उमर खालिद को अदालत की राहत: परिवार से सप्ताह में दो बार वीडियो कॉल की अनुमति बहाल
सारांश
मुख्य बातें
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने 15 जुलाई 2026 को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के बड़े षड्यंत्र मामले में विचाराधीन कैदी उमर खालिद को अपनी माँ और परिवार के अन्य सदस्यों से प्रति सप्ताह दो बार वीडियो कॉल (ई-मुलाकात) करने की अनुमति दे दी। अदालत ने पाया कि खालिद पिछले छह वर्षों से यह सुविधा नियमित रूप से प्राप्त कर रहे थे और इस दौरान उन्होंने दिल्ली जेल नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया।
मामले की पृष्ठभूमि
खालिद फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक बड़े षड्यंत्र मामले में सितंबर 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं। जेल में बंद होने के बाद से ही उन्हें प्रति सप्ताह दो ई-मुलाकातों की सुविधा मिल रही थी। हालाँकि, मई 2026 में जेल प्रशासन ने यह सुविधा घटाकर सप्ताह में एक बार कर दी, जिसके बाद खालिद ने अदालत में आवेदन दायर किया।
खालिद की दलील और जेल प्रशासन का रुख
खालिद की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि जेल के किसी भी नियम का उल्लंघन न करने के बावजूद उन पर यह प्रतिबंध लगाया गया, जो अनुचित है। दूसरी ओर, जेल अधिकारियों ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि लागू नियमों के अनुसार एक विचाराधीन कैदी को प्रति सप्ताह केवल एक ई-मुलाकात का अधिकार है, इसलिए पूर्व की दो-मुलाकात की प्रथा बंद की गई।
अदालत का आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि खालिद छह वर्षों से प्रति सप्ताह दो ई-मुलाकातों का लाभ उठा रहे हैं और इस पूरे अवधि में उन्होंने दिल्ली जेल नियमों के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि खालिद को उनकी माँ और परिवार के अन्य सदस्यों से बात करने के लिए प्रति सप्ताह दो ई-मुलाकातें दी जाएँ। आदेश की एक प्रति संबंधित केंद्रीय जेल के अधीक्षक को भी भेजी जाएगी।
जमानत याचिकाएँ पहले ही खारिज
गौरतलब है कि इसी महीने इसी अदालत ने खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाएँ यह कहते हुए खारिज कर दी थीं कि वह सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेश से बाध्य है, जिसमें उनकी जमानत याचिका पहले ही अस्वीकार की जा चुकी है और नई याचिकाएँ सुनवाई योग्य नहीं हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली दंगों का मुकदमा वर्षों से चल रहा है और विचाराधीन कैदियों के अधिकारों पर बहस जारी है।
आगे की राह
अदालत के इस आदेश के बाद खालिद को तत्काल प्रभाव से दो साप्ताहिक वीडियो कॉल की सुविधा मिलने की उम्मीद है। मुख्य षड्यंत्र मामले में सुनवाई जारी रहेगी, और उनकी जमानत का मसला अभी भी अनिर्णीत है।