्पक्षता पर हमला करार दिया है।
सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में क्या करेगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को उस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई की सहमति दी है जो सीईसी के कामकाज और एसआईआर की कानूनी वैधता दोनों को चुनौती देती है। न्यायालय का निर्णय इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।
क्या चुनाव आयोग के भीतर वाकई मतभेद थे?
एक राष्ट्रीय दैनिक की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े निर्णयों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई। हालाँकि चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को सामान्य आंतरिक विमर्श का हिस्सा बताया है और किसी अनियमितता से इनकार किया है।
यह प्रदर्शन पहले के विरोधों से कैसे जुड़ा है?
25 सितंबर 2026 को कांग्रेस ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया था। 29 सितंबर का वामदलों का प्रदर्शन उसी अभियान का विस्तार है, जिसमें अब नागरिक समाज संगठन और अन्य विपक्षी दल भी शामिल हो चुके हैं — जो इसे एकदलीय आंदोलन से व्यापक गठबंधन की शक्ल दे रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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