8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद को 1-3 जून तक अंतरिम जमानत दी, ₹1 लाख की शर्त

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद को 1-3 जून तक अंतरिम जमानत दी, ₹1 लाख की शर्त

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूएपीए के तहत बंद उमर खालिद को 1-3 जून 2025 तक सिर्फ तीन दिन की अंतरिम जमानत दी — बीमार माँ की देखभाल के लिए। कड़कड़डुमा कोर्ट की अस्वीकृति के बाद मिली यह राहत कई कड़ी शर्तों के साथ आई है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद को 1 जून से 3 जून 2025 तक तीन दिन की सशर्त अंतरिम जमानत दी।
सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने आदेश पारित किया।
खालिद को ₹1 लाख जमानत राशि जमा करनी होगी; दिल्ली-एनसीआर के बताए पते पर रहना अनिवार्य।
केवल माँ से मिलने अस्पताल जाने की अनुमति; केवल एक मोबाइल नंबर रखने की शर्त।
दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध किया; ASG एस.वी.
राजू ने सर्जरी को 'छोटी' बताया।
खालिद सितंबर 2020 से यूएपीए के तहत न्यायिक हिरासत में हैं; अब तक नियमित जमानत नहीं मिली।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 मई 2025 को 2020 के दिल्ली दंगा मामले में गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत विचाराधीन कैदी उमर खालिद को 1 जून से 3 जून 2025 तक तीन दिनों की सशर्त अंतरिम जमानत प्रदान की। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें खालिद ने दिल्ली की कड़कड़डुमा कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने उनकी अंतरिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।

जमानत की शर्तें

हाईकोर्ट ने जमानत के साथ कई कड़ी शर्तें लगाई हैं। खालिद को दिल्ली-एनसीआर में अपने बताए गए पते पर ही रहना होगा। वह केवल अपनी बीमार माँ से मिलने के लिए अस्पताल जा सकते हैं — इसके अलावा किसी अन्य स्थान पर जाने की अनुमति नहीं होगी।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि खालिद के पास केवल एक मोबाइल नंबर होना चाहिए और उन्हें ₹1 लाख की जमानत राशि जमा करनी होगी।

दिल्ली पुलिस का विरोध

दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में खालिद की जमानत का विरोध किया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने दलील दी कि प्रस्तावित सर्जरी छोटी है और सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो खालिद को पुलिस सुरक्षा के साथ अस्पताल जाने की इजाजत दी जा सकती है।

जमानत माँगने का कारण

खालिद ने मूल रूप से 15 दिनों की अंतरिम जमानत माँगी थी — अपनी बीमार माँ की सर्जरी के दौरान उनकी देखभाल करने और अपने चाचा के चेहलुम समारोह में शामिल होने के लिए, जिनका पिछले महीने निधन हो गया था। कोर्ट ने 15 दिन की जगह केवल तीन दिन की जमानत स्वीकृत की।

मामले की पृष्ठभूमि

उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आपराधिक साजिश, दंगा भड़काने, गैर-कानूनी जमावड़े और यूएपीए के तहत कई गंभीर आरोप हैं। गौरतलब है कि उन्हें इस मामले में अब तक नियमित जमानत नहीं मिली है, हालाँकि इससे पहले भी उन्हें अंतरिम जमानत मिल चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब यूएपीए के तहत लंबे समय तक विचाराधीन कैद की संवैधानिकता पर न्यायिक और नागरिक समाज दोनों स्तरों पर बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि गुण-दोष के आधार पर, जो यूएपीए की उस संरचनात्मक समस्या को रेखांकित करती है जिसमें जमानत की कठोर शर्तें विचाराधीन कैद को वर्षों तक खींच सकती हैं। दिल्ली पुलिस का यह तर्क कि सर्जरी 'छोटी' है, न्यायिक दृष्टि से कमज़ोर साबित हुआ। असली सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक बिना नियमित जमानत के कैद रखना क्या न्यायिक प्रक्रिया की मूल भावना के अनुरूप है — यह प्रश्न अब भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद को जमानत क्यों दी?
दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद को उनकी बीमार माँ की सर्जरी के दौरान देखभाल के लिए मानवीय आधार पर तीन दिन की अंतरिम जमानत दी। खालिद ने कड़कड़डुमा कोर्ट की अस्वीकृति को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
उमर खालिद की जमानत की शर्तें क्या हैं?
खालिद को दिल्ली-एनसीआर में बताए गए पते पर रहना होगा, ₹1 लाख जमानत राशि जमा करनी होगी, केवल एक मोबाइल नंबर रखना होगा, और वे केवल अपनी माँ से मिलने अस्पताल जा सकते हैं — अन्य कहीं नहीं।
उमर खालिद पर कौन-से आरोप हैं और वे कब से जेल में हैं?
उमर खालिद को सितंबर 2020 में 2020 के दिल्ली दंगा मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आपराधिक साजिश, दंगा भड़काने, गैर-कानूनी जमावड़े और यूएपीए के तहत कई गंभीर आरोप हैं। उन्हें अब तक नियमित जमानत नहीं मिली है।
दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध क्यों किया?
दिल्ली पुलिस की ओर से ASG एस.वी. राजू ने दलील दी कि प्रस्तावित सर्जरी छोटी है और यदि ज़रूरी हो तो खालिद को पुलिस सुरक्षा के साथ अस्पताल जाने की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने यह तर्क आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए 15 दिन की जगह केवल तीन दिन की जमानत दी।
कड़कड़डुमा कोर्ट ने पहले जमानत क्यों खारिज की थी?
दिल्ली की कड़कड़डुमा कोर्ट ने उमर खालिद की अंतरिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटते हुए सीमित अवधि की राहत दी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले