इंडिया गठबंधन की बैठक में 23 दल एकजुट: वोट चोरी, SIR और परिसीमन के खिलाफ साझा मोर्चा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि बैठक में 23 पार्टियाँ शामिल हुईं और पाँच प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी। गठबंधन ने वोट चोरी, विशेष सारांश संशोधन (SIR) और परिसीमन के मुद्दों पर एकजुट रहने का संकल्प लिया।
बैठक में क्या हुआ
बुधवार को दोपहर आयोजित इस बैठक के बारे में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि दोपहर भोजन का निर्णय कल देर रात लिया गया और दलों को सूचित किया गया। उन्होंने कहा कि इसी कारण कुछ दलों का प्रतिनिधित्व नहीं हो सका, और इस पर मीडिया के कुछ वर्गों में 'अनावश्यक टिप्पणी' हो रही है। रमेश ने जोर देकर कहा, 'इंडिया गठबंधन और अन्य विपक्षी दल एकजुट हैं और वोट चोरी, एसआईआर और परिसीमन के खिलाफ एकजुटता से खड़े हैं।'
पाँच सूत्री सहमति के बिंदु
खड़गे ने बताया कि मतदाता सूची में कथित हेरफेर और चुनाव की निष्पक्षता पर उठे गंभीर प्रश्नों को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को शीघ्र एक पत्र भेजा जाएगा। यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया।
इसके अलावा गठबंधन ने शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की माँग पर भी एकमत रुख अपनाया। खड़गे ने कहा, 'उनके कार्यकाल में NEET और CBSE परीक्षाओं में शामिल लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात हुआ है। आज लाखों युवा रास्ते पर खड़े हुए हैं।'
आर्थिक और सामाजिक मुद्दे भी एजेंडे में
बैठक में बढ़ती बेरोज़गारी, महँगाई, अत्याचार (एट्रोसिटी) और किसानों के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। खड़गे ने केंद्र सरकार से माँग की कि इन मुद्दों पर तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, जिसमें गठबंधन अपनी आपत्तियाँ सरकार के सामने रखेगा।
गठबंधन की आगे की रणनीति
बैठक में यह भी तय किया गया कि इंडिया गठबंधन के सभी दल प्रत्येक दो माह में एक बार बैठक करेंगे। अगली बैठक हैदराबाद में अगस्त माह में आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही मानसून सत्र के दौरान संसदीय समन्वय जारी रखने और प्रतिदिन प्रातःकाल नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में समन्वय बैठक आयोजित करने पर भी सहमति बनी।
राजनीतिक संदर्भ और महत्व
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब SIR प्रक्रिया और संभावित परिसीमन को लेकर विपक्षी दलों में गहरी आशंकाएँ हैं। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही, जिससे लाखों मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने की आशंका है। इंडिया गठबंधन का यह एकजुट प्रदर्शन आगामी चुनावी मौसम को देखते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।