15 जुलाई 2026
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उमर खालिद को अदालत की राहत: परिवार से सप्ताह में दो बार वीडियो कॉल की अनुमति बहाल

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उमर खालिद को अदालत की राहत: परिवार से सप्ताह में दो बार वीडियो कॉल की अनुमति बहाल

सारांश

दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने उमर खालिद को परिवार से सप्ताह में दो बार वीडियो कॉल की अनुमति बहाल की। मई 2026 में जेल प्रशासन ने यह सुविधा एक बार तक सीमित कर दी थी। छह वर्षों में कोई नियम उल्लंघन न होने के आधार पर अदालत ने यह राहत दी।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने 15 जुलाई 2026 को आदेश पारित किया।
उमर खालिद को माँ और परिवार से प्रति सप्ताह दो ई-मुलाकातों की अनुमति बहाल हुई।
मई 2026 में जेल प्रशासन ने सुविधा घटाकर सप्ताह में एक बार कर दी थी।
अदालत ने पाया कि खालिद ने छह वर्षों में दिल्ली जेल नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया।
इसी महीने उनकी और सह-आरोपी शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाएँ खारिज हो चुकी हैं।

कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने 15 जुलाई 2026 को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के बड़े षड्यंत्र मामले में विचाराधीन कैदी उमर खालिद को अपनी माँ और परिवार के अन्य सदस्यों से प्रति सप्ताह दो बार वीडियो कॉल (ई-मुलाकात) करने की अनुमति दे दी। अदालत ने पाया कि खालिद पिछले छह वर्षों से यह सुविधा नियमित रूप से प्राप्त कर रहे थे और इस दौरान उन्होंने दिल्ली जेल नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया।

मामले की पृष्ठभूमि

खालिद फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक बड़े षड्यंत्र मामले में सितंबर 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं। जेल में बंद होने के बाद से ही उन्हें प्रति सप्ताह दो ई-मुलाकातों की सुविधा मिल रही थी। हालाँकि, मई 2026 में जेल प्रशासन ने यह सुविधा घटाकर सप्ताह में एक बार कर दी, जिसके बाद खालिद ने अदालत में आवेदन दायर किया।

खालिद की दलील और जेल प्रशासन का रुख

खालिद की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि जेल के किसी भी नियम का उल्लंघन न करने के बावजूद उन पर यह प्रतिबंध लगाया गया, जो अनुचित है। दूसरी ओर, जेल अधिकारियों ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि लागू नियमों के अनुसार एक विचाराधीन कैदी को प्रति सप्ताह केवल एक ई-मुलाकात का अधिकार है, इसलिए पूर्व की दो-मुलाकात की प्रथा बंद की गई।

अदालत का आदेश

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि खालिद छह वर्षों से प्रति सप्ताह दो ई-मुलाकातों का लाभ उठा रहे हैं और इस पूरे अवधि में उन्होंने दिल्ली जेल नियमों के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि खालिद को उनकी माँ और परिवार के अन्य सदस्यों से बात करने के लिए प्रति सप्ताह दो ई-मुलाकातें दी जाएँ। आदेश की एक प्रति संबंधित केंद्रीय जेल के अधीक्षक को भी भेजी जाएगी।

जमानत याचिकाएँ पहले ही खारिज

गौरतलब है कि इसी महीने इसी अदालत ने खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाएँ यह कहते हुए खारिज कर दी थीं कि वह सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेश से बाध्य है, जिसमें उनकी जमानत याचिका पहले ही अस्वीकार की जा चुकी है और नई याचिकाएँ सुनवाई योग्य नहीं हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली दंगों का मुकदमा वर्षों से चल रहा है और विचाराधीन कैदियों के अधिकारों पर बहस जारी है।

आगे की राह

अदालत के इस आदेश के बाद खालिद को तत्काल प्रभाव से दो साप्ताहिक वीडियो कॉल की सुविधा मिलने की उम्मीद है। मुख्य षड्यंत्र मामले में सुनवाई जारी रहेगी, और उनकी जमानत का मसला अभी भी अनिर्णीत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है — क्या विचाराधीन कैदियों को वर्षों तक बिना दोषसिद्धि के उन सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है जो उन्हें पहले से मिल रही थीं? खालिद छह वर्षों से जेल में हैं, जमानत बार-बार खारिज हो चुकी है, और अब एक बुनियादी पारिवारिक संपर्क के लिए भी अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा। जेल प्रशासन का तर्क — कि नियम केवल एक साप्ताहिक मुलाकात की अनुमति देते हैं — तब कमज़ोर पड़ता है जब यह स्वीकार किया जाता है कि छह साल तक दो मुलाकातें दी जाती रहीं। यह मामला विचाराधीन कैदियों के अधिकारों और जेल प्रशासन की विवेकाधीन शक्तियों के बीच की खाई को उजागर करता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर खालिद को वीडियो कॉल की अनुमति क्यों देनी पड़ी?
खालिद को मई 2026 से साप्ताहिक दो ई-मुलाकातें घटाकर एक कर दी गई थीं। अदालत ने पाया कि उन्होंने छह वर्षों में कोई जेल नियम नहीं तोड़ा, इसलिए पूर्व सुविधा बहाल करने का आदेश दिया।
उमर खालिद किस मामले में जेल में हैं?
उमर खालिद फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े षड्यंत्र मामले में सितंबर 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला कड़कड़डूमा अदालत में विचाराधीन है।
उमर खालिद की जमानत याचिका का क्या हुआ?
इसी महीने कड़कड़डूमा अदालत ने खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाएँ खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेश से बाध्य है और नई याचिकाएँ सुनवाई योग्य नहीं हैं।
जेल प्रशासन ने वीडियो कॉल घटाने का क्या कारण बताया?
जेल अधिकारियों ने कहा कि लागू दिल्ली जेल नियमों के अनुसार एक विचाराधीन कैदी को प्रति सप्ताह केवल एक ई-मुलाकात का अधिकार है। इसी आधार पर मई 2026 में दो मुलाकातों की पूर्व प्रथा समाप्त की गई।
यह आदेश कब से प्रभावी होगा?
अदालत ने 15 जुलाई 2026 को आदेश पारित किया और संबंधित केंद्रीय जेल के अधीक्षक को आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया। इससे खालिद को तत्काल प्रभाव से दो साप्ताहिक वीडियो कॉल की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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