आशुतोष महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

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आशुतोष महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

सारांश

आशुतोष महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह मामला यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है।

Key Takeaways

  • आशुतोष महाराज ने हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी है।
  • उन्हें सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
  • मामला पॉक्सो अधिनियम के तहत है।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दी थी।
  • न्यायालय ने मीडिया साक्षात्कार पर भी रोक लगाई है।

नई दिल्ली, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को यौन उत्पीड़न के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली है। लेकिन, आशुतोष महाराज ने हाईकोर्ट के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। उन्होंने इस संदर्भ में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की है।

मामले से संबंधित आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, आरोपियों को प्रदान की गई जमानत को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की गई है।

इस याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें प्रयागराज के झूंसी पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के प्रावधानों के तहत दर्ज एक मामले में हिंदू संत और उनके सह-आरोपियों को अग्रिम जमानत दी गई थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 मार्च के अपने आदेश में कहा था कि तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत देने का मामला बनता है।

न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल-न्यायाधीश पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में आरोपियों को ₹50,000 के निजी मुचलके और दो जमानती पेश करने पर अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए, जिसमें जांच में सहयोग और गवाहों को प्रभावित न करना जैसी शर्तें शामिल हैं।

राहत आदेश में अभियोजन पक्ष के मामले में कई विसंगतियां दर्ज की गई थीं, जिनमें शिकायत दर्ज करने में देरी और घटनास्थल और समय के संबंध में कथित पीड़ितों के बयानों में विरोधाभास शामिल हैं।

न्यायालय ने कहा कि पीड़ितों का अभिभावक होने का दावा करने वाले प्रथम सूचनादाता को कथित अपराध की सूचना 18 जनवरी, 2026 को मिली थी, लेकिन उसने पूजा/यज्ञ में व्यस्त होने का हवाला देते हुए छह दिन की देरी से पुलिस को सूचना दी।

महत्वपूर्ण यह है कि न्यायमूर्ति सिन्हा ने जांच और मुकदमे की सुनवाई के दौरान आवेदकों, पीड़ितों और प्रथम शिकायतकर्ता को मीडिया साक्षात्कार देने से भी रोक दिया था।

यह मामला आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर शिकायत के आधार पर पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों से संबंधित है, जिसके बाद इस वर्ष फरवरी में एक विशेष पॉक्सो अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

इससे पहले, 27 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी और उन्हें चल रही जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।

Point of View

जहां एक तरफ हिंदू संत हैं और दूसरी तरफ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप। न्याय प्रणाली की भूमिका और इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। यह घटना न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी इसे देखना आवश्यक है।
NationPress
26/03/2026

Frequently Asked Questions

आशुतोष महाराज ने सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिका दायर की?
आशुतोष महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या निर्णय दिया था?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों को अग्रिम जमानत देने का निर्णय दिया था, जिसके खिलाफ आशुतोष महाराज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
इस मामले में क्या आरोप हैं?
यह मामला पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों से जुड़ा है।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने पहले कोई आदेश दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस मामले में कोई आदेश नहीं दिया है, याचिका की सुनवाई की जानी है।
क्या आशुतोष महाराज ने कोई अन्य कानूनी कदम उठाया है?
हां, उन्होंने इस मामले में उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
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