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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी से दी बड़ी राहत

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी से दी बड़ी राहत

सारांश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को यौन उत्पीड़न मामले में गिरफ्तारी से राहत दी। जानें, मामले की पूरी जानकारी और अदालत के निर्देश।

मुख्य बातें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी को गिरफ्तारी से राहत दी।
अगली सुनवाई में मामले पर विस्तृत बहस होगी।
स्वामी ने न्यायपालिका पर भरोसा जताया है।
मामला पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज है।
बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताया है।

प्रयागराज, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को एक यौन उत्पीड़न मामले में महत्वपूर्ण राहत प्रदान करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। अदालत ने यह निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 24 फरवरी को जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को पॉक्सो मामले की गंभीरता से अवगत कराया और कहा कि याचिकाकर्ता को पहले निचली अदालत का रुख करना चाहिए था। वहीं, स्वामी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि यह पूरा मामला साजिश के तहत दायर किया गया है और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

बचाव पक्ष ने बताया कि आरोप निराधार हैं और जांच में सच्चाई सामने आएगी। यह मामला आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर अर्जी के बाद दर्ज किया गया। जिला अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ नाबालिगों से दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। प्रकरण पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज है और विशेष न्यायाधीश की अदालत के आदेश के अनुसार कार्रवाई की गई।

सुनवाई से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और “झूठ की उम्र लंबी नहीं होती।” उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो नार्को टेस्ट सहित हर प्रकार की जांच के लिए वे तैयार हैं।

इसी बीच, स्वामी पक्ष के अधिवक्ता को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने आरोपी अजीत कुमार सरोज को वाराणसी के जंसा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपी विधि का छात्र है और प्रारंभिक पूछताछ में उसने बताया कि उसने पड़ोसी को फंसाने के उद्देश्य से धमकी भरा संदेश भेजा था।

यह ध्यान देने योग्य है कि नाबालिगों के साथ कथित यौन शोषण के मामले में दर्ज एफआईआर के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके एक शिष्य ने अग्रिम जमानत की अर्जी दायर की थी। यह मामला अदालत में सूचीबद्ध है और अगली सुनवाई के दौरान विस्तृत बहस होगी। आज अदालत के आदेश के बाद फिलहाल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी से राहत मिली है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत क्यों मिली?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाई है।
क्या मामला पॉक्सो अधिनियम के तहत है?
हाँ, यह मामला पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अगला कदम क्या होगा?
वह अगली सुनवाई की तारीख का इंतजार कर रहे हैं और मामले में सच्चाई सामने लाने के लिए तैयार हैं।
क्या स्वामी ने मीडिया से क्या कहा?
स्वामी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे हर प्रकार की जांच के लिए तैयार हैं।
क्या याचिका में क्या आरोप लगे हैं?
स्वामी पर नाबालिगों के साथ दुष्कर्म के आरोप लगे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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