डब्बू मलिक और शंकर महादेवन की मुलाकात: 'हार्मनी' से अरमान तक, म्यूजिक का 'फुल सर्कल'
सारांश
मुख्य बातें
म्यूजिक कंपोजर और सिंगर डब्बू मलिक की हाल ही में दिग्गज गायक शंकर महादेवन से मुंबई में मुलाकात हुई, जिसने दोनों कलाकारों की दशकों पुरानी म्यूजिकल यादें एक बार फिर ताज़ा कर दीं। डब्बू मलिक ने इस मुलाकात को अपनी ज़िंदगी का 'फुल सर्कल' मोमेंट बताया, क्योंकि जो सफर कभी एक टीवी शो से शुरू हुआ था, वह अब अगली पीढ़ी तक पहुँच चुका है।
यादों का सिलसिला: 'हार्मनी' से शुरू हुई कहानी
डब्बू मलिक ने इंस्टाग्राम पर शंकर महादेवन के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'लाइफ एक फुल सर्कल की तरह है।' उन्होंने याद किया कि सोनी पर प्रसारित उनके पहले टेलीविजन शो 'हार्मनी' — जिसे उन्होंने स्वयं म्यूजिक डायरेक्ट और कॉन्सेप्ट किया था — में शंकर महादेवन सबसे अहम सिंगर के रूप में शामिल हुए थे और वह शंकर महादेवन का पहला टीवी परफॉर्मेंस भी था।
डब्बू मलिक के अनुसार, शंकर महादेवन ने उस शो में रफी साहब, लता जी और कई दिग्गजों के गाने गाए थे, जो उनकी यादों में आज भी बसे हुए हैं। उन्होंने लिखा, 'वो पल मेरी यादों में बसे हुए हैं।'
अरमान मलिक ने बंद किया 'फुल सर्कल'
इस मुलाकात को और भावनात्मक बनाने वाली बात यह रही कि हाल ही में डब्बू मलिक के बेटे अरमान मलिक ने शंकर महादेवन के साथ एक जॉइंट कॉन्सर्ट में स्टेज शेयर किया। डब्बू मलिक ने इसे 'फुल सर्कल' का सबसे ख़ूबसूरत पल बताया — जहाँ एक पीढ़ी की शुरुआत अगली पीढ़ी की उपलब्धि में जाकर मिल गई।
डब्बू मलिक ने लिखा, 'हमने ढेर सारी बातें कीं, अपनी ज़िंदगी का सफर शेयर किया और बात करके बहुत मज़ा आया।'
डब्बू मलिक: एक परिचय
डब्बू मलिक जाने-माने कंपोजर सरदार मलिक के बेटे और म्यूजिक कंपोजर अनु मलिक के भाई हैं। उन्होंने कंपोजर, सिंगर और एक्टर तीनों भूमिकाओं में काम किया है। उनके म्यूजिक क्रेडिट्स में 'मैंने दिल तुझको दिया', 'तुमको ना भूल पाएंगे', 'हम तुम्हारे हैं सनम' और 'आई प्राउड टू बी एन इंडियन' जैसी फ़िल्में शामिल हैं।
वह सिंगर-सॉन्गराइटर अरमान मलिक और कंपोजर अमाल मलिक के पिता भी हैं — यानी उनका पूरा परिवार हिंदुस्तानी संगीत की दुनिया में एक अलग पहचान रखता है।
अरमान मलिक: नई पीढ़ी की आवाज़
अरमान मलिक ने अपने करियर की शुरुआत एक चाइल्ड वोकलिस्ट के रूप में की थी और आज वह भारत के सबसे चर्चित प्लेबैक सिंगर्स में गिने जाते हैं। उन्होंने हिंदी फ़िल्मों के अलावा कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में भी अपनी आवाज़ दी है।
डब्बू मलिक और शंकर महादेवन की यह मुलाकात महज़ दो कलाकारों का मिलन नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती विरासत का प्रतीक है — और यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।