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भारत-यूके व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू, 99% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुँच

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भारत-यूके व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू, 99% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुँच

सारांश

पाँच साल की वार्ता के बाद भारत-यूके सीईटीए 15 जुलाई 2026 से लागू होगा — 99% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुँच, डीसीसी के तहत पेशेवरों को राहत, और 2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य। यह भारत के सबसे व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में से एक है।

मुख्य बातें

भारत-यूके सीईटीए और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) दोनों 15 जुलाई 2026 से एक साथ लागू होंगे।
भारत की 99% टैरिफ लाइनों पर यूके में तुरंत शुल्क-मुक्त पहुँच मिलेगी — वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग और प्रोसेस्ड फूड को सीधा लाभ।
डीसीसी के तहत छूट अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल की गई, यूके में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को राहत।
30 अध्यायों वाला यह समझौता डिजिटल व्यापार, वित्तीय सेवाएँ, बौद्धिक संपदा और सरकारी खरीद को भी कवर करता है।
लक्ष्य: 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुँचाना; समझौते की नींव मई 2021 में रखी गई थी।
भारत ने डेयरी, अनाज, मिलेट्स, खाद्य तेल और सेब जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की।

भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच बहुप्रतीक्षित कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से प्रभाव में आएगा, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत होगी। वाणिज्य मंत्रालय ने 17 जून 2026 को यह घोषणा करते हुए बताया कि इसी तिथि से डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) भी एक साथ लागू होगा, जो यूके में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को सीधा लाभ पहुँचाएगा।

समझौते में क्या है खास

30 अध्यायों वाला यह सीईटीए नई पीढ़ी के व्यापार समझौतों का एक नया मॉडल माना जा रहा है। यह केवल आयात-निर्यात शुल्क कम करने तक सीमित नहीं है — इसमें डिजिटल व्यापार, दूरसंचार, वित्तीय सेवाएँ, बौद्धिक संपदा अधिकार और पहली बार द्विपक्षीय स्तर पर सरकारी खरीद जैसे आधुनिक क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। यह समझौता सीधे तौर पर भारत के 'विकसित भारत 2047' के विजन को समर्थन देता है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, "15 जुलाई 2026 से सीईटीए और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के एक साथ लागू होने से भारत के निर्यात के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे। हमारे 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत शुल्क-मुक्त पहुँच मिलने से लंबे समय से मौजूद शुल्क संबंधी बाधाएँ खत्म हो जाएंगी।" उन्होंने आगे कहा कि इससे भारत के वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को वैश्विक बाजार में बराबरी का अवसर मिलेगा।

भारतीय पेशेवरों को डीसीसी से राहत

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, डीसीसी के तहत मिलने वाली छूट की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पाँच साल कर दी गई है। यह यूके में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इससे दोहरे सामाजिक सुरक्षा अंशदान का बोझ कम होगा और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, "भारत-यूके संबंधों के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुझे खुशी है कि भारत-यूके कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को काफी बढ़ावा देगा।" उन्होंने यह भी कहा कि इससे भारतीय किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार करने वालों के लिए नए अवसर खुलेंगे, और प्रधानमंत्री स्टार्मर के साथ मिलकर दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया।

समझौते की पृष्ठभूमि

इस ऐतिहासिक समझौते की नींव मई 2021 में रखी गई थी, जब दोनों देशों ने एन्हांस्ड ट्रेड पार्टनरशिप और इंडिया-यूके रोडमैप 2030 को अपनाया था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुँचाना और 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाना था। गौरतलब है कि वार्ता पाँच वर्षों से अधिक समय तक चली, जो इस समझौते की जटिलता और दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह भी उल्लेखनीय है कि भारत ने डेयरी उत्पाद, अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), खाद्य तेल, तिलहन, सेब और कई सब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी इस समझौते में सुनिश्चित की है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, सीईटीए और डीसीसी के एक साथ लागू होने से भारत की वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक बड़ा और संरचनात्मक बदलाव आएगा।

आगे की राह

15 जुलाई की तिथि अब दोनों देशों के उद्योग जगत के लिए एक निर्णायक पड़ाव बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीईटीए का सफल क्रियान्वयन भारत को अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं — जैसे यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों — के साथ समान स्तर के व्यापार समझौतों की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — न कि घोषणा की। 99% टैरिफ-मुक्त पहुँच का वादा तब तक अधूरा है जब तक कि भारतीय एमएसएमई और वस्त्र उद्योग यूके के गुणवत्ता मानकों और आपूर्ति-श्रृंखला की माँगों को पूरा करने में सक्षम नहीं हो जाते। डीसीसी के तहत पेशेवरों को राहत स्वागत योग्य है, परंतु यह प्रश्न अनुत्तरित है कि क्या वीज़ा और गतिशीलता प्रावधान उस स्तर पर हैं जो भारतीय आईटी और सेवा क्षेत्र को वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकें। संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा घरेलू राजनीति की जीत है, लेकिन यह दीर्घकालिक व्यापार विस्तार की गुंजाइश को भी सीमित करती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-यूके सीईटीए क्या है और यह कब लागू होगा?
भारत-यूके कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। यह 30 अध्यायों वाला व्यापक व्यापार समझौता है जो शुल्क कटौती के साथ-साथ डिजिटल व्यापार, वित्तीय सेवाएँ और सरकारी खरीद जैसे क्षेत्रों को भी कवर करता है।
डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) से भारतीय पेशेवरों को क्या फायदा होगा?
डीसीसी के तहत यूके में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों को दोहरे सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट मिलती है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार इस छूट की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पाँच साल कर दी गई है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
सीईटीए से भारत के किन क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, 99% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुँच से वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग और प्रोसेस्ड फूड क्षेत्रों को सबसे बड़ा फायदा होगा। इसके अलावा एमएसएमई, स्टार्टअप और किसानों के लिए भी नए अवसर खुलने की बात कही गई है।
क्या भारत ने कृषि क्षेत्र को इस समझौते में सुरक्षित रखा है?
हाँ, वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत ने डेयरी उत्पाद, अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), खाद्य तेल, तिलहन, सेब और कई सब्जियों जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को सीईटीए के शुल्क-उदारीकरण से बाहर रखते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की है।
भारत-यूके व्यापार समझौते की शुरुआत कब और कैसे हुई?
इस समझौते की नींव मई 2021 में रखी गई थी, जब दोनों देशों ने एन्हांस्ड ट्रेड पार्टनरशिप और इंडिया-यूके रोडमैप 2030 को अपनाया था। इसका दीर्घकालिक लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुँचाना है।
राष्ट्र प्रेस
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