क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य मामले में विपक्ष के आरोप सही हैं?
सारांश
Key Takeaways
- राजनीतिक लाभ के लिए संतों का नाम लेना उचित नहीं है।
- उपमुख्यमंत्री ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सम्मान किया।
- गणतंत्र दिवस देश की एकता और स्वतंत्रता का प्रतीक है।
- बुंदेलखंड की संस्कृति को प्रदर्शित किया गया।
- संस्कृति और धर्म की रक्षा आवश्यक है।
प्रयागराज, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य मामले में विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का उत्तर देते हुए कहा कि जो लोग राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें कभी भी सफलता नहीं मिलेगी।
मीडिया से बातचीत में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग पूज्य शंकराचार्य के मामले में मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं, वे केवल राजनीतिक लाभ की आशा में ऐसा कर रहे हैं। ये लोग संतों, हिंदुओं, राम भक्तों और भारतीय संस्कृति के प्रति द्रोही हैं।
उन्होंने कहा कि ये लोग सोचते हैं कि इस मुद्दे को उठाकर उन्हें किसी प्रकार का राजनीतिक लाभ मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है। 2047 तक इनका कुछ भी प्राप्त करना संभव नहीं है।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम करता हूं और उनका सम्मान करता हूं। मैंने लगातार प्रार्थना की है कि वे संगम में पवित्र स्नान करें। भारतीय संस्कृति के अनुयायी भी इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि वे जल्द ही संगम में स्नान करें।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने लिखा कि मैं समस्त देशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। यह दिन हमारे संवैधानिक आदर्शों, सामाजिक समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का उत्सव है। इस पावन अवसर पर स्वतंत्रता के संघर्ष में बलिदान देने वाले सेनानियों और संविधान निर्माताओं को मैं नमन करता हूं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 77वें गणतंत्र दिवस पर उत्तर प्रदेश की झांकी ने बुंदेलखंड की शौर्यगाथा, संस्कृति और विकास को प्रदर्शित करते हुए पूरे देश के सामने ‘विरासत भी, विकास भी’ का संदेश प्रस्तुत किया।