जयशंकर यूएनजीए के 81वें सत्र के लिए न्यूयॉर्क रवाना, ज्यूरिख में भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों पर हुई चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 21 सितंबर 2026 को ज्यूरिख एयरपोर्ट पहुँचे और वहाँ से न्यूयॉर्क के लिए रवाना होंगे, जहाँ वे संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के हाई-लेवल वीक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। 26 सितंबर 2026 को यूएनजीए के हाई-लेवल सेशन में उनका आधिकारिक संबोधन निर्धारित है।
ज्यूरिख में स्वागत और द्विपक्षीय चर्चा
स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन में भारत के राजदूत कुमार ने ज्यूरिख एयरपोर्ट पर विदेश मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान राजदूत ने जयशंकर को भारत, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन के बीच हाल में हुए घटनाक्रमों की विस्तृत जानकारी दी, जिसमें हाल की उच्च-स्तरीय यात्राएँ भी शामिल थीं।
स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'राजदूत कुमार ने यूएन महासभा-2026 में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का ज्यूरिख एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत किया। राजदूत कुमार ने विदेश मंत्री को भारत, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन के बीच उच्च-स्तरीय यात्राओं समेत हाल के घटनाक्रमों की जानकारी भी दी।'
विदेश मंत्रालय की आधिकारिक घोषणा
विदेश मंत्रालय ने यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा, 'विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के हाई-लेवल वीक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यूएनजीए के 81वें सत्र के हाई-लेवल सेशन में विदेश मंत्री का संबोधन 26 सितंबर को तय है।'
गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत-अमेरिका कूटनीतिक संबंध कई अहम मुद्दों पर केंद्रित हैं। यूएनजीए का वार्षिक हाई-लेवल सेशन दुनिया भर के नेताओं और विदेश मंत्रियों को एक मंच पर लाता है, जो भारत जैसे देशों के लिए बहुपक्षीय कूटनीति का एक अहम अवसर होता है।
भारत-अमेरिका संबंध और रूसी ऊर्जा का मुद्दा
यह दौरा ऐसे नाज़ुक कूटनीतिक माहौल में हो रहा है जब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने हाल ही में एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिला है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया है।
भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदता रहा है, जिससे यह नया कानून भारत के लिए सीधे प्रासंगिक हो जाता है। इस पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और बदलते बाज़ार के हालात को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा खरीदने की अपनी नीति जारी रखेगा।
यूएनजीए यात्रा का महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, इस माहौल में जयशंकर की न्यूयॉर्क यात्रा भारत को कई देशों के प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ बातचीत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीति में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला, रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भारत की स्वतंत्र विदेश नीति पर नज़रें टिकी हैं।
जयशंकर का 26 सितंबर 2026 का यूएनजीए संबोधन इन सभी मुद्दों पर भारत की आधिकारिक स्थिति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का अवसर होगा।