भारत-यूके एफटीए लागू: 2030 तक ₹100 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य, 75,000 पेशेवरों को सीधा फायदा
सारांश
मुख्य बातें
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) बुधवार, 15 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। 14 दौर की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित यह समझौता भारत के सबसे व्यापक व्यापार करारों में से एक है।
समझौते में क्या शामिल है
इस एफटीए में कुल 30 अध्याय हैं, जिनमें वस्तु एवं सेवा व्यापार, डिजिटल व्यापार, वित्तीय सेवाएँ, बौद्धिक संपदा, नवाचार, सस्टेनेबिलिटी और सरकारी खरीद जैसे विषय शामिल हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच बाज़ार पहुँच को बेहतर बनाने, औद्योगिक नवाचार को गति देने और पेशेवर स्तर पर आवाजाही को सुगम बनाने के लिए एक ठोस नियामक ढाँचा प्रदान करता है।
भारतीय निर्यातकों को क्या मिला
एफटीए के तहत भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को यूके में शून्य-शुल्क प्रवेश मिलेगा, जिससे व्यावहारिक रूप से भारत-यूके के कुल व्यापार मूल्य का लगभग 100 प्रतिशत हिस्सा शुल्क-मुक्त हो जाता है।
क्षेत्रवार देखें तो शुल्क कटौती का असर व्यापक है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर पहले 70 प्रतिशत तक शुल्क लगता था, जो अब शून्य हो गया है। सब्जियों पर 20 प्रतिशत तक से घटकर शून्य, परिवहन एवं ऑटो क्षेत्र पर 18 प्रतिशत तक से घटकर शून्य और वस्त्र पर 12 प्रतिशत तक से घटकर शून्य शुल्क हो गया है। इसके अतिरिक्त रसायन, आभूषण, प्लास्टिक, रबर और घड़ियों पर भी शुल्क समाप्त कर दिया गया है।
पेशेवरों को क्या फायदा होगा
इस एफटीए का सबसे बड़ा लाभ भारतीय पेशेवरों को मिलने वाला है। यूके ने भारतीय कर्मचारियों के लिए डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) की छूट को तीन वर्ष से बढ़ाकर पाँच वर्ष कर दिया है। इससे यूके में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीयों को दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान की बाध्यता से मुक्ति मिलेगी। आँकड़ों के अनुसार, इस प्रावधान से आईटी, इंजीनियरिंग, कंसल्टिंग और हेल्थकेयर क्षेत्र के 75,000 से अधिक पेशेवरों और लगभग 900 कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारत के संरक्षित क्षेत्र
भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। डेयरी, फल, सब्जियाँ और खाद्यान्न को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है, जो घरेलू किसानों और कृषि उद्योग के हितों की रक्षा के लिए एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।
यूके के उत्पादों पर असर और आगे की राह
ब्रिटिश उत्पादों की दृष्टि से स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स जैसे उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ अब चरणबद्ध तरीके से कम होने लगेंगे। हालाँकि, कई उत्पादों पर शुल्क कटौती आने वाले वर्षों में धीरे-धीरे लागू की जाएगी। गौरतलब है कि यह समझौता ऐसे समय में लागू हुआ है जब भारत वैश्विक व्यापार पुनर्संरेखण के बीच अपने निर्यात बाज़ारों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। यूके को दुनिया के सबसे प्रीमियम उपभोक्ता बाज़ारों में गिना जाता है, और भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक बड़ा अवसर है। आने वाले महीनों में इस समझौते के क्रियान्वयन की गति और क्षेत्रीय दिशानिर्देश यह तय करेंगे कि इसके वास्तविक आर्थिक लाभ कितनी जल्दी ज़मीन पर दिखते हैं।