जयशंकर-कूपर वार्ता: भारत-ब्रिटेन विजन 2035 पर आगे बढ़े, CETA और रक्षा रोडमैप की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 5 जून 2025 को नई दिल्ली में ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और कहा कि भारत तथा ब्रिटेन एक नई भविष्योन्मुखी एवं आपसी लाभ पर आधारित साझेदारी बनाने के लिए मज़बूत स्थिति में हैं। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर और भारत-ब्रिटेन विजन 2035 के पाँच स्तंभों पर प्रगति की समीक्षा की गई।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त पी. कुमारन और दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। जयशंकर ने पिछले वर्ष के दो अहम दौरों का उल्लेख किया — जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ब्रिटेन दौरा और अक्टूबर 2024 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का भारत दौरा — जिन्हें उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों में निर्णायक मोड़ बताया।
जयशंकर के प्रमुख बयान
जयशंकर ने कहा, "हमारा संबंध आज एक ऐतिहासिक और शायद सांस्कृतिक जुड़ाव से आगे बढ़कर साझा आर्थिक लक्ष्य और उच्च तकनीक के आगे बढ़ने वाले हाईवे में बदल गया है।" उन्होंने यह भी कहा कि CETA कई देशों की चिंताओं को दूर करता है — जिसमें मज़बूत सप्लाई चेन, व्यापार, ऊर्जा, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा शामिल हैं।
विजन 2035 के पाँच स्तंभ
जयशंकर ने बताया कि आज की वार्ता भारत-ब्रिटेन विजन 2035 के पाँच स्तंभों — विकास, तकनीक एवं इनोवेशन, रक्षा एवं सुरक्षा, जलवायु एवं स्वच्छ ऊर्जा तथा शिक्षा — पर केंद्रित रही। उन्होंने हाल की उल्लेखनीय प्रगति का जिक्र करते हुए तकनीकी सुरक्षा पहल, रक्षा उद्योग रोडमैप, जलवायु प्रौद्योगिकी स्टार्टअप फंड, ऑफशोर विंड एनर्जी टास्क फोर्स और ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के भारत में परिसर स्थापित करने का उल्लेख किया।
शिक्षा क्षेत्र में नई पहल
इस बैठक के दौरान एक विशेष घोषणा की गई — यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल भारत में अपना परिसर स्थापित करेगी। यह ब्रिटिश विश्वविद्यालयों की उस श्रृंखला में नवीनतम है जो भारत में विस्तार कर रहे हैं। यह कदम दोनों देशों के बीच शिक्षा सहयोग के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
आगे की राह
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और ब्रिटेन के बीच CETA पर हस्ताक्षर के बाद व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति मिल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, रक्षा उद्योग रोडमैप और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में आने वाले महीनों में ठोस पहल की उम्मीद है। दोनों विदेश मंत्रियों की इस वार्ता से भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिलने की संभावना है।