ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर का दो दिवसीय भारत दौरा, जयशंकर-मोदी से अहम मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
ब्रिटेन की विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास मामलों की मंत्री यवेट कूपर बुधवार को दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुँचेंगी, जहाँ वह विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी और गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी। यह यात्रा जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के बाद दोनों देशों के बीच पहले उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संवादों में से एक है।
एजेंडे में क्या-क्या
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत बातचीत होगी। दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के क्रियान्वयन और आर्थिक रिश्तों को और गहरा करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श करेंगे।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि भारत-ब्रिटेन सहयोग केवल मुक्त व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है। उन्होंने जोड़ा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक, रक्षा और सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी है, और दोनों पक्ष व्यापार तथा निवेश संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
हालिया उच्च-स्तरीय संपर्क
इससे पहले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिटेन के व्यापार एवं वाणिज्य मंत्री पीटर काइल के साथ बैठक की थी, जिसमें भारत-ब्रिटेन आर्थिक सहयोग के अगले चरण, साझा व्यापारिक प्राथमिकताओं और द्विपक्षीय साझेदारी को और मज़बूत करने पर चर्चा हुई। गोयल ने इस वार्ता को सकारात्मक और भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण करार दिया था।
गौरतलब है कि 23 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके ब्रिटिश समकक्ष जोनाथन पॉवेल के बीच वार्षिक भारत-ब्रिटेन रणनीतिक संवाद भी आयोजित हुआ था। विदेश मंत्रालय ने एक्स पर कहा था, “इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और मज़बूत बनाने तथा क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया था।” पॉवेल ने जयशंकर से भी मुलाकात कर क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की थी।
क्यों मायने रखती है यह यात्रा
CETA पर हस्ताक्षर के बाद से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में स्पष्ट तेज़ी आई है, और कूपर का यह दौरा समझौते के व्यावहारिक क्रियान्वयन की दिशा में राजनीतिक गति बनाए रखने का प्रयास माना जा रहा है। आने वाले दिनों में रक्षा खरीद, टेक्नोलॉजी सहयोग और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे मुद्दों पर ठोस घोषणाओं की संभावना पर भी कूटनीतिक हलकों की नज़र रहेगी।