15 जुलाई 2026
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भारत-यूके एफटीए लागू: रत्न-आभूषण निर्यात में बड़ी उछाल की उम्मीद, 99% उत्पादों पर शुल्क शून्य

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भारत-यूके एफटीए लागू: रत्न-आभूषण निर्यात में बड़ी उछाल की उम्मीद, 99% उत्पादों पर शुल्क शून्य

सारांश

भारत-यूके एफटीए के लागू होते ही रत्न-आभूषण उद्योग को नई उड़ान मिलने की उम्मीद है — 99% उत्पादों पर शुल्क शून्य। साथ ही, NSE के साथ EGR एमओयू से देश में पड़े 7,000 टन निष्क्रिय सोने को निवेश योग्य संपत्ति में बदलने का रास्ता खुला है।

मुख्य बातें

भारत-यूके एफटीए के तहत 99 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त होगा, जिससे आभूषण, पॉलिश हीरे और लैब-ग्रोन डायमंड ज्वेलरी के निर्यात को सीधा लाभ मिलेगा।
IBJA अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के साथ भी एफटीए पर हस्ताक्षर हो रहे हैं, जो भारतीय बाज़ार के वैश्विक विस्तार का संकेत है।
ऑगमोंट एंटरप्राइजेज और NSE के बीच EGR के लिए एमओयू हस्ताक्षरित; न्यूनतम 10 मिलीग्राम सोने की खरीद और कम से कम 1 ग्राम की भौतिक डिलीवरी संभव होगी।
भारत में अनुमानित 30,000–35,000 टन सोने में से करीब 7,000 टन गोल्ड कॉइन और बार के रूप में निष्क्रिय पड़ा है; EGR इसे ब्याज-अर्जक संपत्ति में बदल सकती है।
EGR स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होने के बाद खरीद-बिक्री पर जीएसटी नहीं लगेगा; केवल भौतिक सोने की डिलीवरी पर जीएसटी देय होगा।
SEEPZ अधिकारियों की उपस्थिति दर्शाती है कि एफटीए का लाभ निर्यात-उन्मुख विशेष आर्थिक क्षेत्रों तक भी पहुंचेगा।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी ने 15 जुलाई 2026 को मुंबई में कहा कि भारत-यूनाइटेड किंगडम मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने से आभूषण, हीरे के आभूषण, प्रयोगशाला में निर्मित हीरे के आभूषण, पॉलिश किए गए हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। उनके अनुसार, यह समझौता इन उत्पादों पर टैरिफ का बोझ घटाकर ब्रिटिश बाज़ार तक भारतीय रत्न-आभूषण उद्योग की पहुँच को व्यापक बनाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

कोठारी ने कहा, 'हमारे आभूषणों का भारी निर्यात होगा — आभूषण, हीरे के आभूषण, प्रयोगशाला में निर्मित हीरे के आभूषण, पॉलिश किए हुए हीरे — ये सब अब ब्रिटेन को निर्यात किए जाएंगे। इससे पहले, कर की दरें काफी ऊंची थीं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब किसी भी देश के साथ द्विपक्षीय व्यापार संबंध स्थापित होते हैं, तो दोनों पक्षों को लाभ मिलता है। उनके अनुसार, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के साथ भी इसी तरह के एफटीए पर हस्ताक्षर हो रहे हैं, जो भारतीय बाज़ार के विस्तार का संकेत है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

जेम्स एंड ज्वैलरी मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष आदिल कोटवाल ने इस अवसर को भारत-ब्रिटेन साझेदारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते के तहत 99 प्रतिशत उत्पादों पर अब कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। गौरतलब है कि सांताक्रूज इलेक्ट्रॉनिक एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन (SEEPZ) के अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे, जो दर्शाता है कि यह समझौता निर्यात-उन्मुख विनिर्माण इकाइयों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट: सोने के कारोबार में नई क्रांति

ऑगमोंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के डायरेक्टर केतन कोठारी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के साथ इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) के लिए हुए एमओयू को ऐतिहासिक बताया। उनके अनुसार, यह एक स्ट्रैटेजिक टाई-अप है, जिसमें रिटेल और बी2बी ग्राहकों के लिए लिक्विडिटी, मूल्य निर्धारण, गोल्ड निर्माण, रिडेम्पशन और भौतिक डिलीवरी से जुड़ी सभी सुविधाएं एक मंच पर उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा, 'ईजीआर भारत में सोना खरीदने, रखने या ट्रेड करने का तरीका बदल देंगे, क्योंकि यह एक रेगुलेटेड प्रोडक्ट है।'

ईजीआर प्रणाली के तहत निवेशक न्यूनतम 10 मिलीग्राम सोना खरीद सकते हैं और कम से कम 1 ग्राम सोने की भौतिक डिलीवरी भी ले सकते हैं। प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य निर्धारण के चलते निवेशकों को बेहतर दर मिलने की उम्मीद है।

