जयशंकर ने एड मिलिबैंड को ब्रिटेन का विदेश मंत्री बनने पर दी बधाई, CETA का किया जिक्र
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को एड मिलिबैंड को ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास मामलों के मंत्री के रूप में नियुक्त किए जाने पर बधाई दी। जयशंकर ने कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए वह मिलिबैंड के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं।
जयशंकर का एक्स पर संदेश
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, 'एड मिलिबैंड को ब्रिटेन का विदेश मंत्री नियुक्त होने पर बधाई। हाल के वर्षों में भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी ने मजबूत गति हासिल की है, जिसमें सीईटीए (CETA) का लागू होना भी शामिल है। इस सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ काम करने की प्रतीक्षा में है।' यह बधाई संदेश ऐसे समय आया है जब भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार, ऊर्जा और जलवायु क्षेत्रों में सहयोग नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।
एड मिलिबैंड: एक परिचय
एड मिलिबैंड को सोमवार, 20 जुलाई 2026 को ब्रिटेन के विदेश मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। वह मई 2005 में डॉनकास्टर नॉर्थ निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए थे। जुलाई 2024 से जुलाई 2026 तक वह ब्रिटेन के ऊर्जा सुरक्षा और नेट जीरो मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं।
इससे पहले मिलिबैंड 2007 में कैबिनेट ऑफिस मंत्री और 2008 से 2010 तक ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री रहे। इसी भूमिका में उन्होंने 2008 के ऐतिहासिक 'क्लाइमेट चेंज एक्ट' को लागू करने में अहम योगदान दिया, जिसके तहत ब्रिटेन दुनिया का पहला देश बना जिसने जलवायु लक्ष्यों को कानूनी रूप दिया। 2010 से 2015 तक वह लेबर पार्टी के नेता और ब्रिटिश संसद में विपक्ष के नेता भी रहे।
भारत-ब्रिटेन ऊर्जा सहयोग में मिलिबैंड की भूमिका
गौरतलब है कि जब मिलिबैंड ब्रिटेन के ऊर्जा सुरक्षा और नेट जीरो मंत्री थे, तब उन्होंने भारत के केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास तथा शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल के साथ चौथे भारत-ब्रिटेन ऊर्जा संवाद की सह-अध्यक्षता की थी। इस संवाद में दोनों देशों के ऊर्जा क्षेत्र — विशेष रूप से बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा — में हुई प्रगति की समीक्षा की गई।
दोनों देशों ने समुद्री पवन ऊर्जा के विकास को लेकर साझा प्रतिबद्धता जताते हुए यूके-इंडिया ऑफशोर विंड टास्कफोर्स की स्थापना का ऐलान किया था। यह टास्कफोर्स दोनों देशों में समुद्री पवन ऊर्जा से जुड़े इकोसिस्टम, सप्लाई चेन और वित्तीय मॉडल के विकास पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। बैठक में समुद्री पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े व्यापार मिशनों और ब्रिटेन की एनर्जी सिस्टम्स कैटापल्ट तथा भारत की पावर ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के बीच सहयोग पर भी चर्चा हुई थी।
आगे की राह
मिलिबैंड की विदेश मंत्री के रूप में नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और रणनीतिक साझेदारी के क्षेत्रों में सहयोग लगातार गहरा हो रहा है। CETA के लागू होने के बाद द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा और जलवायु क्षेत्र में मिलिबैंड का व्यापक अनुभव भारत-ब्रिटेन हरित साझेदारी को और मज़बूत कर सकता है।