दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद को 1-3 जून तक अंतरिम जमानत दी, ₹1 लाख की शर्त
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 मई 2025 को 2020 के दिल्ली दंगा मामले में गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत विचाराधीन कैदी उमर खालिद को 1 जून से 3 जून 2025 तक तीन दिनों की सशर्त अंतरिम जमानत प्रदान की। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें खालिद ने दिल्ली की कड़कड़डुमा कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने उनकी अंतरिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
जमानत की शर्तें
हाईकोर्ट ने जमानत के साथ कई कड़ी शर्तें लगाई हैं। खालिद को दिल्ली-एनसीआर में अपने बताए गए पते पर ही रहना होगा। वह केवल अपनी बीमार माँ से मिलने के लिए अस्पताल जा सकते हैं — इसके अलावा किसी अन्य स्थान पर जाने की अनुमति नहीं होगी।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि खालिद के पास केवल एक मोबाइल नंबर होना चाहिए और उन्हें ₹1 लाख की जमानत राशि जमा करनी होगी।
दिल्ली पुलिस का विरोध
दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में खालिद की जमानत का विरोध किया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने दलील दी कि प्रस्तावित सर्जरी छोटी है और सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो खालिद को पुलिस सुरक्षा के साथ अस्पताल जाने की इजाजत दी जा सकती है।
जमानत माँगने का कारण
खालिद ने मूल रूप से 15 दिनों की अंतरिम जमानत माँगी थी — अपनी बीमार माँ की सर्जरी के दौरान उनकी देखभाल करने और अपने चाचा के चेहलुम समारोह में शामिल होने के लिए, जिनका पिछले महीने निधन हो गया था। कोर्ट ने 15 दिन की जगह केवल तीन दिन की जमानत स्वीकृत की।
मामले की पृष्ठभूमि
उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आपराधिक साजिश, दंगा भड़काने, गैर-कानूनी जमावड़े और यूएपीए के तहत कई गंभीर आरोप हैं। गौरतलब है कि उन्हें इस मामले में अब तक नियमित जमानत नहीं मिली है, हालाँकि इससे पहले भी उन्हें अंतरिम जमानत मिल चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब यूएपीए के तहत लंबे समय तक विचाराधीन कैद की संवैधानिकता पर न्यायिक और नागरिक समाज दोनों स्तरों पर बहस जारी है।