27 अक्टूबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की मेडिकल पैरोल बढ़ाने से इनकार किया, मंगलवार शाम 5 बजे तक आत्मसमर्पण का निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की मेडिकल पैरोल बढ़ाने से इनकार किया, मंगलवार शाम 5 बजे तक आत्मसमर्पण का निर्देश

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने आसाराम की मेडिकल पैरोल बढ़ाने से इनकार कर उन्हें मंगलवार शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में आत्मसमर्पण का निर्देश दिया। 2013 के नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास काट रहे आसाराम की दोषसिद्धि पर अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर 2026 को आसाराम की मेडिकल पैरोल विस्तार याचिका खारिज की।
आसाराम को मंगलवार शाम 5 बजे तक जोधपुर केंद्रीय जेल में आत्मसमर्पण करना होगा।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने 6 अक्टूबर को 20 दिन की पैरोल दी थी; आसाराम उज्जैन के सरकारी धनवंतरी आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज करा रहे थे।
राजस्थान सरकार को निर्देश दिया गया कि जेल में आसाराम की चिकित्सा ज़रूरतें पूरी हों।
दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील पर सुनवाई 6 नवंबर , दोपहर 2 बजे निर्धारित।
गुजरात उच्च न्यायालय पहले ही अंतरिम जमानत नामंजूर कर चुका है; गुजरात के सूरत मामले में भी दोषसिद्ध हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर 2026 को स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की मेडिकल पैरोल विस्तार की याचिका खारिज करते हुए उन्हें मंगलवार शाम 5 बजे तक आत्मसमर्पण करने का स्पष्ट निर्देश दिया। आसाराम राजस्थान के 2013 के नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में जोधपुर केंद्रीय जेल में आजीवन कारावास की सज़ा भुगत रहे हैं।

पैरोल का पूरा घटनाक्रम

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 6 अक्टूबर को आसाराम को 20 दिन की मेडिकल पैरोल मंजूर की थी, जिसकी अवधि 27 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी। इस दौरान वे मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सरकारी धनवंतरी आयुर्वेदिक अस्पताल में उपचाराधीन थे।

उनके अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी कि इलाज अभी जारी है और चिकित्सकीय आधार पर अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। न्यायालय ने यह अपील अस्वीकार कर दी।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश

पैरोल विस्तार नामंजूर करते हुए न्यायालय ने राजस्थान सरकार को यह भी निर्देश दिया कि जोधपुर जेल में आसाराम की चिकित्सा संबंधी ज़रूरतों का पर्याप्त ख़याल रखा जाए। न्यायालय ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देशित किया कि वह 2013 के जोधपुर मामले के निचली अदालत के रिकॉर्ड — भौतिक और डिजिटल, दोनों रूपों में — मँगाए।

दोषसिद्धि के विरुद्ध आसाराम की अपील पर अगली सुनवाई 6 नवंबर को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है।

गुजरात मामले में भी राहत नहीं

इससे पहले गुजरात उच्च न्यायालय ने भी आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपनी 83 वर्षीय पत्नी से मिलने के लिए मानवीय आधार पर 20 दिन की अस्थायी रिहाई माँगी थी। उनकी पत्नी उस समय अस्पताल में भर्ती थीं। अदालत ने जमानत तो नहीं दी, लेकिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये मुलाकात की अनुमति अवश्य प्रदान की।

गौरतलब है कि सूरत स्थित आश्रम में एक महिला शिष्या के साथ कई बार बलात्कार करने के आरोप में गुजरात की निचली अदालत ने भी आसाराम को दोषी ठहराया था। इस प्रकार वे दो अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों में दोषसिद्ध हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

आसाराम पर 2013 में जोधपुर के एक आश्रम में नाबालिग के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। जोधपुर की अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं और विभिन्न अदालतों में पैरोल व जमानत की अर्जियाँ देते रहे हैं, जो अब तक अधिकांशतः अस्वीकार होती रही हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब उच्च-प्रोफाइल धार्मिक-सामाजिक हस्तियों से जुड़े यौन अपराध मामलों में न्यायिक सख्ती को लेकर देशव्यापी चर्चा जारी है। 6 नवंबर की सुनवाई में दोषसिद्धि की वैधता को चुनौती दी जाएगी, जो मामले की दिशा तय करने वाली हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी कई वर्षों में कई बार अंतरिम राहत की कोशिश हुई है। असली परीक्षा अब 6 नवंबर की सुनवाई है, जब दोषसिद्धि की वैधता को चुनौती दी जाएगी; उस सुनवाई का परिणाम मामले की दिशा अंतिम रूप से तय करेगा। जब तक वह फैसला नहीं आता, बार-बार की पैरोल याचिकाएँ न्यायिक समय के दुरुपयोग की तरह दिखती हैं।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की पैरोल याचिका क्यों खारिज की?
सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि पैरोल की अवधि 27 अक्टूबर को ही समाप्त हो चुकी थी और मेडिकल आधार पर विस्तार देने का कोई पर्याप्त कारण नहीं था। न्यायालय ने उन्हें उसी दिन शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में आत्मसमर्पण का निर्देश दिया।
आसाराम किस मामले में जेल में हैं?
आसाराम 2013 में राजस्थान के जोधपुर में एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में दोषसिद्ध हैं और जोधपुर केंद्रीय जेल में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे हैं। गुजरात के सूरत स्थित आश्रम में एक महिला शिष्या के साथ बलात्कार के मामले में भी गुजरात की निचली अदालत उन्हें दोषी ठहरा चुकी है।
आसाराम की दोषसिद्धि पर अगली सुनवाई कब है?
सर्वोच्च न्यायालय ने आसाराम की दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील पर अगली सुनवाई 6 नवंबर को दोपहर 2 बजे निर्धारित की है। इस सुनवाई के लिए न्यायालय ने निचली अदालत के भौतिक और डिजिटल रिकॉर्ड भी मँगाए हैं।
आसाराम को इस बार पैरोल क्यों मिली थी और वे कहाँ थे?
राजस्थान उच्च न्यायालय ने 6 अक्टूबर को मेडिकल आधार पर 20 दिन की पैरोल दी थी। इस दौरान आसाराम मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सरकारी धनवंतरी आयुर्वेदिक अस्पताल में उपचाराधीन थे।
क्या गुजरात में भी आसाराम को राहत मिली थी?
नहीं। गुजरात उच्च न्यायालय ने आसाराम की वह याचिका खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने अपनी 83 वर्षीय पत्नी से मिलने के लिए मानवीय आधार पर 20 दिन की अंतरिम जमानत माँगी थी। अदालत ने केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मुलाकात की अनुमति दी।
राष्ट्र प्रेस
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