30 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

धमतरी पॉक्सो केस: किशन यादव को 20 साल की सश्रम कारावास, अपर सत्र न्यायालय का कठोर फैसला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
धमतरी पॉक्सो केस: किशन यादव को 20 साल की सश्रम कारावास, अपर सत्र न्यायालय का कठोर फैसला

सारांश

छत्तीसगढ़ के धमतरी में अपर सत्र न्यायालय ने नाबालिग के यौन उत्पीड़न के दोषी किशन यादव को पॉक्सो की धारा 6 के तहत 20 वर्ष की सश्रम सजा सुनाई। सहायक उप निरीक्षक दुलाल नाथ की वैज्ञानिक विवेचना इस दोषसिद्धि की आधारशिला बनी।

मुख्य बातें

अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी), धमतरी ने 13 जुलाई 2026 को आरोपी किशन यादव को दोषी करार दिया।
पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹3,000 का अर्थदंड निर्धारित।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 332 के तहत अतिरिक्त 7 वर्ष का कारावास और ₹1,000 अर्थदंड ।
सहायक उप निरीक्षक दुलाल नाथ ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विवेचना की, जो दोषसिद्धि में निर्णायक रही।
धमतरी पुलिस ने महिला एवं बाल अपराधों में 'जीरो टॉलरेंस' नीति की पुष्टि की।

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) ने 13 जुलाई 2026 को एक गंभीर पॉक्सो प्रकरण में आरोपी किशन यादव को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। ग्राम पावद्वार, थाना सिहावा निवासी इस आरोपी पर नाबालिग को बहला-फुसलाकर यौन उत्पीड़न करने का आरोप था, जिसे पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना के आधार पर न्यायालय में सिद्ध किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायालय ने किशन यादव को भारतीय न्याय संहिता की धारा 332 एवं धारा 64(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी करार दिया। धारा 332 के अंतर्गत आरोपी को सात वर्ष का सश्रम कारावास और ₹1,000 का अर्थदंड दिया गया — अर्थदंड न चुकाने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, पॉक्सो की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास, ₹3,000 का अर्थदंड और अर्थदंड न चुकाने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास निर्धारित किया गया।

पुलिस विवेचना की भूमिका

इस मामले की जाँच सहायक उप निरीक्षक दुलाल नाथ ने की। उन्होंने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अनुसंधान किया और न्यायालय में साक्ष्यों की प्रभावी प्रस्तुति की, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी के विरुद्ध अपराध सिद्ध हो सका। धमतरी पुलिस ने बताया कि महिला एवं बाल अपराधों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष विवेचना की जा रही है।

सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया

धमतरी पुलिस ने इस फैसले को महिला एवं बाल सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड दिलाना सुनिश्चित करने के लिए साक्ष्य संकलन और न्यायालय में उनकी प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि सुदृढ़ विवेचना किस प्रकार न्याय दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

आम जनता और पीड़ित पर असर

पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दी गई 20 वर्ष की सजा इस कानून के अंतर्गत सबसे कठोर दंडों में से एक है। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराध के मामलों में न्यायपालिका और पुलिस मिलकर कठोर कार्रवाई करने में सक्षम हैं। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पॉक्सो मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी) की स्थापना की गई है।

आगे क्या

न्यायालय का यह फैसला 13 जुलाई 2026 को पारित हुआ और अब आरोपी किशन यादव को निर्धारित सजा काटनी होगी। धमतरी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों में इसी प्रकार की सक्रिय और वैज्ञानिक विवेचना जारी रहेगी, ताकि दोषियों को न्यायालय में दंडित कराया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी विचारणीय है कि देश भर में पॉक्सो के हजारों लंबित मामलों में से कितनों में ऐसी ही गुणवत्तापूर्ण जाँच हो पाती है। 'जीरो टॉलरेंस' की घोषणाएँ तब सार्थक होती हैं जब वे व्यवस्थागत सुधार में तब्दील हों, न केवल इकलौती सफलता की कहानी बनकर रह जाएँ।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धमतरी पॉक्सो केस में किसे और क्या सजा मिली?
ग्राम पावद्वार, थाना सिहावा निवासी किशन यादव को अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी), धमतरी ने 13 जुलाई 2026 को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹3,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त भारतीय न्याय संहिता की धारा 332 के तहत 7 वर्ष का अलग कारावास भी निर्धारित किया गया।
पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत क्या दंड का प्रावधान है?
पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 गंभीर यौन उत्पीड़न (aggravated penetrative sexual assault) के मामलों पर लागू होती है और इसमें न्यूनतम 20 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। यह कानून के सबसे कठोर प्रावधानों में से एक है, जो नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
इस मामले में पुलिस विवेचना कैसे की गई?
मामले की विवेचना सहायक उप निरीक्षक दुलाल नाथ ने की, जिन्होंने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अनुसंधान किया और न्यायालय में साक्ष्यों की प्रभावी प्रस्तुति की। इसी मजबूत विवेचना के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।
धमतरी पुलिस की महिला एवं बाल अपराधों पर क्या नीति है?
धमतरी पुलिस ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है, जिसके तहत महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों में त्वरित, निष्पक्ष और वैज्ञानिक विवेचना की जाती है। पुलिस का लक्ष्य है कि दोषियों को कानून के अनुसार कठोरतम दंड दिलाया जाए।
छत्तीसगढ़ में पॉक्सो मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट क्यों बनाई गई है?
नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सहित देश भर में फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी) स्थापित की गई हैं। इनका उद्देश्य पीड़ितों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचाना और दोषियों को शीघ्र दंडित करना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले