कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत का शोक: MEA सचिव सुधाकर दलेला पहुंचे दूतावास, रिजिजू ने दोहा में जताई संवेदना
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय के आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला ने बुधवार, 15 जुलाई को नई दिल्ली स्थित कतर दूतावास पहुँचकर कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत सरकार एवं भारतीय जनता की ओर से औपचारिक शोक संवेदनाएँ व्यक्त कीं। उन्होंने दूतावास में रखी शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए — जो भारत-कतर राजनयिक संबंधों की गहराई का प्रतीकात्मक संकेत है।
निधन और राष्ट्रीय शोक
कतर में 'फादर अमीर' के नाम से सम्मानित शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार को 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके सम्मान में भारत सरकार ने सोमवार को एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की, जिसके तहत राष्ट्रपति भवन सहित सभी सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहा। यह शोक-घोषणा किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के निधन पर भारत द्वारा दिए जाने वाले उच्चतम राजनयिक सम्मानों में से एक है।
रिजिजू की दोहा यात्रा
केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू मंगलवार को दोहा पहुँचे और कतर के वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से मुलाकात कर भारत की ओर से गहरी संवेदनाएँ प्रकट कीं। कतर स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि रिजिजू ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत संदेश भी अमीर शेख तमीम तक पहुँचाया।
PM मोदी का श्रद्धांजलि संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक्स पर लिखा, 'हम कतर के फादर अमीर, महामहिम शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं। उन्होंने कतर को विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। फरवरी 2024 में कतर यात्रा के दौरान उनसे मुलाकात का मुझे सम्मान प्राप्त हुआ था। मैं कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, शाही परिवार और कतर की जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।' मोदी ने उन्हें 'दूरदर्शी नेता' और 'भारत का सच्चा मित्र' बताया।
शेख हमद का शासनकाल और विरासत
शेख हमद बिन खलीफा अल थानी ने 1995 से 2013 तक कतर पर शासन किया। 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता अपने पुत्र शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंपी — अरब जगत में यह एक असामान्य और शांतिपूर्ण सत्ता-हस्तांतरण माना गया। उनके शासनकाल में कतर ने आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की और अरब तथा वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित की। भारत-कतर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में उनकी भूमिका को मोदी ने विशेष रूप से रेखांकित किया।
आगे की राजनयिक दिशा
इस शोक-श्रृंखला के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह कतर के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को उच्च प्राथमिकता देता है। गौरतलब है कि कतर में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं और दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार एवं कूटनीतिक सहयोग के गहरे सूत्र जुड़े हैं। आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संपर्क जारी रहने की संभावना है।