भारत-यूके व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू, 99% टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुँच
सारांश
मुख्य बातें
भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच बहुप्रतीक्षित कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से प्रभाव में आएगा, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत होगी। वाणिज्य मंत्रालय ने 17 जून 2026 को यह घोषणा करते हुए बताया कि इसी तिथि से डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) भी एक साथ लागू होगा, जो यूके में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को सीधा लाभ पहुँचाएगा।
समझौते में क्या है खास
30 अध्यायों वाला यह सीईटीए नई पीढ़ी के व्यापार समझौतों का एक नया मॉडल माना जा रहा है। यह केवल आयात-निर्यात शुल्क कम करने तक सीमित नहीं है — इसमें डिजिटल व्यापार, दूरसंचार, वित्तीय सेवाएँ, बौद्धिक संपदा अधिकार और पहली बार द्विपक्षीय स्तर पर सरकारी खरीद जैसे आधुनिक क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। यह समझौता सीधे तौर पर भारत के 'विकसित भारत 2047' के विजन को समर्थन देता है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, "15 जुलाई 2026 से सीईटीए और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के एक साथ लागू होने से भारत के निर्यात के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे। हमारे 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत शुल्क-मुक्त पहुँच मिलने से लंबे समय से मौजूद शुल्क संबंधी बाधाएँ खत्म हो जाएंगी।" उन्होंने आगे कहा कि इससे भारत के वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को वैश्विक बाजार में बराबरी का अवसर मिलेगा।
भारतीय पेशेवरों को डीसीसी से राहत
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, डीसीसी के तहत मिलने वाली छूट की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पाँच साल कर दी गई है। यह यूके में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इससे दोहरे सामाजिक सुरक्षा अंशदान का बोझ कम होगा और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, "भारत-यूके संबंधों के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुझे खुशी है कि भारत-यूके कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को काफी बढ़ावा देगा।" उन्होंने यह भी कहा कि इससे भारतीय किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार करने वालों के लिए नए अवसर खुलेंगे, और प्रधानमंत्री स्टार्मर के साथ मिलकर दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया।
समझौते की पृष्ठभूमि
इस ऐतिहासिक समझौते की नींव मई 2021 में रखी गई थी, जब दोनों देशों ने एन्हांस्ड ट्रेड पार्टनरशिप और इंडिया-यूके रोडमैप 2030 को अपनाया था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुँचाना और 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाना था। गौरतलब है कि वार्ता पाँच वर्षों से अधिक समय तक चली, जो इस समझौते की जटिलता और दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह भी उल्लेखनीय है कि भारत ने डेयरी उत्पाद, अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), खाद्य तेल, तिलहन, सेब और कई सब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी इस समझौते में सुनिश्चित की है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, सीईटीए और डीसीसी के एक साथ लागू होने से भारत की वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक बड़ा और संरचनात्मक बदलाव आएगा।
आगे की राह
15 जुलाई की तिथि अब दोनों देशों के उद्योग जगत के लिए एक निर्णायक पड़ाव बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीईटीए का सफल क्रियान्वयन भारत को अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं — जैसे यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों — के साथ समान स्तर के व्यापार समझौतों की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।