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भारत-यूके CETA लागू: निर्यात और प्रौद्योगिकी साझेदारी के नए द्वार खुले, उद्योग संगठनों ने सराहा

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भारत-यूके CETA लागू: निर्यात और प्रौद्योगिकी साझेदारी के नए द्वार खुले, उद्योग संगठनों ने सराहा

सारांश

भारत-यूके CETA लागू होते ही उद्योग जगत में उत्साह की लहर है — PHDCCI और CII ने इसे ऐतिहासिक बताया। स्मार्टफोन से लेकर फार्मा तक, भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटिश बाज़ार के नए दरवाज़े खुले हैं और प्रौद्योगिकी साझेदारी का एक नया अध्याय शुरू हुआ है।

मुख्य बातें

भारत-यूके CETA 16 जुलाई 2025 से औपचारिक रूप से लागू हो गया।
PHDCCI ने समझौते पर विस्तृत शोध रिपोर्ट जारी की, जिसमें निर्यात अवसरों और नीतिगत उपायों का विश्लेषण है।
स्मार्टफोन, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, फुटवियर और प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद सबसे अधिक लाभान्वित होने वाले क्षेत्रों में।
PHDCCI अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा — यह समझौता व्यापार को वस्तु-आधारित से प्रौद्योगिकी-केंद्रित रणनीतिक साझेदारी में बदलेगा।
CII महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की उम्मीद जताई।

भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 16 जुलाई 2025 को औपचारिक रूप से लागू हो गया, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटिश बाज़ार में नए अवसरों का रास्ता खुल गया है। देश के प्रमुख उद्योग संगठनों ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह द्विपक्षीय व्यापार को पारंपरिक वस्तु-आधारित संबंधों से आगे ले जाकर प्रौद्योगिकी-केंद्रित रणनीतिक साझेदारी में बदलने की क्षमता रखता है।

मुख्य घटनाक्रम

समझौते के लागू होने के अवसर पर पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने 'इंडिया-यूके CETA: निर्यात अवसरों और बाज़ार पहुँच के लिए एक रणनीतिक मार्गदर्शिका' शीर्षक से एक विस्तृत शोध रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में द्विपक्षीय व्यापार की संभावनाओं, क्षेत्रवार प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता, तकनीकी सहयोग और समझौते से अधिकतम लाभ उठाने के लिए आवश्यक नीतिगत उपायों का गहन विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ब्रिटेन को होने वाला निर्यात अब तेज़ी से उच्च मूल्य वाले विनिर्माण उत्पादों की ओर स्थानांतरित हो रहा है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना और सुदृढ़ औद्योगिक नीतियों ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कौन-से क्षेत्र होंगे लाभान्वित

PHDCCI की रिपोर्ट में स्मार्टफोन, फार्मास्यूटिकल्स, एल्युमिनियम ऑक्साइड, पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, मशीनरी के पुर्जे, फुटवियर और प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद को भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते निर्यात क्षेत्रों में गिनाया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है।

इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स, विशेष सामग्री (स्पेशियलिटी मैटेरियल्स) और डिजिटल सेवाएँ भी उन क्षेत्रों में शामिल हैं जिनमें इस समझौते के ज़रिये प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल की जा सकती है।

उद्योग संगठनों की प्रतिक्रिया

PHDCCI के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि भारत-यूके CETA में द्विपक्षीय व्यापार को पारंपरिक वस्तु-आधारित संबंधों से आगे बढ़ाकर प्रौद्योगिकी आधारित रणनीतिक आर्थिक साझेदारी में बदलने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता और ब्रिटेन की नवाचार एवं उन्नत तकनीक में विशेषज्ञता मिलकर निर्यात बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की भागीदारी को मज़बूत करने के बड़े अवसर पैदा करती हैं।

PHDCCI के महासचिव एवं सीईओ डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि यह समझौता भारतीय उद्योगों को अपने निर्यात बाज़ारों में विविधता लाने और तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने इस समझौते के लागू होने को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। बनर्जी ने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारत अब ऐसे संतुलित और उच्च गुणवत्ता वाले व्यापार समझौतों की दिशा में आगे बढ़ रहा है जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और सुदृढ़ बनाते हैं।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि भारत और ब्रिटेन के बीच यह समझौता वर्षों की वार्ता के बाद अंतिम रूप पाया है। यह ऐसे समय में लागू हुआ है जब भारत अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ भी मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में सक्रिय है। विशेषज्ञों के अनुसार, CETA भारत के उन व्यापार समझौतों में से एक है जो केवल शुल्क-कटौती तक सीमित नहीं, बल्कि सेवाओं, निवेश और बौद्धिक संपदा जैसे क्षेत्रों को भी समेटता है।

आगे की राह

उद्योग जगत की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि CETA के प्रावधानों को ज़मीनी स्तर पर कितनी तेज़ी से लागू किया जाता है। निर्यातकों को उम्मीद है कि शुल्क रियायतें और बाज़ार पहुँच के नए रास्ते भारतीय विनिर्माण को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और सशक्त बनाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी। उद्योग संगठनों का उत्साह स्वाभाविक है, परंतु यह ध्यान देने योग्य है कि भारत के पिछले कई व्यापार समझौते — जैसे ASEAN FTA — वास्तविक निर्यात वृद्धि के बजाय आयात असंतुलन बढ़ाने के लिए आलोचना झेल चुके हैं। PLI योजना से जुड़े क्षेत्रों में निर्यात की बात तो होती है, लेकिन वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की हिस्सेदारी अभी भी अपेक्षाकृत सीमित है। बिना मज़बूत निगरानी तंत्र और एमएसएमई को सक्रिय रूप से जोड़े, CETA का लाभ बड़े कॉर्पोरेट समूहों तक ही सिमटने का जोखिम है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-यूके CETA क्या है और यह कब लागू हुआ?
भारत-यूके CETA (व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता) भारत और ब्रिटेन के बीच एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता है जो 16 जुलाई 2025 से लागू हुआ। यह समझौता वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और तकनीकी सहयोग को एकसाथ कवर करता है।
CETA से भारतीय निर्यातकों को क्या फायदा होगा?
PHDCCI की रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्टफोन, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, फुटवियर और प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों को ब्रिटिश बाज़ार में बेहतर पहुँच मिलेगी। शुल्क रियायतें और बाज़ार पहुँच के नए रास्ते भारतीय विनिर्माण को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सशक्त बनाएँगे।
PHDCCI ने CETA पर कौन-सी रिपोर्ट जारी की?
PHDCCI ने 'इंडिया-यूके CETA: निर्यात अवसरों और बाज़ार पहुँच के लिए एक रणनीतिक मार्गदर्शिका' शीर्षक से एक शोध रिपोर्ट जारी की। इसमें द्विपक्षीय व्यापार, क्षेत्रवार प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और नीतिगत उपायों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
CII ने इस समझौते पर क्या कहा?
CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने CETA के लागू होने को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मज़बूत बनाएगा।
CETA से प्रौद्योगिकी साझेदारी कैसे मज़बूत होगी?
PHDCCI अध्यक्ष राजीव जुनेजा के अनुसार, भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता और ब्रिटेन की नवाचार एवं उन्नत तकनीक में विशेषज्ञता मिलकर वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की भागीदारी को मज़बूत करेंगी। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और डिजिटल सेवाओं में सहयोग के विशेष अवसर हैं।
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