उमर खालिद की ई-मुलाकात बहाल: कड़कड़डूमा कोर्ट ने सप्ताह में दो वीडियो कॉल का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में विचाराधीन कैदी उमर खालिद को राहत देते हुए उनके परिवार के साथ सप्ताह में दो बार ई-मुलाकात (वीडियो कॉल) की सुविधा पुनः बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस सुविधा में कटौती का कोई उचित आधार रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है।
मामले का पृष्ठभूमि
उमर खालिद गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) समेत विभिन्न धाराओं के तहत 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि खालिद पिछले करीब छह वर्षों से बिना किसी जेल नियम का उल्लंघन किए सप्ताह में दो बार ई-मुलाकात की सुविधा का नियमित उपयोग कर रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम
बचाव पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि मई 2026 से बिना कोई कारण बताए ई-मुलाकातों की संख्या दो से घटाकर एक कर दी गई थी। बचाव पक्ष ने इसे मनमाना निर्णय बताते हुए पूर्ववर्ती व्यवस्था बहाल करने की माँग की। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बचाव पक्ष की याचिका स्वीकार करते हुए सप्ताह में दो बार वीडियो कॉल की सुविधा फिर से बहाल करने का आदेश पारित किया।
जमानत याचिकाओं की स्थिति
इससे पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने इसी मामले में उमर खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाएँ खारिज कर दी थीं। दोनों ने दूसरी बार जमानत की माँग करते हुए तर्क दिया था कि 5 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद भी मुकदमे की सुनवाई में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार दोनों आरोपी एक वर्ष पूरा होने या अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद ही नई जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं। चूँकि इनमें से कोई भी शर्त अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए इस चरण में जमानत याचिका सुनवाई योग्य नहीं मानी गई।
कानूनी पेचीदगी
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि जमानत से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सर्वोच्च न्यायालय की बड़ी पीठ विचार कर रही है। उस पर अंतिम निर्णय आने तक निचली अदालत इस संबंध में कोई स्वतंत्र राहत देने की स्थिति में नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब यूएपीए के तहत लंबे समय तक विचाराधीन कैद और मानवीय सुविधाओं के अधिकार पर बहस तेज़ हो रही है।
आगे क्या
ई-मुलाकात बहाली के इस आदेश से खालिद को तत्काल राहत मिलेगी, लेकिन उनकी जमानत और मुकदमे की सुनवाई की प्रगति सर्वोच्च न्यायालय की बड़ी पीठ के निर्णय पर निर्भर करेगी। मामले में अगली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।