उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका खारिज, कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेहलुम और मां की सर्जरी के आधार नहीं माने पर्याप्त

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उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका खारिज, कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेहलुम और मां की सर्जरी के आधार नहीं माने पर्याप्त

सारांश

दिल्ली दंगा साजिश मामले में बंद उमर खालिद को एक बार फिर राहत नहीं मिली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेहलुम और माँ की सर्जरी को पर्याप्त आधार नहीं माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूर्व अनुपालन स्वतः जमानत का अधिकार नहीं देता — हर याचिका अपने तथ्यों पर परखी जाएगी।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 19 मई 2025 को उमर खालिद की 15 दिन की अंतरिम जमानत याचिका खारिज की।
याचिका के दो आधार थे — दिवंगत मामा का चेहलुम और बीमार माँ की सर्जरी के दौरान देखभाल।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि माँ की सर्जरी मामूली है, केवल लोकल एनेस्थीसिया की आवश्यकता है और परिवार के अन्य सदस्य देखभाल कर सकते हैं।
अदालत ने कहा कि पूर्व में शर्तों के पालन का अर्थ यह नहीं कि प्रत्येक नई याचिका स्वीकार की जाए।
उमर खालिद UAPA के तहत सितंबर 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं।

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 19 मई 2025 को 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। खालिद ने अपने दिवंगत मामा के चेहलुम में शामिल होने और बीमार माँ की सर्जरी के दौरान देखभाल के लिए 15 दिनों की राहत माँगी थी, जिसे अदालत ने अपर्याप्त आधार मानते हुए अस्वीकार कर दिया।

याचिका में क्या था आधार

उमर खालिद ने अदालत के समक्ष दो मुख्य कारण रखे। पहला, उनके दिवंगत मामा के चेहलुम की रस्म में शामिल होना; और दूसरा, परिवार में इकलौते बेटे के रूप में अपनी बीमार माँ की सर्जरी से पहले और बाद में देखभाल करना। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि उनके 71 वर्षीय पिता स्वयं माँ की देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं और चारों बहनें शादीशुदा होकर अलग-अलग स्थानों पर रहती हैं।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि उमर खालिद को पूर्व में कई बार अंतरिम जमानत मिल चुकी है और उन्होंने हर बार अदालत की सभी शर्तों का पालन करते हुए समय पर आत्मसमर्पण किया है। साथ ही, सह-आरोपियों तस्लीम अहमद, शिफा उर रहमान और अथर खान को पारिवारिक बीमारी जैसे आधारों पर अंतरिम जमानत दिए जाने का हवाला देते हुए समानता के सिद्धांत पर राहत की माँग की गई।

अभियोजन पक्ष की आपत्तियाँ

विशेष लोक अभियोजक ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी अदालत की नरमी का अनुचित लाभ उठा रहा है। अभियोजन के अनुसार, मामा का चेहलुम करीबी रिश्तेदार की श्रेणी में नहीं आता और इस रस्म को परिवार के अन्य सदस्य भी पूरा कर सकते हैं।

माँ की सर्जरी के संदर्भ में अभियोजन पक्ष ने स्पष्ट किया कि यह कोई गंभीर ऑपरेशन नहीं है, बल्कि एक सामान्य प्रक्रिया है जिसमें केवल लोकल एनेस्थीसिया का उपयोग होगा। परिवार के अन्य सदस्य इस दौरान देखभाल के लिए उपलब्ध हैं, इसलिए आरोपी की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।

अदालत का निर्णय और तर्क

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि यद्यपि पूर्व में उमर खालिद और अन्य सह-आरोपियों को अंतरिम जमानत दी गई थी और उन्होंने शर्तों का उल्लंघन नहीं किया, परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि प्रत्येक याचिका स्वतः स्वीकार्य हो जाए।

अदालत ने रेखांकित किया कि प्रत्येक नई याचिका का मूल्यांकन उसके अपने तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए। इस बार प्रस्तुत किए गए दोनों कारणों को पर्याप्त न मानते हुए अदालत ने अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

मामले की पृष्ठभूमि

उमर खालिद फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में सितंबर 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज है, जो जमानत की शर्तों को अत्यंत कठोर बनाता है। गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय भी इससे पहले उनकी नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई कर चुका है।

आगे की स्थिति

अंतरिम जमानत खारिज होने के बाद उमर खालिद की न्यायिक हिरासत जारी रहेगी। मामले में मुकदमे की कार्यवाही अभी भी जारी है। बचाव पक्ष के पास उच्च न्यायालय में इस आदेश को चुनौती देने का विकल्प उपलब्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ जमानत की शर्तें इतनी कठोर हैं कि मानवीय आधार भी अदालत में पर्याप्त नहीं ठहरते। अदालत का यह रुख — कि पूर्व अनुपालन भविष्य की जमानत की गारंटी नहीं — कानूनी दृष्टि से सही हो सकता है, लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि UAPA मामलों में विचाराधीन कैदियों के लिए मानवीय राहत का दायरा कितना संकुचित होता जा रहा है। सह-आरोपियों को समान आधारों पर जमानत मिलने की मिसाल होने के बावजूद इस याचिका का खारिज होना न्यायिक एकरूपता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका क्यों खारिज हुई?
कड़कड़डूमा कोर्ट ने माना कि उमर खालिद द्वारा प्रस्तुत दोनों आधार — मामा का चेहलुम और माँ की सर्जरी — जमानत के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने कहा कि हर याचिका को उसके अपने तथ्यों पर परखा जाना चाहिए और पूर्व अनुपालन स्वतः राहत का अधिकार नहीं देता।
उमर खालिद किस मामले में न्यायिक हिरासत में हैं?
उमर खालिद फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में सितंबर 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज है।
बचाव पक्ष ने जमानत के लिए क्या तर्क दिए थे?
बचाव पक्ष ने कहा कि उमर खालिद परिवार के इकलौते बेटे हैं, उनके 71 वर्षीय पिता माँ की देखभाल करने में असमर्थ हैं और चारों बहनें अलग-अलग स्थानों पर रहती हैं। साथ ही, सह-आरोपियों को पारिवारिक आधार पर जमानत मिलने का हवाला देते हुए समानता के सिद्धांत पर राहत माँगी गई।
अभियोजन पक्ष ने माँ की सर्जरी के आधार पर क्या कहा?
अभियोजन पक्ष ने कहा कि माँ की सर्जरी कोई गंभीर ऑपरेशन नहीं है और इसमें केवल लोकल एनेस्थीसिया दिया जाएगा। परिवार के अन्य सदस्य देखभाल के लिए उपलब्ध हैं, इसलिए आरोपी की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।
अब उमर खालिद के पास क्या कानूनी विकल्प हैं?
कड़कड़डूमा कोर्ट के आदेश के विरुद्ध बचाव पक्ष दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है। मामले में मुकदमे की कार्यवाही अभी भी जारी है और उमर खालिद की न्यायिक हिरासत फिलहाल बनी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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