आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से 21 जुलाई तक मांगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 17 जुलाई को दोषसिद्ध स्वयंभू संत आसाराम बापू की स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत की याचिका पर राजस्थान सरकार से जवाब तलब किया और निर्देश दिया कि राज्य सरकार आसाराम की मेडिकल रिपोर्ट की जांच कर 21 जुलाई तक अदालत को बताए कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति अंतरिम जमानत के योग्य है या नहीं। यह मामला 2013 के नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें आसाराम उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ आसाराम की उस विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई कर रही है, जो राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ के 27 मई के फैसले को चुनौती देती है। उस फैसले में हाईकोर्ट ने 2013 के नाबालिग दुष्कर्म मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। इसी याचिका के साथ आसाराम ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर अंतरिम जमानत की भी माँग की है।
गौरतलब है कि जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने 2018 में आसाराम को अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, वे गुजरात में अपनी एक महिला शिष्या के साथ यौन उत्पीड़न के एक अलग मामले में भी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
सरकार और बचाव पक्ष के तर्क
राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आसाराम फिलहाल स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि करीब तीन महीने पहले आसाराम अयोध्या और काशी विश्वनाथ मंदिर गए थे, जहाँ उन्होंने पैदल भ्रमण भी किया था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आसाराम को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पाचन तंत्र) संबंधी समस्या के कारण रक्तस्राव की शिकायत है, जो अभी अस्थायी प्रतीत होती है और उनका इलाज जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार संबंधित अधिकारियों से ताजा निर्देश लेकर अपना पक्ष अदालत के सामने रखेगी।
दूसरी ओर, आसाराम के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर है और वे अभी भी उच्च जोखिम में हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, "यदि उनकी हालत इतनी गंभीर नहीं है तो बात अलग है, लेकिन यदि स्थिति गंभीर हुई तो हम नहीं चाहते कि बाद में किसी पर आरोप लगे।" अदालत ने स्पष्ट किया कि वह पहले राज्य सरकार की मेडिकल रिपोर्ट पर आधारित राय का इंतजार करेगी। यदि स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में गंभीर पाई जाती है, तो केवल इलाज के उद्देश्य से सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत पर विचार किया जा सकता है।
आत्मसमर्पण और पूर्व स्थिति
हाईकोर्ट के 27 मई के फैसले के बाद अंतरिम मेडिकल जमानत पर बाहर चल रहे आसाराम ने 28 मई को जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण कर दिया था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी सर्वोच्च न्यायालय ने एसएलपी पर नोटिस जारी करते हुए अंतरिम मेडिकल जमानत देने से इनकार किया था और कहा था कि पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाएगा।
आगे की सुनवाई
सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान सरकार को 21 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई भी उसी दिन निर्धारित की है। अब यह देखना होगा कि सरकार की मेडिकल रिपोर्ट क्या कहती है और अदालत उस आधार पर जमानत अर्जी पर क्या रुख अपनाती है।