CWC बैठक में राहुल गांधी ने उठाया चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की 29 सितंबर 2026 को हुई बैठक में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने बताया कि पार्टी चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अपनी मांगों पर दृढ़ है।
CWC बैठक में क्या हुआ
मुकुल वासनिक ने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से यह आरोप लगाते आ रहे हैं कि चुनाव आयोग जिस तरह से चुनाव कराता है, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों से लेकर कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में कथित गड़बड़ियों तक, राहुल गांधी लगातार इन सभी मुद्दों को सामने लाते रहे हैं।
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने बताया कि बैठक में SIR सहित देश के मौजूदा हालात पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने कहा कि पार्टी ने अपनी पुरानी माँगें बरकरार रखी हैं और उन्हें लेकर आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर आरोप
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि राहुल गांधी जो मुद्दे लगातार उठाते रहे हैं, वे अब सच साबित हो रहे हैं। उनके अनुसार, यह मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग के कामकाज का है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार हों या उनसे पहले राजीव कुमार, चुनाव आयोग की साख लगातार कमज़ोर होती गई है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सीधे आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग ने मिलकर चुनाव चोरी की। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में जनभावना को कुचला गया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाया। हुड्डा ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई, उनके इस्तीफे और हरियाणा में पुनः चुनाव कराने की माँग की।
पार्टी की आगामी रणनीति
कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने स्पष्ट किया कि पार्टी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर लामबंद होकर आंदोलन करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच तनाव चरम पर है और कई राज्यों में चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठाए हों। पार्टी ने पिछले कई वर्षों में ईवीएम, मतदाता सूची और चुनाव कार्यक्रम को लेकर आयोग को घेरा है। CWC बैठक में इस मुद्दे को उठाना दर्शाता है कि पार्टी इसे एक संगठित राजनीतिक अभियान का रूप देने की तैयारी में है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता लोकतंत्र की नींव है और किसी भी दल द्वारा उठाए गए गंभीर आरोपों की पारदर्शी जाँच ज़रूरी होती है। हालाँकि, आलोचकों का यह भी कहना है कि चुनाव हारने के बाद ईवीएम और संस्थाओं पर सवाल उठाना एक परिचित राजनीतिक पैटर्न बन चुका है, जिससे असली सुधार की बात पीछे रह जाती है।
कांग्रेस की माँगें स्वीकार की जाती हैं या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा — लेकिन यह तय है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता का सवाल अब संसद और सड़क, दोनों पर और तेज़ होगा।