स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक: समर्थकों में जश्न, 'सत्य की जीत' का जश्न मनाया गया
सारांश
Key Takeaways
- अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को उच्च न्यायालय से राहत मिली।
- समर्थकों ने इसे न्याय की जीत माना।
- सत्य की हमेशा विजय होती है।
- यह फैसला पोस्को के मामलों में एक मिसाल है।
- समाज में न्याय के प्रति विश्वास को मजबूती मिली।
वाराणसी, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। यौन उत्पीड़न के मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
इस निर्णय के बाद, अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके समर्थकों ने इसे न्याय की जीत माना है। अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि सत्य की जीत हमेशा होती है।
गिरफ्तारी पर रोक लगने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है। इस फैसले पर अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'विरोधियों पर ध्यान न दें। झूठ हमेशा पराजित होता है और सत्य की जीत हमेशा से होती रही है। जो भी विजय प्राप्त करना चाहता है, उसे इस सिद्धांत को अपनाना चाहिए कि मैं सत्य के साथ खड़ा रहूंगा। अंततः, विजय उसी की होगी।'
उन्होंने यह भी बताया कि वे आगे भी गौ सेवा के कार्यों में संलग्न रहेंगे।
अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थक राजन प्रसाद मिश्रा ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा, 'हमारे लिए यह एक बड़ी खुशी का विषय है। इसके लिए हम अदालत का दिल से धन्यवाद करते हैं। आज के फैसले के बाद आम जनता का भी अदालत और न्याय दोनों पर विश्वास बढ़ा है।'
एक अन्य समर्थक ने कहा, 'कोर्ट में लिखा होता है, 'सत्यमेव जयते', जिसका अर्थ है, सत्य की जीत होना। हमारे साथ भी यही हुआ है, सत्य की जीत हुई है और असत्य हार गया है। न्यायालय का यह फैसला साधारण नहीं है, क्योंकि पोस्को के मामले में ऐसा निर्णय पहली बार सुनाया गया है। भविष्य में वकील इसी मामले का उदाहरण पेश करेंगे।'
एक महिला समर्थक ने कहा कि आज का दिन सभी समर्थकों के लिए दीपावली के समान है, क्योंकि हर कोई दिल से खुश है। उन्होंने कहा, 'हमें पहले ही पता था कि फैसला हमारे पक्ष में होगा और आज माननीय कोर्ट का फैसला सुनकर हम सभी बहुत खुश हैं।' महिला समर्थक ने कहा कि फैसला आने के बाद से ही उत्सव का माहौल है और बैंड-बाजे के साथ उत्सव मनाने की तैयारियाँ चल रही हैं।