30,000-35,000 टन सोने की निष्क्रिय संपत्ति को सक्रिय करने का अवसर

केतन कोठारी ने बताया कि भारत में अनुमानित 30,000 से 35,000 टन सोना मौजूद है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इसका लगभग 20 प्रतिशत, यानी करीब 7,000 टन सोना, गोल्ड कॉइन और गोल्ड बार के रूप में लोगों के पास निष्क्रिय पड़ा है। ईजीआर प्रणाली के ज़रिए इस सोने को सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) प्लेटफॉर्म के माध्यम से ज्वेलरी निर्माताओं को उधार दिया जा सकेगा, जिससे निवेशकों को ब्याज मिलेगा — ठीक बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह। उन्होंने स्पष्ट किया कि आभूषण रखने वाले ग्राहकों को अपने गहने ईजीआर में बदलने की आवश्यकता नहीं होगी; यह व्यवस्था मुख्यतः निवेश के रूप में गोल्ड कॉइन या बार रखने वालों के लिए है।

जीएसटी और पारदर्शिता

जीएसटी के संदर्भ में केतन कोठारी ने बताया कि एक बार ईजीआर बनने और स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होने के बाद इसकी खरीद-बिक्री पर जीएसटी नहीं लगेगा, क्योंकि ईजीआर को एक सिक्योरिटी माना जाएगा। जीएसटी केवल तब देय होगा जब निवेशक ईजीआर को रिडीम कर वास्तविक सोने की डिलीवरी लेंगे। इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी स्पष्टता का मुद्दा भी लगभग सुलझ चुका है और इस दिशा में NSE के साथ मिलकर काम किया गया है। यह कदम भारत के सोने के आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में भी सहायक सिद्ध हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — विशेषकर जब SEEPZ जैसी इकाइयों को नई शुल्क-मुक्त व्यवस्था का वास्तविक लाभ मिलना शुरू हो। EGR की अवधारणा नवाचारी है, परंतु 7,000 टन निष्क्रिय सोने को वित्तीय प्रणाली में लाने की महत्वाकांक्षा तब तक कागज़ी रहेगी जब तक GST स्पष्टता और उपभोक्ता विश्वास दोनों एक साथ नहीं आते। उद्योग नेताओं का उत्साह स्वाभाविक है, किंतु आलोचकों का कहना है कि पिछले गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम जैसे प्रयोग भी इसी तरह की संभावनाओं के साथ आए थे और अपेक्षित पैमाने पर सफल नहीं हुए।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-यूके एफटीए से रत्न और आभूषण निर्यात को कैसे फायदा होगा?
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते के तहत 99 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त होगा, जिससे आभूषण, पॉलिश हीरे, लैब-ग्रोन डायमंड ज्वेलरी और अन्य कीमती पत्थरों पर टैरिफ का बोझ घटेगा। इससे ब्रिटिश बाज़ार में भारतीय उत्पाद सस्ते और प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) क्या है और यह कैसे काम करती है?
EGR एक रेगुलेटेड वित्तीय उत्पाद है जिसमें भौतिक सोने को स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड की जाने वाली सिक्योरिटी में बदला जाता है। निवेशक न्यूनतम 10 मिलीग्राम सोना EGR में परिवर्तित कर सकते हैं और कम से कम 1 ग्राम की भौतिक डिलीवरी भी ले सकते हैं; EGR की खरीद-बिक्री पर जीएसटी नहीं लगेगा, केवल भौतिक डिलीवरी पर देय होगा।
EGR से आम निवेशकों को क्या लाभ होगा?
जिन निवेशकों के पास गोल्ड कॉइन या बार हैं, वे इन्हें EGR में बदलकर SLB प्लेटफॉर्म के ज़रिए ज्वेलरी निर्माताओं को उधार दे सकते हैं और बदले में ब्याज कमा सकते हैं — ठीक बैंक एफडी की तरह। इससे निष्क्रिय पड़ा सोना आय का नया स्रोत बन सकता है।
क्या आभूषण पहनने वाले ग्राहकों को भी अपने गहने EGR में बदलने होंगे?
नहीं। ऑगमोंट के डायरेक्टर केतन कोठारी के अनुसार, यह व्यवस्था केवल उन लोगों के लिए है जिनके पास निवेश के रूप में गोल्ड कॉइन या बार हैं। आभूषण रखने वाले ग्राहकों को अपने गहने EGR में बदलने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
भारत में कितना सोना निष्क्रिय पड़ा है और EGR इसे कैसे उपयोगी बनाएगी?
विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, भारत में अनुमानित 30,000 से 35,000 टन सोना है, जिसमें से करीब 7,000 टन (लगभग 20 प्रतिशत) गोल्ड कॉइन और बार के रूप में निष्क्रिय पड़ा है। EGR के ज़रिए इसे ज्वेलरी निर्माताओं को उधार देकर निवेशक ब्याज कमा सकते हैं और देश के सोने के आयात पर निर्भरता भी घट सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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