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आसाराम फिर जोधपुर के आरोग्यम अस्पताल में भर्ती, सेंट्रल जेल से कड़ी सुरक्षा में लाया गया

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आसाराम फिर जोधपुर के आरोग्यम अस्पताल में भर्ती, सेंट्रल जेल से कड़ी सुरक्षा में लाया गया

सारांश

नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को एक बार फिर जोधपुर सेंट्रल जेल से आरोग्यम अस्पताल भेजा गया है। हाईकोर्ट से सजा बरकरार रहने के बाद 28 मई को सरेंडर करने वाले आसाराम ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इलाज की अनुमति माँगी थी।

मुख्य बातें

आसाराम को जोधपुर सेंट्रल जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच आरोग्यम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी थी।
आसाराम ने 28 मई को जोधपुर पहुँचकर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण किया था।
नाबालिग से यौन उत्पीड़न का मामला अगस्त 2013 का है; अप्रैल 2018 में निचली अदालत ने आजीवन कारावास सुनाया।
हाईकोर्ट ने कहा — पीड़िता का मानसिक आघात किसी सीमा में नहीं बंध सकता।

नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम को एक बार फिर जोधपुर के आरोग्यम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसे जोधपुर सेंट्रल जेल से कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच मंगलवार रात अस्पताल लाया गया, जहाँ चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

मुख्य घटनाक्रम

अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि आसाराम को मंगलवार रात एम्बुलेंस से अस्पताल लाया गया। स्थानांतरण के दौरान पुलिस का बड़ा दस्ता तैनात रहा और पूरे रास्ते कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई।

रिपोर्टों के अनुसार, जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करने के बाद आसाराम ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें आरोग्यम अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति माँगी गई थी। यह मामला हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया।

हाईकोर्ट का फैसला और सरेंडर

राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद आसाराम 28 मई को जोधपुर पहुँचा था। उसके आगमन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में समर्थक जोधपुर एयरपोर्ट पर एकत्र हो गए थे। एयरपोर्ट से वह सीधे पाल गाँव स्थित अपने आश्रम पहुँचा, जिसके बाद एम्स जोधपुर में उसकी मेडिकल जाँच कराई गई। इसके बाद उसने जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण कर दिया।

इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच — जिसमें जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे — ने निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि आसाराम को शेष जीवन जेल में ही बिताना होगा।

अदालत की तीखी टिप्पणी

अपनी टिप्पणी में अदालत ने कहा कि सजा भले ही जेल की चारदीवारी तक सीमित हो, लेकिन पीड़िता को पहुँचा मानसिक आघात और जीवनभर का दर्द किसी सीमा में नहीं बंध सकता। इस आदेश के साथ ही अदालत ने आसाराम की अंतरिम जमानत रद्द करते हुए तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि अगस्त 2013 में जोधपुर स्थित आश्रम के भीतर एक झोपड़ी में एक नाबालिग छात्रा से यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। लंबी सुनवाई के बाद अप्रैल 2018 में निचली अदालत ने आसाराम को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तब से वह जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है, हालाँकि स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर वह कई बार अस्पताल में भर्ती हो चुका है।

आगे क्या

चिकित्सकों की रिपोर्ट के आधार पर ही आसाराम के अस्पताल में रहने की अवधि तय की जाएगी। अस्पताल परिसर के बाहर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ अब सजा के मानवीय आयाम पर पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण उभर रहा है। असली परीक्षा यह है कि चिकित्सकीय आधार पर मिलने वाली राहत कितनी पारदर्शी और सत्यापन-योग्य रहती है। 2013 से चल रहे इस मामले में हर नया घटनाक्रम न्याय व्यवस्था की निरंतरता की कसौटी है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आसाराम को अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया?
आसाराम को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते जोधपुर सेंट्रल जेल से आरोग्यम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसे मंगलवार रात कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच एम्बुलेंस से लाया गया और चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम के मामले में क्या फैसला दिया था?
राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे, ने निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आसाराम को शेष जीवन जेल में ही बिताना होगा और उसकी अंतरिम जमानत रद्द कर दी।
आसाराम का मूल मामला क्या है?
अगस्त 2013 में जोधपुर के आश्रम परिसर में एक नाबालिग छात्रा से यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। अप्रैल 2018 में निचली अदालत ने आसाराम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
आसाराम ने जेल में आत्मसमर्पण कब किया?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद आसाराम 28 मई को जोधपुर पहुँचा था। एयरपोर्ट से वह सीधे पाल गाँव स्थित अपने आश्रम गया, फिर एम्स जोधपुर में मेडिकल जाँच के बाद उसने जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण कर दिया।
क्या आसाराम पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुका है?
हाँ, सजा सुनाए जाने के बाद से आसाराम कई बार स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर अस्पताल में भर्ती हो चुका है। मौजूदा भर्ती भी उसी क्रम में है, जिसकी अनुमति उसने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर माँगी थी।
राष्ट्र प्रेस
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