एसआईआर विवाद: वामदलों का चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (सीपीआई-एम) समेत अन्य वामपंथी दलों के कार्यकर्ता 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए और मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की। यह प्रदर्शन व्यापक विपक्षी अभियान की कड़ी है, जो हाल के हफ्तों में तेज़ी से फैला है।
प्रदर्शन में क्या हुआ
सीपीआई-एम नेता वृंदा करात ने कहा कि देश के लगभग 13 करोड़ नागरिकों का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा, 'मौजूदा हालात ब्रिटिश काल से भी बदतर हैं।' सीपीआई-एम महासचिव एमए बेबी ने भी सीईसी पर निशाना साधते हुए कहा कि 'ज्ञानेश कुमार पद पर नहीं रह सकते — हम उन्हें पद पर नहीं रहने देंगे।'
कांग्रेस की माँगें और सीडब्ल्यूसी बैठक
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उसी दिन कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक को संबोधित करते हुए एसआईआर में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया और सीईसी को तत्काल हटाने की माँग की। खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग प्रमुख पर कथित दबाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस्तीफा देना चाहिए। पार्टी ने संकेत दिया कि यह अभियान सड़कों और संसद — दोनों मंचों पर जारी रहेगा।
गौरतलब है कि 25 सितंबर को कांग्रेस ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, जिसमें सीईसी पर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से समझौते का आरोप लगाया गया था। नागरिक समाज संगठनों और अन्य दलों ने भी दिल्ली सहित कई राज्यों में समानांतर प्रदर्शन किए।
सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 सितंबर को उस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई जो सीईसी के कामकाज को चुनौती देती है और देशव्यापी एसआईआर की वैधता पर प्रश्न उठाती है। न्यायालय की यह सहमति विपक्ष के लिए एक महत्त्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।
आयोग के भीतर मतभेद
विवाद तब और गहरा गया जब एक प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक ने रिपोर्ट किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े निर्णयों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों का आरोप था कि कुछ निर्णय उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना लिए गए। यह आरोप, यदि सत्य है, तो संस्थागत स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर पर लिए गए सभी निर्णय कानून के अनुसार हुए हैं। आयोग ने आंतरिक मतभेदों को सामान्य विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा बताया और किसी भी अनियमितता से इनकार किया है। यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लंबित है और विपक्षी दल सड़कों पर उतर आए हैं — आने वाले दिनों में यह विवाद और तीखा होने की संभावना है।