ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: इंडिया गठबंधन एकजुट, चुनाव आयोग पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में जारी प्रदर्शन के बीच 13 अक्टूबर 2026 को इंडिया गठबंधन के नेताओं ने एक अहम बैठक की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। बैठक के बाद नेताओं ने मीडिया को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग पर पक्षपात और संवैधानिक संस्थाओं के 'अपहरण' के कथित आरोप लगाए।
बैठक का स्वरूप और प्रमुख उपस्थिति
इस बैठक में इंडिया ब्लॉक की लगभग सभी सदस्य पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के तेजस्वी यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के डी. राजा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की सुप्रिया सुले, समाजवादी पार्टी (SP) के हरेंद्र मलिक, शिवसेना (उद्धव गुट) के संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M) के एम.ए. बेबी और अधिवक्ता प्रशांत भूषण इस बैठक के प्रमुख चेहरे रहे।
नेताओं ने क्या कहा
मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने जनता के मुद्दों पर काम किया है और इसमें सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में लोग एकत्रित नहीं हुए थे और सरकार की कथित 'वोट चोरी' की योजना के विरुद्ध सभी एकजुट हो गए हैं।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने 'लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास' किया है। उनके अनुसार, ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग के बाद चुनाव आयोग को भी कथित तौर पर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया जाना सरकार के 'डर' का प्रमाण है।
प्रशांत भूषण के अनुसार, 2 अक्टूबर से दिल्ली में यह आंदोलन चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को दबाने के लिए सरकार ने मेट्रो, इंटरनेट और ट्रेन सेवाएँ बंद कीं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें सड़कों और पार्कों को प्रदर्शन के लिए उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
संजय राउत ने ज्ञानेश कुमार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहा संघर्ष जारी रहेगा। एम.ए. बेबी ने कहा कि जो संस्था निष्पक्ष होकर काम करने के लिए बाध्य है, वह कथित तौर पर सत्ताधारी दल के साथ मिलकर काम कर रही है।
जंतर-मंतर विवाद और प्रदर्शन स्थल का सवाल
डी. राजा ने दिल्ली में बैरिकेड और आवाजाही पर पाबंदियों की निंदा की। उन्होंने कहा कि पहले राजपथ और संसद मार्ग बंद हुए, और अब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया जा रहा है। गठबंधन ने माँग की कि इस निर्णय को वापस लिया जाए, क्योंकि संविधान के तहत नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार प्राप्त है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है। गठबंधन के नेताओं का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा आवश्यक है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इंडिया गठबंधन ने चुनाव आयोग पर इस तरह के आरोप लगाए हों — पिछले कई महीनों में विपक्ष और निर्वाचन तंत्र के बीच विवाद गहराता रहा है।
चुनाव आयोग या सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में इंडिया गठबंधन के आंदोलन की दिशा और तीव्रता इस राजनीतिक विवाद का अगला अध्याय तय करेगी।