भारत-यूके सीईटीए 15 जुलाई से लागू: स्कॉच व्हिस्की सस्ती, 99% टैरिफ लाइनों पर भारतीय निर्यात को जीरो-ड्यूटी एक्सेस
सारांश
मुख्य बातें
भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया है, जिसके तहत भारतीय निर्यातकों को यूके की लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य-शुल्क पहुँच मिलेगी और ब्रिटिश उत्पादों पर भारत में आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से घटाया जाएगा। 14 दौर की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।
समझौते में क्या-क्या शामिल है
सीईटीए में कुल 30 अध्याय हैं, जो सामान, सेवाएँ, डिजिटल व्यापार, वित्तीय सेवाएँ, बौद्धिक संपदा, नवाचार, सतत विकास और सरकारी खरीद जैसे व्यापक क्षेत्रों को कवर करते हैं। भारत 90 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क घटाएगा या समाप्त करेगा, जिनमें से 85 प्रतिशत अगले एक दशक में पूरी तरह शुल्क-मुक्त हो जाएँगी।
ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ तत्काल प्रभाव से 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया गया है और अगले 10 वर्षों में यह 40 प्रतिशत तक आ जाएगा। इसी तरह जिन, चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर शुल्क कटौती लागू होने लगी है। ब्रिटिश ऑटोमोबाइल पर ड्यूटी कोटा-आधारित प्रणाली के तहत धीरे-धीरे कम की जाएगी।
भारतीय निर्यातकों को क्या फायदा
टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, खेल का सामान तथा खिलौने जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों को इस समझौते से सर्वाधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स और ऑर्गेनिक केमिकल क्षेत्र को भी यूके बाज़ार तक बेहतर पहुँच मिलेगी।
गौरतलब है कि यूके भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है और यह समझौता महिला उद्यमियों, युवाओं, स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए वैश्विक अवसरों के नए द्वार खोलेगा।
सरकार की प्रतिक्रिया और निर्देश
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सीईटीए से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और नवाचार में सहयोग बढ़ेगा तथा व्यापारियों और पेशेवरों के लिए नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने भारतीय कंपनियों से यूके की कंपनियों के साथ संबंध मज़बूत करने और इस समझौते को निरंतर व्यापारिक वृद्धि में बदलने का आह्वान किया।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने इससे संबंधित नियम जारी किए हैं, जिनमें यह निर्धारित करने की प्रक्रिया बताई गई है कि कोई सामान समझौते के तहत विशेष टैरिफ सुविधा के लिए योग्य है या नहीं। साथ ही निर्यातकों और आयातकों के लिए आवश्यक अनुपालन नियमों की जानकारी भी दी गई है।
पेशेवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा राहत
यह समझौता यूके में अस्थायी रूप से कार्यरत योग्य भारतीय पेशेवरों को 'डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन' के माध्यम से महत्वपूर्ण राहत देता है। इसके तहत वे एक निर्धारित अवधि के लिए दोनों देशों में सामाजिक सुरक्षा योगदान देने की बाध्यता से मुक्त रहेंगे — यह प्रावधान भारतीय आईटी और सेवा क्षेत्र के पेशेवरों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और अमेरिकी टैरिफ अनिश्चितताओं के बीच नए बाज़ारों की तलाश तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि स्कॉच व्हिस्की और ऑटोमोबाइल पर शुल्क कटौती से घरेलू उद्योग पर दीर्घकालिक दबाव पड़ सकता है, हालाँकि सरकार ने इसे क्रमिक और संतुलित बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, समझौते का वास्तविक लाभ तब दिखेगा जब भारतीय निर्यातक यूके बाज़ार में अपनी उपस्थिति सक्रिय रूप से दर्ज करेंगे।