कांग्रेस कार्यसमिति का प्रस्ताव: CEC ज्ञानेश कुमार तत्काल इस्तीफा दें, SIR पर रोक और 13.30 करोड़ नाम बहाल हों
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की सर्वोच्च नीति-निर्धारक संस्था कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की गई है। इसके साथ ही प्रस्ताव में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तत्काल निलंबित करने और मतदाता सूचियों से हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नामों को बहाल करने की माँग भी शामिल है।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के मार्गदर्शन और राहुल गांधी के नेतृत्व में हुई इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। CWC ने तीन ठोस माँगें सामने रखीं — मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा, SIR पर तत्काल रोक, और हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नामों की बहाली। पार्टी का कहना है कि ये माँगें लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए अपरिहार्य हैं।
कांग्रेस के आरोप और आधार
प्रस्ताव में कथित तौर पर यह आरोप लगाया गया कि मौजूदा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यकाल में भारत निर्वाचन आयोग को एक व्यक्ति-नियंत्रित संस्था में बदल दिया गया है। कांग्रेस के अनुसार, हालिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने दस महीनों में 14 आपत्तियाँ दर्ज कीं और SIR में प्रयुक्त फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को अनधिकृत एवं अवैध बताया।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि आदर्श आचार संहिता का चुनिंदा और पक्षपातपूर्ण तरीके से पालन, ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठते सवाल, और मतदाता सूचियों में मनमाने ढंग से नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया — ये सब मिलकर चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँचा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि देशव्यापी SIR के दौरान मतदाता सूचियों पर नियंत्रण कुछ अधिकारियों के हाथों में अभूतपूर्व रूप से केंद्रित किया गया।
संवैधानिक सवाल
कांग्रेस कार्यसमिति ने SIR की संवैधानिक वैधता पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। प्रस्ताव में कहा गया कि ऐसी प्रक्रिया जिसमें नागरिकों पर अपनी पात्रता स्वयं साबित करने का भार डाला जाए और जिसे बिना पारदर्शी सुरक्षा उपायों के जल्दबाजी में लागू किया जाए, वह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता की गारंटी) और अनुच्छेद 326 (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार) के अनुरूप नहीं है।
गौरतलब है कि SIR के चलते अब तक 13 करोड़ 30 लाख नागरिकों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा चुके हैं — एक ऐसा आँकड़ा जिसे कांग्रेस 'मतदान के अधिकार का सुनियोजित हनन' बता रही है।
राहुल गांधी की भूमिका और अभियान
कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन मुद्दों को लंबे समय से उठाते रहे हैं। पार्टी के अनुसार, जो शुरू में एक नेता की अकेली चेतावनी थी, वह अब पारदर्शिता और जवाबदेही की राष्ट्रीय माँग बन चुकी है। इसके तहत बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा', कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर को उजागर करने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस, देशव्यापी 'वोट चोरी' अभियान और संसद में इंडिया ब्लॉक के विरोध-प्रदर्शन शामिल हैं।
आगे क्या होगा
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं और मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को न्यायालय, संसद और सड़क — तीनों मंचों पर आगे ले जाएगी। निर्वाचन आयोग की ओर से इस प्रस्ताव पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।