30 सितंबर 2026
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चिदंबरम का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला: 'एसआईआर प्रक्रिया में भारी खामियां, 14 मुद्दों पर आयुक्तों में असहमति'

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चिदंबरम का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला: 'एसआईआर प्रक्रिया में भारी खामियां, 14 मुद्दों पर आयुक्तों में असहमति'

सारांश

चिदंबरम का दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया में 'भारी खामियां' हैं और आयोग के अपने आयुक्तों ने 14 मुद्दों पर असहमति जताई थी। अब इंडिया ब्लॉक एकजुट होकर महाभियोग तक की रणनीति बना रहा है — यह विवाद सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि चुनावी संस्थाओं की साख का सवाल बन चुका है।

मुख्य बातें

चिदंबरम ने 30 सितंबर 2026 को एसआईआर प्रक्रिया को 'भारी खामियों' वाला बताते हुए इसे 'पूरी तरह रद्द' करने की मांग की।
उनका दावा है कि दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच 14 मुद्दों पर असहमति थी।
कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में एसआईआर प्रक्रिया की कथित त्रुटियों का विशेष उल्लेख किया गया।
इंडिया ब्लॉक आज नई दिल्ली में बैठक कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन और संभावित महाभियोग प्रस्ताव पर रणनीति बनाएगा।
चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर पर अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और आंतरिक टिप्पणियां विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा थीं।

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया को लेकर आयोग के भीतर ही गंभीर मतभेद रहे और दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस पर संदेह जताया था।

चिदंबरम के मुख्य आरोप

चिदंबरम ने सीधे शब्दों में कहा, 'चुनाव आयोग पूरी तरह गलत है।' उन्होंने दावा किया, 'एसआईआर प्रक्रिया पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने संदेह जताया है और उन्होंने बताया है कि चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच 14 मुद्दों पर असहमति थी।'

उन्होंने आगे कहा, 'कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में बहुत सारी गलतियां बताई गई हैं। एसआईआर प्रक्रिया में भारी खामियां हैं। अगर इसमें खामियां नहीं थीं, तो चुनाव आयोग को दोबारा बैठक करके प्रक्रिया बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? कुछ दिन पहले जो हुआ, उसे पूरी तरह रद्द कर दिया जाना चाहिए।'

आयोग के भीतर मतभेदों की पृष्ठभूमि

रिपोर्टों के अनुसार, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन आंतरिक मतभेदों की खबरें सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया। हालांकि, चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि एसआईआर अभ्यास पर अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे और बीच की टिप्पणियां उसकी विचार-विमर्श प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा थीं।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही कई राज्यों में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठा रहा है।

इंडिया ब्लॉक की आज की बैठक

इसी मुद्दे पर बुधवार को नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की एक महत्वपूर्ण बैठक निर्धारित है। बैठक में एसआईआर विवाद पर संयुक्त रणनीति तैयार करने के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन और जनसभाओं की योजना पर चर्चा होगी। संसद में उनके विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव लाने की संभावना पर भी विचार-विमर्श की उम्मीद है।

यह बैठक कांग्रेस कार्यकारी समिति की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग करने और आयोग के कामकाज पर चिंता जताने वाला प्रस्ताव पारित करने के ठीक बाद बुलाई गई है।

कौन-कौन होंगे बैठक में शामिल

कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के शामिल होने की उम्मीद है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी, सांसद अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी और डेरेक ओ'ब्रायन के भी इसमें सम्मिलित होने की संभावना है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रमुख हेमंत सोरेन, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव, NCP-SP की सुप्रिया सुले, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी बैठक में भाग ले सकती हैं। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के वर्चुअली जुड़ने की संभावना है। वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के उपस्थित न होने की संभावना है — उनकी जगह वरिष्ठ नेता हरेंद्र मलिक पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे। वामपंथी दलों के नेताओं के भी बैठक में भाग लेने की उम्मीद है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह विवाद केवल प्रक्रियागत नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्था की स्वायत्तता और पारदर्शिता से जुड़े गहरे सवाल उठाता है। इंडिया ब्लॉक की बैठक से निकलने वाली रणनीति तय करेगी कि विपक्ष का यह अभियान संसद तक पहुँचेगा या सड़क पर। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और सरकार का रुख इस विवाद की दिशा निर्धारित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

आयोग का 'सर्वसम्मति से निर्णय' वाला बचाव इस सवाल का जवाब नहीं देता कि 14 दर्ज आपत्तियां किन विशिष्ट प्रक्रियाओं पर थीं और क्या उनका समाधान हुआ। असली जोखिम यह है कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता — जो लोकतंत्र की नींव है — पर जनता का भरोसा इस राजनीतिक खींचतान में कमज़ोर न हो जाए। महाभियोग की बात प्रतीकात्मक दबाव-राजनीति से अधिक कुछ नहीं लगती, जब तक संख्याबल साथ न हो।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन संशोधन) प्रक्रिया क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन संशोधन वह प्रक्रिया है जिसके ज़रिए भारतीय चुनाव आयोग मतदाता सूचियों को व्यापक रूप से अद्यतन और सत्यापित करता है। इसमें नए मतदाताओं को जोड़ना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं को हटाना और पतों की पुष्टि शामिल होती है।
चिदंबरम ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
चिदंबरम ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया में 'भारी खामियां' हैं और कर्नाटक, महाराष्ट्र व हरियाणा में इसमें गलतियां हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच 14 मुद्दों पर असहमति थी, इसलिए पूरी प्रक्रिया रद्द होनी चाहिए।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर अभ्यास पर अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग के अनुसार, आंतरिक स्तर पर जो टिप्पणियां दर्ज की गई थीं, वे उसकी सामान्य विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा थीं।
इंडिया ब्लॉक की बैठक में क्या तय होगा?
बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन, जनसभाओं और संभावित महाभियोग प्रस्ताव पर रणनीति तैयार होगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, हेमंत सोरेन और अन्य नेताओं के भाग लेने की उम्मीद है।
क्या चुनाव आयुक्तों के बीच वाकई मतभेद थे?
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में एसआईआर से जुड़े कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि, आयोग का कहना है कि ये असहमतियां विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा थीं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
राष्ट्र प्रेस
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