6 अगस्त 2026
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आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, खराब सेहत के बावजूद अंतरिम जमानत याचिका पर कोई आदेश नहीं

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आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, खराब सेहत के बावजूद अंतरिम जमानत याचिका पर कोई आदेश नहीं

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने आसाराम बापू की अंतरिम जमानत याचिका पर कोई आदेश नहीं दिया। एम्स ने अस्पताल में भर्ती की ज़रूरत नहीं बताई, लेकिन 24 घंटे निगरानी की सिफारिश की। याचिका लंबित रहेगी; हालत बिगड़ने पर दोबारा आवेदन का रास्ता खुला।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 6 अगस्त को आसाराम बापू की अंतरिम जमानत याचिका पर कोई आदेश देने से इनकार किया।
एम्स की रिपोर्ट में आसाराम को अभी अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत नहीं, लेकिन 24 घंटे निगरानी की सिफारिश।
राजस्थान उच्च न्यायालय से आसाराम को 20 दिन की पैरोल मिली हुई है; सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की अलग माँग पर सरकार ने आपत्ति जताई।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि आसाराम तीन महीने पहले अयोध्या और काशी विश्वनाथ में पैदल दर्शन कर चुके हैं।
याचिका खारिज नहीं, रिकॉर्ड पर लंबित; स्वास्थ्य बिगड़ने पर पुनः आवेदन का विकल्प।

सर्वोच्च न्यायालय ने 6 अगस्त 2026 को जोधपुर नाबालिग दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम बापू की अंतरिम जमानत याचिका पर कोई आदेश देने से इनकार कर दिया। खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर दायर इस याचिका को कोर्ट ने फिलहाल लंबित रखा है और स्पष्ट किया कि यदि स्वास्थ्य स्थिति और अधिक बिगड़ती है तो पुनः आवेदन किया जा सकता है।

कोर्ट का रुख और मुख्य टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कहा कि अभी अंतरिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। कोर्ट ने यह भी कहा कि आसाराम की याचिका रिकॉर्ड पर बनी रहेगी और ज़रूरत पड़ने पर आगे सुनवाई की जा सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि आसाराम को अभी अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, हालाँकि उनके स्वास्थ्य पर 24 घंटे निगरानी रखने की सिफारिश की गई है।

राजस्थान सरकार की दलीलें

राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को अवगत कराया कि आसाराम ने राजस्थान उच्च न्यायालय से 20 दिन की पैरोल माँगी है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय में अंतरिम जमानत की माँग अलग से की गई — इस दोहरेपन को सरकार ने कोर्ट के सामने रखा। वर्तमान में आसाराम को राजस्थान उच्च न्यायालय से 20 दिन की पैरोल मिली हुई है।

मेहता ने यह भी बताया कि लगभग तीन महीने पहले आसाराम अयोध्या और काशी विश्वनाथ गए थे और वहाँ पैदल चलकर दर्शन किए थे, जो उनके 'गंभीर बीमारी' के दावे पर सवाल उठाता है।

पिछली सुनवाइयों का क्रम

17 जुलाई की सुनवाई में आसाराम की ओर से खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की माँग की गई थी। तब कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा कर बताए कि स्थिति वास्तव में गंभीर है या नहीं।

21 जुलाई की सुनवाई में कोर्ट ने राजस्थान सरकार से ताज़ा मेडिकल रिपोर्ट तलब की थी और कहा था कि यदि रिपोर्ट में हालत गंभीर साबित होती है तो केवल इलाज के उद्देश्य से सीमित अवधि की अंतरिम जमानत पर विचार किया जा सकता है। इसी के मद्देनज़र एम्स से विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट मँगाई गई थी।

एम्स रिपोर्ट का सार

एम्स ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि आसाराम को फिलहाल अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत नहीं है। हालाँकि, संस्थान ने उनके स्वास्थ्य पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने की अनुशंसा की है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इनकार किया।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज नहीं किया है — यह रिकॉर्ड पर बनी रहेगी। यदि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति में उल्लेखनीय गिरावट आती है, तो उनके वकील पुनः अंतरिम राहत के लिए आवेदन कर सकते हैं। गौरतलब है कि जोधपुर के इस मामले में आसाराम को 2023 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो कोर्ट के पास राहत देने का कोई ठोस आधार नहीं बचा। उल्लेखनीय है कि पैरोल और अंतरिम जमानत की एक साथ माँग — दो अलग-अलग अदालतों में — ने सरकार को प्रक्रियागत आपत्ति उठाने का मौका दिया, जो इस मामले में निर्णायक साबित हुई। यह प्रकरण यह भी रेखांकित करता है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में न्यायिक पारदर्शिता और मेडिकल सत्यापन की कितनी अहमियत है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की अंतरिम जमानत क्यों नहीं दी?
एम्स की मेडिकल रिपोर्ट में आसाराम को अभी अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत नहीं बताई गई, जिससे स्वास्थ्य आधार पर जमानत का दावा कमज़ोर पड़ गया। कोर्ट ने याचिका लंबित रखी है और कहा है कि हालत गंभीर होने पर दोबारा आवेदन किया जा सकता है।
एम्स की रिपोर्ट में आसाराम की सेहत के बारे में क्या कहा गया?
एम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आसाराम को फिलहाल अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उनके स्वास्थ्य पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जानी चाहिए।
आसाराम को किस मामले में सजा मिली है?
आसाराम को जोधपुर में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है और वे तब से न्यायिक हिरासत में हैं।
राजस्थान सरकार ने कोर्ट में क्या दलील दी?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि आसाराम ने राजस्थान उच्च न्यायालय से 20 दिन की पैरोल माँगी है और साथ ही सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की अलग माँग की — इस दोहरेपन पर सरकार ने आपत्ति जताई। मेहता ने यह भी कहा कि आसाराम तीन महीने पहले अयोध्या और काशी विश्वनाथ में पैदल दर्शन कर चुके हैं।
अब आसाराम की याचिका का क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज नहीं की है — यह रिकॉर्ड पर लंबित रहेगी। यदि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति में उल्लेखनीय गिरावट आती है, तो उनके वकील पुनः अंतरिम राहत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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