सीपीआई का सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन, एसआईआर रद्द करने और इस्तीफे की माँग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सदस्यों ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) को रद्द करने और ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा माँगा। यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों की ओर से भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का सिलसिला जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
सीपीआई नेता डी. राजा ने कहा कि पार्टी इंडिया गठबंधन के सहयोगियों तथा विभिन्न जन संगठनों और वर्ग-आधारित संगठनों के साथ मिलकर एसआईआर के विरुद्ध पूरे देश में अपना अभियान तेज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने को लेकर जो जायज चिंताएँ थीं, उन पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
राजा ने कहा, 'हमने राष्ट्रपति से संपर्क किया, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की — लेकिन कुछ नहीं हो रहा। इसलिए अब एकमात्र रास्ता यही है कि हम जनता के पास जाएँ, उन्हें एकजुट करें और अपने अभियान व संघर्ष को और तेज करें।' उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिक्रिया का इंतजार करती रहेगी।
13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप
डी. राजा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के अंतर्गत मतदाता सूची से कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग पर अपने संवैधानिक दायित्वों को निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया। गौरतलब है कि पार्टी ने इस मामले में भारत के राष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है।
सीपीआई की मुख्य माँगें
पार्टी के राष्ट्रीय सचिव गिरीश चंद्र शर्मा ने माँगों को दोहराते हुए कहा कि एसआईआर को तुरंत रद्द किया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाया जाए। उन्होंने कहा, 'किसानों, मज़दूरों, युवाओं, बेरोज़गारी, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ ये दो मुख्य माँगें हैं, जिनके कारण पूरे देश में असंतोष है।' शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि व्यापक जन-असंतोष के बावजूद ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया।
जन संगठनों की भागीदारी
शर्मा ने बताया कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन जैसे लोकतांत्रिक एवं वामपंथी संगठन एसआईआर के विरुद्ध प्रदर्शनों में निरंतर भाग ले रहे हैं। इस बीच, सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में 'फॉर्म 6' के उपयोग पर गंभीर चिंता जताई।
फॉर्म 6 विवाद
सांसद पी. संतोष कुमार ने तर्क दिया कि फॉर्म 6 के सभी कॉलम भरना अनिवार्य था, क्योंकि उनके बिना आवेदन प्रक्रिया आगे ही नहीं बढ़ सकती थी। उन्होंने कहा, 'भले ही यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया हो या बहुमत से, इससे 'निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960' के उल्लंघन का आरोप नहीं बदल जाता।' आलोचकों का कहना है कि एसआईआर की यह पूरी प्रक्रिया मतदाता सूचियों की शुद्धता के नाम पर वंचित वर्गों के मतदाताओं को बाहर करने का जरिया बन रही है — हालाँकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। आने वाले दिनों में सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिक्रिया और राजनीतिक दलों का रुख इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।