एसआईआर पर विपक्ष एकजुट: इंडिया ब्लॉक की 20 पार्टियाँ मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग पर अड़ीं
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 3 अक्टूबर को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में इंडिया ब्लॉक की 20 पार्टियाँ एकजुट हुईं और मुख्य चुनाव आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की माँग को और तेज़ कर दिया। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग की मतदाता सूची शुद्धीकरण की यह प्रक्रिया गरीब, दलित, अल्पसंख्यक और पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं को लक्षित कर उनके नाम सूची से हटा रही है।
इंडिया ब्लॉक की बैठक और साझा रुख
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि इंडिया ब्लॉक की एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें गठबंधन की 20 पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने कहा, कपिल सिब्बल सहित सभी की राय एकसमान थी — एसआईआर देश के लिए गलत है।
खड़गे ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया गरीब, कम पढ़े-लिखे, मजदूर और खासकर अल्पसंख्यक समुदायों के नाम मतदाता सूची से हटा रही है। उन्होंने सवाल उठाया, 'अगर किसी एक बूथ से 500 वोट हटा दिए जाएँ, तो क्या उस चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र कहा जा सकता है?'
खड़गे ने यह भी कहा कि सत्ता के दुरुपयोग का सीधा असर युवाओं, गरीबों, दलितों और वंचितों पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, संपन्न वर्ग तो किसी तरह अपना काम करवा लेता है, लेकिन गरीब को नाम सुधरवाने के लिए अपनी रोज़ी-रोटी छोड़कर दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
मुख्य आरोप: 13 करोड़ नाम हटाए गए, कर्नाटक में फॉर्म-7 विवाद
जमात-ए-इस्लामी हिंद से जुड़े मलिक मोतासिम खान ने दावा किया कि एसआईआर के ज़रिये मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम हटाए जा चुके हैं। उन्होंने कर्नाटक में फॉर्म-7 के ज़रिये वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश के आरोप भी लगाए।
मोतासिम खान ने यह भी कहा कि पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं — जिन्हें कथित तौर पर 'जेनज़ी वोटर' कहा जा रहा है — से फॉर्म-6 में माता-पिता और दादा-दादी की जानकारी माँगी जा रही है, जो उन्हें प्रक्रिया से हतोत्साहित कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एसआईआर को जारी रखने की अनुमति दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
चुनाव आयोग के भीतर असहमति का दावा
प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि एसआईआर की शुरुआत से ही इसकी निष्पक्षता और मंशा पर सवाल उठते रहे हैं। उनके अनुसार, सबसे पहले इसे बिहार में जल्दबाज़ी में लागू किया गया — जहाँ चुनाव निकट थे — और इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हट गए। बाद में इसे पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में भी लागू किया गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने एसआईआर को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया — जिससे संस्था की आंतरिक दरार सार्वजनिक हो गई।
अन्य विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के सदस्यों ने एसआईआर पर 14 बार आपत्ति जताई, लेकिन उनकी चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया गया। उन्होंने सवाल किया कि किसके इशारे पर यह अनदेखी की गई।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने माँग की कि चुनाव आयोग देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी माँगे। उन्होंने कहा कि देशव्यापी आंदोलन के दबाव में चुनाव आयोग अपना रवैया बदलने लगा है।
समाजवादी पार्टी के नेता राजकुमार भाटी ने कहा कि युवाओं और आम नागरिकों का सड़कों पर उतरना लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। कांग्रेस नेता गुरजीत सिंह औजला ने बताया कि पंजाब में बूथ-स्तरीय कार्यकर्ता सक्रिय हैं और किसी भी मत के अनुचित विलोपन पर कड़ी नज़र रख रहे हैं।
अभिनेता प्रकाश राज ने सवाल उठाया कि 2025 में मतदाता सूची का अद्यतन संस्करण जारी होने के महज़ छह महीने के भीतर एसआईआर की क्या ज़रूरत थी, और चुनाव आयोग में किस प्रक्रिया का पालन किया गया।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर को जारी रखने की अनुमति दे दी है, जिससे विपक्ष का संसदीय और जन-आंदोलन दोनों मोर्चों पर दबाव बनाने का इरादा और स्पष्ट हो गया है। गौरतलब है कि विपक्ष की यह एकजुटता आगामी राज्य विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।